राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे में शुरू हुआ टीएमसी और बीजेपी का विवाद अभी थमा नहीं था, और तभी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तीन दिन के लिए पहुंच गए. सेंट्रल कोलकाता में एक मेट्रो स्टेशन पर धरने पर बैठीं ममता बनर्जी को मौके पर मौका मिलने लगा है, और पहले से ही चल रहा उनका चुनाव कैंपेन तेज हो गया है.
चुनाव आयोग की टीम तारीखों की घोषणा से पहले जमीनी हालात का जायजा लेने पहुंची है. पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को खत्म होने वाला है. 294 विधानसभा सीटों पर अप्रैल में चुनाव होने की अपेक्षा है - और खबर आ रही है कि 15 मार्च तक मतदान की तारीखों की घोषणा भी हो सकती है.
'गो बैक' वाले पोस्टर और नारेबाजी के साथ ही ज्ञानेश कुमार को काले झंडे भी दिखाए जा रहे हैं. और, तभी मुख्य चुनाव आयुक्त लोगों से बांग्ला भाषा बोलते हुए मुखातिब हो जाते हैं. जिस तरह से CEC ज्ञानेश कुमार बांग्ला बोलकर लोगों से कनेक्ट होने की कोशिश कर रहे हैं, और ये ममता बनर्जी और उनके साथियों के लिए बर्दाश्त करना मुश्किल तो है ही.
SIR पर बंगाल में दिल्ली जैसा टकराव
मुख्य चुनाव आयुक्त के कोलकाता में कदम रखते ही विरोध शुरू हो गया था. एयरपोर्ट से ज्ञानेश कुमार के निकलने के बाद रास्ते में कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए. न्यूटाउन में होटल के सामने स्थानीय लोग नारे लिखी टीशर्ट पहने खड़े थे. लिखा था - 'गो बैक, ज्ञानेश कुमार, डेमोक्रेसी के हत्यारे'.
कैखाली इलाके में सीपीएम के स्टेट सचिव मोहम्मद सलीम के नेतृत्व में लेफ्ट कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार की कार के सामने प्रदर्शन किया. अगले दिन (9 मार्च, 2026), मुख्य चुनाव आयुक्त कालीघाट मंदिर पहुंचे तो फिर से उनको काले झंडे दिखाए गए. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नजदीक जाने से रोक दिया.
मंदिर से बाहर निकलने के बाद मीडिया बातचीत में ज्ञानेश कुमार ने बांग्ला शब्द 'भालो' का भी इस्तेमाल किया. बोले, पश्चिम बंगाल के सभी भाई बहनों को नमस्कार, काली मां सभी को अच्छा रखे. जय भारत, जय हिंद.
बांग्ला शब्द का इस्तेमाल ही नहीं, ज्ञानेश कुमार काले रंग की शॉल भी ओढ़े हुए थे. और इसके साथ ही, ज्ञानेश कुमार ने ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे की भी याद दिला दी. ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में अपने केस की पैरवी से पहले ज्ञानेश कुमार से मिलने चुनाव आयोग गई थीं, तो वह भी काले रंग की शॉल लिए हुए थीं. और, उनके साथ गए सभी लोग भी काले लिबास में ही थे. ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर अपनी बात न सुनने और दुर्व्यवहार करने का आरोप भी लगाया था.
ममता बनर्जी के काले वस्त्र में SIR के विरोध की आवाज थी, तो क्या ऐसा ही कोई काउंटर संकेत ज्ञानेश कुमार की शॉल के रंग में महसूस किया जा सकता है? क्या ज्ञानेश कुमार ने पश्चिम बंगाल में काले झंडे दिखाए जाने की आशंका से पहले से ही वैक्सीन के रूप में शॉल ले रखी थी?
धरनास्थल से ही हमलावर हैं ममता बनर्जी
कई महीने से ममता बनर्जी भाषा आंदोलन चला रही हैं. शुरुआत हुई थी, पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूरों के खिलाफ पुलिस एक्शन के विरोध से. बाद में, विरोध एसआईआर पर फोकस हो गया - और फिलहाल ममता बनर्जी सेंट्रल कोलकाता में धरने पर बैठी हुई हैं.
चुनाव आयोग की तरफ से कराई जा रही SIR की प्रक्रिया को लेकर ममता बनर्जी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पूछ रही हैं, जिन लोगों के वोट से मोदी प्रधानमंत्री बने, अब उन्हीं के नाम लिस्ट से क्यों गायब किए जा रहे हैं?
और, लगे हाथ ममता बनर्जी प्रधानमंत्री के साथ साथ चुनाव आयोग को भी लपेट लेती है. ममता बनर्जी का कहना है, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को खुद प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांग लेना चाहिए. ममता बनर्जी की दलील है, अगर 2024 के आम चुनाव में इसी वोटर लिस्ट के आधार पर नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री चुने गए थे, तो अब उसी लिस्ट में शामिल लोगों को वोट देने से क्यों रोका जा रहा है?
CEC ज्ञानेश कुमार के तीन दिन के दौरे में टीएमसी एसआईआर के मुद्दे को खूब भुनाने की कोशिश कर रही है - और चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जो हुआ, फिर से उसे दोहराने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है.
राज्यपाल के इस्तीफे पर ममता बनर्जी का सवाल
ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद से सीवी आनंद बोस के हाल के इस्तीफे पर भी सवाल उठाया है. हैरानी जताते हुए ममता बनर्जी कहती हैं, जब सीवी आनंद बोस के कार्यकाल के अभी 3 साल बाकी थे, तो उन्होंने 5 मार्च को अचानक पद क्यों छोड़ दिया? पूरे मामले की जांच होनी चाहिए कि आखिर पर्दे के पीछे चल क्या रहा है?
सीवी आनंद बोस के बहाने ममता बनर्जी पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का भी जिक्र कर रही हैं. उपराष्ट्रपति बनने से पहले जगदीप धनखड़ पश्चिम बंगाल के ही राज्यपाल थे, और पूरे कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री के साथ कई बार जोरदार टकराव देखने को मिला था. लेकिन, ममता बनर्जी का सवाल है, आखिर पिछले साल जुलाई में धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा क्यों दिया था?
और फिर, ममता बनर्जी की मांग होती है, चाहे आनंद बोस हों या जगदीप धनखड़, दोनों के इस्तीफों की जांच होनी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके. बताती हैं कि सीबीआई और ईडी तो दबाव में ही काम करेंगे, ऐसे में बंगाल की सीआईडी से जांच कराई जा सकती है. बीजेपी नेतृत्व को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी का कहना है, आप हमारे सीआईडी पर भरोसा कर सकते हैं, वे अच्छे से जांच करेंगे.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की पश्चिम बंगाल यात्रा का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी बीजेपी के इरादे पर ही सवाल उठा देती हैं. कहती हैं, सब कुछ पहले से प्लान किया गया था. मैं राष्ट्रपति को दोष नहीं दे रही हूं.
राष्ट्रपति का कार्यक्रम, बयान और बवाल
7 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आदिवासी समुदाय के 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में बुलाया गया था. प्रोग्राम सिलीगुड़ी के बिधाननगर में होना था, लेकिन सुरक्षा और लॉजिस्टिक की वजह का हवाला देते हुए अधिकारियों ने वेन्यू बदल कर बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोपालपुर में शिफ्ट कर दिया था.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कार्यक्रम की जगह बदले जाने पर नाराजगी जताते हुए कहा था, मुझे लगता है बंगाल सरकार आदिवासियों का भला नहीं चाहती. उसके बाद ममता बनर्जी और बीजेपी में खूब तकरार हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना को राष्ट्रपति का अपमान बताया. मोदी ने कहा, ये शर्मानाक, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ.
ममता बनर्जी धरने वाली जगह से ही एक तस्वीर का बड़ा सा प्रिंट लोगों को दिखाया. तस्वीर में बीजेपी के सीनियर नेता लालकृष्ण आडवाणी और प्रधानमंत्री मोदी को बैठे हुए, और राष्ट्रपति को खड़े दिखाया गया है. महुआ मोइत्रा सहित तमाम टीएमसी नेता तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर कर बीजेपी को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं.
काउंटर अटैक में बीजेपी की टीम टीएमसी की तस्वीर को फैक्ट-चेक में फर्जी करार दे रही है - सच और झूठ अपनी जगह है, लेकिन एक दूसरे पर हमले का दोनों पक्षों को बहाना तो मिल ही गया है.