धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नियमित रूप से शनिदेव की आरती करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्ट कम होते हैं. माना जाता है कि इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, कार्यक्षेत्र में स्थिरता आती है और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है. आरती से मन में धैर्य, अनुशासन और सकारात्मकता बढ़ती है तथा सुख-समृद्धि और मान-सम्मान प्राप्त होता है.
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी ।।
जय जय श्री शनिदेव।।।।
श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी ।
नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी ।।
जय जय श्री शनिदेव।।।।
क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी ।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी ।।
जय जय श्री शनिदेव।।।।
मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी ।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी ।।
जय जय श्री शनिदेव।।।।
देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी ।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ।।
जय जय श्री शनिदेव।।।।
-----समाप्त-----