जी राम जी कानून यानी Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) लागू होने के बाद से कांग्रेस ‘मनरेगा बचाओ‘ मुहिम चला रही है. कर्नाटक के बाद तमिलनाडु विधानसभा में भी जी राम जी कानून के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया है. मनरेगा में कांग्रेस को एसआईआर जैसा पोटेंशियल लग रहा है. ये बात अलग है कि एसआईआर का मुद्दा बिहार चुनाव में नहीं चल पाया. ऐसे में मनरेगा को उत्तर प्रदेश में चुनावी मुद्दा बनाने की भी तैयारी है, जिसका संकेत राहुल गांधी के हाल के रायबरेली दौरे में मिला है.
और, मनरेगा के मामले में कांग्रेस कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों जैसा आंदोलन खड़ा करने की भी कोशिश कर रही है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना है कि संसद के आने वाले बजट सत्र में भी मनरेगा के मुद्दे को जोर शोर से उठाया जाएगा.
रायबरेली में मनरेगा बचाओ चौपाल से लौटे राहुल गांधी का किसान रूप दिल्ली में भी देखने को मिला है. दिल्ली में रचनात्मक कांग्रेस के राष्ट्रीय मनरेगा श्रमिक सम्मेलन में राहुल गांधी सिर पर पगड़ी बांधे और कुदाल लिए नजर आए. साथ में, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी पगड़ी बांधे और कुदाल लिए खड़े थे - राहुल गांधी ने सम्मेलन में देशभर से मजदूरों की लाई मिट्टी पौधों में डाली.
मनरेगा श्रमिकों ने देश भर से अपने अपने इलाके से मुट्ठी भर मिट्टी लाई थी, जो एक दूसरे से जोड़ने और आंदोलन को राष्ट्रीय स्वरूप देने की कोशिश थी. मनरेगा श्रमिक सम्मेलन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का मनरेगा को निरस्त करके महात्मा गांधी के नाम को लोगों की यादों से मिटाने की कोशिश है.
मनरेगा पर राहुल गांधी का ऐलान-ए-जंग
1. मनरेगा श्रमिक सम्मेलन में राहुल गांधी ने बताया कि मनरेगा गरीबों को अधिकार देने के लिए लाई गई योजना थी, जिसका मकसद जरूरतमंदों को काम देना था... ये स्कीम पंचायती राज के माध्यम से चलाई जानी थी... अधिकार शब्द महत्वपूर्ण था... सभी गरीबों को मनरेगा के तहत काम करने का अधिकार था... प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी उस कॉन्सेप्ट को खत्म करना चाहते हैं.
2. राहुल गांधी के मुताबिक, ‘वीबी जी राम जी’ जुमला है, जिसे वो गरीबों के हक पर हमला बता रहे हैं. और वो गरीबों से अपील कर रहे हैं कि वे नए कानून के विरोध में एकजुट हों. राहुल गांधी कहते हैं, जब हम सब संविधान और लोकतंत्र के लिए एक होंगे, तो मोदी को पीछे हटना पड़ेगा और मनरेगा बहाल होगा.
3. सम्मेलन में राहुल गांधी ने कहा, पहले जो मजदूरों को मिलता था, वो अब ठेकेदारों और अफसरों को दिया जाएगा... बीजेपी चाहती है, संपत्ति कुछ ही हाथों में रहे ताकि गरीब लोग अडानी-अंबानी पर निर्भर रहें... वो ऐसा भारत चाहते हैं, जहां राजा ही सब कुछ तय करे.
4. और फिर राहुल गांधी मनरेगा श्रमिकों के बीच ऐलान करते हैं, कुछ साल पहले सरकार तीन काले कृषि कानून लाई थी, लेकिन हम सभी ने एकजुट होकर दबाव बनाया... और कानूनों को रद्द करवा दिया.
कृषि कानूनों और वीबी जी राम जी में फर्क है
कृषि कानूनों जैसी वापसी संभव है क्या? एकबारगी तो जवाब है, नहीं.
राहुल गांधी मनरेगा के मामले में कृषि कानूनों का उदाहरण दे रहे हैं. लेकिन, क्या कांग्रेस के कहने पर मनरेगा मजदूर किसानों जैसा आंदोलन खड़ा कर पाएंगे?
राहुल गांधी ने किसान आंदोलन में भी क्रेडिट लेने की कोशिश की है. राहुल गांधी ने ये जरूर कहा था कि केंद्र सरकार को कानून वापस लेने पड़ेंगे. बेशक कानून वापस लिया गया, लेकिन पूरा योगदान किसान आंदोलन का था.
अब अगर मनरेगा पर भी सरकार पर दबाव बढ़ाना है तो कांग्रेस को मजदूरों के साथ आंदोलन खड़ा करना पड़ेगा. ऐसा आंदोलन जिसका असर भी उसी लेवल का हो - सवाल है कि क्या कांग्रेस ऐसी स्थिति में है?
1. रही बात चुनावों की तो, यूपी जैसे राज्यों में कांग्रेस मनरेगा को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर सकती है. यूपी में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं - लेकिन, 2026 के चुनाव में भी कुछ हो पाएगा क्या?
2. हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में भले कुछ प्रयास संभव है, लेकिन केरल में पी. विजयन और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ही नहीं, तमिलनाडु में एमके स्टालिन भी ऐसा कोई काम नहीं होने देंगे जिसका क्रेडिट कांग्रेस लूट ले.
3. यूपी में कांग्रेस के गठबंधन सहयोगी अखिलेश यादव भी मनरेगा को पहले अपने पैमाने पर तौलेंगे, फिर फैसला लेंगे. और, वो कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों में शामिल होंगे या अलग से करेंगे ये भी सोचेंगे. एसआईआर के विरोध में तेजस्वी यादव को कांग्रेस ने किस तरह किनारे किया, अखिलेश यादव ने भी देखा है.
4. झारखंड में कांग्रेस का जेएमएम के साथ गठबंधन जरूर है, लेकिन वो कितना भाव देंगे, कहना मुश्किल है - वैसे भी एनडीए के प्रति उनके मन में बनता सॉफ्ट कॉर्नर पिछले दिनों काफी चर्चित रहा है.
5. कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्यपाल के अभिभाषण में भी मनरेगा का विरोध शामिल किया था, लेकिन वो पढ़ने से मना कर दिए, और सदन से चले गए.
नए कानून में विसंगतियां कांग्रेस की मददगार हो सकती हैं
वीबी जी राम जी कानून वापस कराना कतई आसान नहीं है, लेकिन विसंगतियों का मामला उठाकर कांग्रेस केंद्र सरकार पर दबाव जरूर बना सकती है. कुछ विसंगतियां व्यावहारिक तौर पर बाधा नजर आती हैं - कांग्रेस या विपक्षी दलों की सरकारें उसमें रोड़ा बनकर बवाल बढ़ा सकती हैं. लेकिन, दांव उलटा भी पड़ सकता है - क्योंकि बीजेपी ये भी समझाएगी कि कांग्रेस मजदूरों के भी खिलाफ है.
ज्यादा बवाल की सूरत में सरकार विसंगतियों को दूर करने के लिए कानून में संशोधन के लिए राजी हो सकती है, लेकिन ये सब तात्कालिक सियासी हालात पर निर्भर करेगा. और, कांग्रेस की ताकत और मजदूरों से मिले सपोर्ट पर.