भारत जैसे विशाल और विविधताओं वाले देश में ग्रामीण विकास और बेरोजगारी की समस्या हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है. इसी चुनौती से निपटने के लिए वर्ष 2005 में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) लागू किया गया. इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना और उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है.
मनरेगा (MANREGA), जिसे पहले नरेगा (NREGA) कहा जाता था, एक कानूनी अधिकार आधारित योजना है. इस अधिनियम के तहत किसी भी ग्रामीण परिवार को, जिसकी वयस्क सदस्य अकुशल श्रम करना चाहते हैं, प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का गारंटीकृत रोजगार प्रदान किया जाता है.
इसके जरीए कानूनी गारंटी: रोजगार न मिलने पर सरकार को बेरोजगारी भत्ता देना होता है.
समान वेतन: पुरुषों और महिलाओं को समान वेतन दिया जाता है.
स्थानीय रोजगार: काम स्थानीय स्तर पर दिया जाता है ताकि पलायन न हो.
पारदर्शिता और जवाबदेही: कार्यों की निगरानी ग्राम सभाओं और सामाजिक ऑडिट के माध्यम से की जाती है.
मनरेगा उद्देश्यों में ग्रामीण लोगों को स्थायी और सम्मानजनक रोजगार देना, ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विकास करना (जैसे सड़क, तालाब, जल संरक्षण आदि), गरीबी और भुखमरी को कम करना, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना शामिल है.
केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने ग्रामीण रोजगार नीति में बड़ा बदलाव किया है. मनरेगा का बजट एक तिहाई कर दिया गया है, जबकि नए VB-G RAM G स्कीम को सबसे ज्यादा फंड मिला है. सरकार इसे रोजगार की नई गारंटी बता रही है, लेकिन विपक्ष को आशंका है कि मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है.
दिल्ली में कांग्रेस द्वारा मनरेगा बचाओ आंदोलन तेज़ी से जारी है. 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय के सामने बड़ी संख्या में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता एकत्रित हुए हैं. यह विरोध प्रदर्शन मनरेगा कानून में किए जा रहे बदलावों के खिलाफ किया जा रहा है. मनरेगा योजना के तहत मजदूरों को रोजगार देने वाली इस योजना में बदलावों को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की है.
केरल सरकार ने आशा कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सैलरी में बढ़ोतरी की घोषणा की है. बुजुर्गों के लिए अलग बजट लाने की योजना है. इसके साथ ही MGNREGA के लिए भी अतिरिक्त 1000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.
संसद के बजट सत्र की बुधवार से शुरुआत हो गई. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सदन के संयुक्त सत्र को संबोधित किया और विरासत से लेकर विकास का संदेश दिया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करेंगी. इस बीच विपक्ष ने मनरेगा, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को घेरने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है.
मनरेगा पर कांग्रेस देशभर में आंदोलन खड़ा करने की कोशिश कर रही है. रायबरेली दौरे के बाद दिल्ली में आयोजित मनरेगा श्रमिक सम्मेलन में भी राहुल गांधी ने मुद्दे को जोर शोर से उठाने की कोशिश की. कांग्रेस अब संसद के बजट सत्र में भी ये मुद्दा उठाने की तैयारी में है.
कर्नाटक में राज्यपाल के अभिभाषण पर विवाद हुआ है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अभिभाषण के ड्राफ्ट में मनरेगा के मुद्दे पर केंद्र सरकार की आलोचना की थी, जिसे राज्यपाल की तरफ से बदलने की सलाह दी गई थी. जब कांग्रेस सरकार ने सलाह को अनसुना कर दिया, तो राज्यपाल तीन लाइनें पढ़े और सदन से चले गए.
मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना है कि यह बड़ी और लंबी लड़ाई है जो तब तक चलेगी जब तक नया कानून वापस नहीं लिया जाता और मनरेगा की व्यवस्था पहले जैसी नहीं रखी जाती. मनरेगा बचाओ मोर्चा में देश के विभिन्न इलाकों से आए सभी पद साथियों का मैं स्वागत करता हूं. संसद के विंटर सेशन में मोदी सरकार ने मनरेगा को समाप्त कर नया कानून लागू किया है. हम इस नए कानून के खिलाफ लगातार संघर्ष करेंगे ताकि मनरेगा की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और लोगों को उनकी आर्थिक मदद मिलती रहे.
सबरीमाला मंदिर से सोना चोरी के मामले को लेकर केरल विधानसभा में हंगामा मच गया. कांग्रेस नेतृत्व वाली यूडीएफ ने राज्य देवास्वोम मंत्री वी.एन. वसावन से इस्तीफा मांगा है. विपक्ष ने आरोप लगाए हैं कि मंदिर की लूट में सीपीआई (एम) शामिल है.
राहुल गांधी के रायबरेली दौरे में पिछली बार की तुलना में तेवर काफी नरम दिखे. मनरेगा चौपाल में राहुल गांधी ने लोगों से बातचीत की, केंद्र सरकार पर हमला भी बोला, लेकिन लहजा थोड़ा बदला हुआ था. समाजवादी कार्यकर्ताओं से मुलाकात और इलाके में लगे पोस्टर बता रहे हैं कि राहुल गांधी गठबंधन को भी खास तवज्जो दे रहे हैं.
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने मनरेगा के बारे में बात करते हुए बीजेपी पर हमला बोला है. उन्होनें कहा कि मनरेगा को समाप्त करने के लिए एक विधेयक लोकसभा और राज्यसभा में पारित किया गया है. जिस तरह से इस विधेयक को लेकर रणनीति बनाई गई है, उसके व्यापक और दूरगामी परिणाम होंगे.
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने मनरेगा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कोविड 19 के समय मनरेगा योजना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. जब महामारी के कारण लाखों लोग शहरों से अपने गाँव और घरों की ओर पलायन करने लगे, तब यह योजना उनकी जान की सुरक्षा और सम्मान का माध्यम बनी.
कांग्रेस नेता रंजीत रंजन ने मनरेगा पर बात करते हुए कहा कि अब मनरेगा का अधिकार खत्म हो गया है और अब स्टेट या ग्राम सभा के बजाय सीधे सेंट्रल गवर्नमेंट कामों का फैसला करेगी. मजदूरी के फंडिंग में भी बदलाव किया गया है, जहां पहले सेंट्रल गवर्नमेंट पूरा फंड देती थी अब इसे साठ और चालीस प्रतिशत में बांटा गया है.
कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का कहना है कि हम मनरेगा को लेकर लड़ेंगे.
उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड से सामने आई तस्वीरें बताती हैं कि योजना का असली लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा. ऐसे में सवाल उठता है कि केंद्र ने नाम बदलकर 'जी राम जी' (G RAM G) तो कर दिया, लेकिन क्या सिर्फ नाम बदलने से लूट का यह पुराना खेल रुक पाएगा?
आज दस्तक देंगे सरकारी खजाने में बंदरबाट वाली लूट के खिलाफ. केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर जी राम जी कर लिया. दावा यही है कि नाम बदले से भ्रष्टाचार के दलदल में धंसी योजना में अंधेरगर्दी पर लगाम लग जाएगी. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहाण जी राम जी योजना को लेकर बड़े-बडे दावे कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर योजना जस की तस है. न तो भ्रष्टाचार का खेल बंद हुआ और न ही जरुरतमंदों को रोजगार की गारंटी मिल रही है.
केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना का नाम बदलकर जी राम जी किया गया है. सरकार दावा करती है कि नाम परिवर्तन से योजना में फैले भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और धांधली खत्म होगी. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस योजना को लेकर बड़े दावे किए हैं, लेकिन जमीन पर हालात यथावत हैं. भ्रष्टाचार का खेल जारी है और जरुरतमंदों को रोजगार की गारंटी नहीं मिल पा रही है. इस वीडियो में देश के चार राज्यों की सरकारी लूट की पड़ताल की गई है जो आपको योजना की सच्चाई से रूबरू कराएगी.
मनरेगा योजना का नाम बदलने को लेकर अब गुजरात में सियासत गरमाने लगी है. केंद्र सरकार ने अब मनरेगा का नाम बदलकर जी राम जी कर दिया है यानि गारंटी फोर रोजगार एंड आजीविका मिशन राम. इसके बाद से कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल सरकार के इस फैसले का जमकर विरोध कर रहे हैं.
कांग्रेस के 'मनरेगा बचाओ संग्राम' कार्यक्रम के तहत सोनिया गांधी ने एक वीडियो संदेश जारी किया है. इसमें उन्होंने मोदी सरकार पर मनरेगा कानून को कमजोर करने और गरीबों के अधिकारों को छीनने का गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने इसे देश के किसानों और भूमिहीनों पर सीधा हमला बताया है.
कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने मनरेगा पर बात करते हुए अपनी प्रतिक्रिया गी. उन्होनें कहा कि भूपेश बघेल जी के नेतृत्व में एक ही नारा है कि मनरेगा को बचाया जाएगा और कांग्रेस की सरकार वापस लायी जाएगी. यह नारा लोगों के बीच सकारात्मक ऊर्जा और उम्मीद लेकर आया है.
छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने मनरेगा पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होनें कहा कि डॉक्टर मनमोहन सिंह और सोनिया जी द्वारा बनायी गई यह योजना दुनिया में कहीं और नहीं है. कोरोना काल में मनरेगा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इस योजना ने लोगों के घरों तक राशन पहुँचाने और रोजगार देने का काम किया, जिससे यह एक बड़ा सहारा साबित हुई.
कर्नाटक कैबिनेट ने मनरेगा को हटाकर लाई गई केंद्र सरकार की ‘VB G, Ram G’ योजना के खिलाफ कानूनी, राजनीतिक और जन स्तर पर लड़ाई लड़ने का फैसला किया है. सरकार का आरोप है कि यह योजना विकेंद्रीकरण की भावना के खिलाफ है और इससे ग्रामीणों का रोजगार का अधिकार छीना गया है, क्योंकि अब मजदूरों को पंचायतों की जगह ठेकेदारों के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग जैसी परियोजनाओं पर काम करने को मजबूर किया जा रहा है.