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Durga Maa Aarti: नोट कर लीजिए मां दुर्गा की ये खास आरती, नवरात्रि में मिलता है पांच आरतियों का फल

शारदीय नवरात्रि की शुरुआत से ही मां दुर्गा की आरती का विशेष महत्व है. नौ दिनों तक मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. आरती करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन के संकट दूर होते हैं.

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नवरात्रि में माता दुर्गा की आरती का बहुत महत्व है, ये पूजा के चार चरणों में से एक है
नवरात्रि में माता दुर्गा की आरती का बहुत महत्व है, ये पूजा के चार चरणों में से एक है

Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Arti: शारदीय नवरात्रि की आज से शुरुआत हो गई है. पहले दिन देवी शैल पुत्री की पूजा की जाती है. आश्विन महीने की शुक्ल पक्ष की प्रथमा तिथि से नवरात्रि की शुरुआत होती है. सनातन परंपरा में नवरात्रि का विशेष महत्व है. नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. भक्त माता रानी को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और सुबह-शाम आरती करते हैं. 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा की आरती करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन के संकट दूर होते हैं. मां दुर्गा की एक ऐसी आरती भी प्रचलित है, जिसमें उनके अनेक स्वरूपों की स्तुति की गई है. यह बहुत लोक मान्यता की प्रचलित आरती है. 

मां दुर्गा की आरती का महत्व
नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा आरती के बिना अधूरी मानी जाती है. धार्मिक परंपराओं में आरती को पूजा का अंतिम और महत्वपूर्ण चरण माना गया है. मान्यता है कि आरती के माध्यम से भक्त देवी के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करते हैं.  मां दुर्गा की इस प्रसिद्ध आरती माता के काली स्वरूप का करुणा की देवी के रूप में वर्णन किया गया है.

जहां वह सिर्फ उग्र स्वरूप वाली माता नहीं बल्कि भक्तों के लिए ममता का स्वरूप भी हैं. इसमें माता को अम्बे, काली, सिंहवाहिनी, मां, अष्ट भुजा, लक्ष्मी और सती और खप्परवाली कहकर पुकारा गया है. इसके अलावा इसमें शिवजी, विष्णुजी समेत भैरव आदि का भी जिक्र किया गया है. इसलिए मान्यता है कि इसे करने से पांच आरतियों के बराबर फल मिलता है. 

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यहां है मां की आरती, इसे आप अपनी पूजा में शामिल कर सकते हैं...


अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली
तेरे ही गुण गावे भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती

तेरे भक्त जनों पे माता भीड़ पड़ी है भारी भीड़ पड़ी है भारी
दानव दल पर टूट पड़ो माँ करके सिंह सवारी करके सिंह सवारी
सौ-सौ सिहों से भी बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली
दुष्टो को तू ही ललकारती
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली
तेरे ही गुण गावे भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती

माँ बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता बड़ा ही निर्मल नाता
पूत कपूत सुने हैं पर ना माता सुनी कुमाता माता सुनी कुमाता

सब पे करुणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली
दुखियों के दुखड़े निवारती
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली
तेरे ही गुण गावे भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती

नहीं मांगते धन और दौलत, ना चांदी ना सोना ना चांदी ना सोना
हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना में छोटा सा कोना
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली
सतियों के सत को संवारती
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती

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अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली
तेरे ही गुण गावे भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती

चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली ले पूजा की थाली
वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली संकट हरने वाली
माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली
भक्तों के कारज तू ही सारती
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती 

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली
तेरे ही गुण गावे भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती

बैल चढ़े शिव शंकर आए, गरुड़ चढ़े भगवान।
सिंह चढ़ी मेरी मैया आईं, पूरन करने काम।

सब पे करुणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली
दुखियों के दुखड़े निवारती
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली
तेरे ही गुण गावे भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती

घनन घनन घन घंटा बाजे, और बजे खरताल
सिंहनाद मेरी मैया करतीं, दुष्टों की हैं काल

माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली
भक्तों के कारज तू ही सारती
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती 

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली
तेरे ही गुण गावे भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती

 

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