Chhoti Diwali 2026: कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि आरंभ हो चुकी है. छोटी दीवाली को नरक चतुर्दशी, रूप चौदस या काली चौदस भी कहा जाता है. छोटी दिवाली पर घर में पूजा-पाठ और दीपदान करने की परंपरा है. इस दिन यम के नाम का दीपक भी जलाया जाता है. मान्यता है कि इस दीपक को प्रज्वलित करने से अकाल मृत्यु का भय कम होता है और आरोग्य का वरदान मिलता है. बहुत सारे लोगों अक्सर पूछते हैं कि छोटी दीवाली पर कितने दीपक जलाने चाहिए. आइए आज आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं.
ज्योतिष शास्त्र की जानकार अंशु पारीक बताती हैं कि छोटी दिवाली पर दीपक जलाने को लेकर अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं. कहीं पांच, कहीं सात, कहीं 11 तो कहीं 14 दीपक जलाने की परंपरा भी है. इसके अलावा, यमराज के निमित्त दक्षिण दिशा में यम का दीपक भी जलाया जाता है. मान्यता है कि यम का दीपक जलाने से घर-परिवार में सदस्यों को आरोग्य का वरदान मिलता है.
छोटी दिवाली पर कितने दीपक जलाएं?
ज्योतिषविद ने बताया कि नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली पर हमेशा विषम संख्या में दीपक जलाना चाहिए. इसलिए आप 5, 7, 11 या विषम संख्या के क्रम में इससे ज्यादा दीपक भी प्रज्वलित कर सकते हैं. लेकिन ध्यान रहे कि इसमें यम का दीपक अलग से जलाया जाता है. इसलिए इसमें उसे शामिल न करें. मिट्टी से निर्मित यम का दीपक चौमुखी (चार मुंह वाला) होना चाहिए. और इसे हमेशा घर की चौखट के पास या दक्षिण दिशा में ही जलाया जाता है.
यम दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त
छोटी दिवाली पर यम का दीपक कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी और प्रदोष काल के संयोग में जलाया जाता है. 7 नवंबर को प्रदोष काल शाम 5 बजकर 37 मिनट से रात 8 बजकर 10 मिनट तक रहेगा. यानी छोटी दीवाली पर पूजा-पाठ, दीपदान और यम का दीपक जलाने के लिए आपके 2 घंटे से ज्यादा का शुभ मुहूर्त मिलने वाला है.
कैसे जलाएं यम का दीपक?
छोटी दिवाली पर यमराज के नाम से चौमुखा दीपक जलाने की परंपरा है. इसके लिए मिट्टी के दीपक में सरसों या तिल का तेल डालें और चार बत्तियां लगाएं. अब दीपक के नीचे थोड़े से अक्षत रखें. इसके बाद घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके दीपक जलाएं. इस दौरान हाथ जोड़कर यमराज का स्मरण करें और परिवार के सदस्यों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अकाल मृत्यु से सुरक्षा की कामना करें.