विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान ने राजस्थान पर फोकस करना शुरू कर दिया है. कांग्रेस आलाकमान राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच खींचतान खत्म कर चुनाव में एकजुटता का संदेश देने की रणनीति पर काम कर रही है. इससे पहले राहुल गांधी राजस्थान विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए 1 जुलाई को बैठक करने वाले थे लेकिन लेकिन उस समय सालासर में होने वाले कांग्रेस विधायकों के दो दिवसीय सम्मेलन का हवाला देकर इसे स्थगित कर दिया गया था.
दिल्ली पहुंचे वरिष्ठ नेता
इस बीच पैर की अंगुली में फ्रैक्चर के कारण सीएम अशोक गहलोत की विधायकों और प्रत्याशियों की कॉन्फ्रेंस स्थगित कर दी गई थी. सूत्रों के मुताबिक, आज की बैठक में सीएम अशोक गहलोत वर्चुअली जुड़ेंगे. साथ ही पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट भी बैठक में शामिल हो सकते हैं. बताया जा रहा है कि बैठक में शामिल होने के लिए कांग्रेस मुख्यालय से चुनिंदा नेताओं को फोन किया गया है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, तीनों सह प्रभारी पिछले तीन दिन से दिल्ली में हैं. बैठक में शामिल होने के लिए मंत्री और वरिष्ठ नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं.
ये नेता भी होंगे बैठक में शामिल
खड़गे और राहुल से मुलाकात के दौरान गहलोत और पायलट समेत मंत्री और वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे. विधानसभा चुनाव और कांग्रेस में एकजुटता को लेकर रणनीति बनाने के लिए इस बैठक में सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट समेत 30 नेताओं को बुलाया गया है. इसमें मंत्री और वरिष्ठ नेता शामिल हैं. बैठक में स्पीकर सीपी जोशी भी शामिल हो रहे हैं. प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, सह प्रभारी काजी निजामुद्दीन, अमृता धवन, वीरेंद्र राठौड़ के अलावा अन्य राज्यों के प्रभारी नेता रघु शर्मा, भंवर जितेंद्र सिंह, हरीश चौधरी, मोहन प्रकाश, सीडब्ल्यूसी बैठक में सदस्य रघुवीर मीना, पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी, राज्यसभा सांसद नीरज डांगी को बुलाया गया है.
बैठक में यूपी के सह प्रभारी सचिव रहे धीरज गुर्जर और जुबैर खान भी शामिल होंगे. मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, लालचंद कटारिया, उदयलाल आंजना, परसादी लाल मीणा, शकुंतला रावत, ममता भूपेश, गोविंद राम बैठक में मेघवाल, महेंद्रजीत सिंह मालवीय, प्रमोद जैन भाया, रामलाल जाट, रमेश मीना, भजन लाल जाटव शामिल हो रहे हैं. विधायक रफीक खान को भी बुलाया गया है.
छत्तीसगढ़ की तर्ज पर निकलेगा विकल्प?
क्या कांग्रेस राजस्थान में भी छत्तीसगढ़ की तर्ज पर पावर बैलेंस का रास्ता निकालेगी? इस सवाल पर राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी कहते हैं कि कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में टीएस सिंहदेव को डिप्टी सीएम बनाया तो ये एक तरह से उनके लिए पदोन्नति थी. टीएस सिंहदेव, भूपेश बघेल के मंत्रिमंडल में मंत्री थे. राजस्थान में हालात अलग हैं. सचिन पायलट सरकार गठन के समय ही डिप्टी सीएम बनाए गए थे. पिछले चुनाव के समय और सरकार गठन के बाद काफी समय तक राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष भी थे. सचिन पायलट डिप्टी सीएम पर मानेंगे और सीएम अशोक गहलोत इसपर सहमत होंगे, ये मुश्किल लग रहा है. राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं लेकिन मुझे नहीं लगता कि राजस्थान में छत्तीसगढ़ वाला फॉर्मूला लागू हो पाएगा.
पायलट को एडजस्ट करने के तीन संभावित विकल्प हैं जिनसे उनका मान भी रह जाएगा और शीर्ष नेतृत्व की प्रासंगिकता भी.
विकल्प 1- प्रदेश अध्यक्ष
कांग्रेस नेतृत्व सचिन पायलट को फिर से राजस्थान कांग्रेस की कमान सौंप सकता है. राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को भी इस मीटिंग के लिए दिल्ली बुलाया गया है. अब तक सचिन पायलट और अशोक गहलोत की रार को लेकर जो भी बैठकें हुईं, उसमें प्रदेश अध्यक्ष या राजस्थान के किसी तीसरे नेता को नहीं बुलाया गया. ऐसा पहली बार है जब अशोक गहलोत और पायलट की रार को लेकर मीटिंग में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को भी बुलाया गया है. देखना ये है कि पायलट को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की बात पर अशोक गहलोत सहमत होंगे?
विकल्प 2- चुनाव प्रचार समिति चीफ
कांग्रेस सचिन पायलट को राजस्थान चुनाव के लिए चुनाव प्रचार समिति का प्रमुख बना सकती है. इससे संगठन पर अशोक गहलोत का होल्ड भी रह जाएगा और सचिन पायलट को उनके कद के मुताबिक पद भी मिल जाएगा. हालांकि, इसमें एक पेंच ये भी है कि क्या सचिन पायलट केवल प्रचार समिति चीफ पर मानेंगे? सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के लिए टिकट और टिकट बंटवारे में अपनी भूमिका को लेकर भी आश्वासन चाहते हैं.
3- राष्ट्रीय संगठन में पद
कुछ दिनों से खबरें आ रही हैं कि कांग्रेस नेतृत्व सचिन पायलट को राष्ट्रीय संगठन में एडजस्ट कर सकता है. कांग्रेस के नेता इसे लेकर खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं. दबी जुबान में एक नेता ने ये भी कहा कि सचिन पायलट को राष्ट्रीय महासचिव बनाने के साथ किसी बड़े और महत्वपूर्ण राज्य की जिम्मेदारी देने के विकल्प पर भी काफी समय से चर्चा चल रही है. लेकिन इसमें पेंच ये है कि इसके लिए पायलट तैयार नहीं. सचिन पायलट राजस्थान से बाहर नहीं जाना चाहते. सचिन पायलट अगर इसके लिए तैयार हो जाते हैं तो इससे ये संदेश जाने का डर है कि अशोक गहलोत भारी पड़ गए.