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ऑपरेशन सिंदूर जारी रहते संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की राहुल गांधी की मांग कितनी जायज?

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है, और कांग्रेस के कई नेता अलग अलग फोरम से संसद का विशेष सत्र बुलाये जाने की मांग कर रहे हैं. कांग्रेस नेता चाहते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के बीच हुए सीजफायर पर संसद में बहस हो - क्या मौजूदा हालात में ऐसा होना चाहिये?

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देश के साथ क्या हुआ और क्या हो रहा है, सरकार की तरफ से बताया जाना चाहिये - लेकिन विपक्ष को भी सही वक्त का इंतजार करना चाहिये.
देश के साथ क्या हुआ और क्या हो रहा है, सरकार की तरफ से बताया जाना चाहिये - लेकिन विपक्ष को भी सही वक्त का इंतजार करना चाहिये.

बहुत सारी चीजें वक्त से ही तय होती हैं. वक्त के पैमाने पर ही परखी जाती हैं. सही और गलत का फैसला भी वक्त के हिसाब से ही होता है. और, हर चीज के लिए हर मौका सही भी नहीं होता - राहुल गांधी के संसद का विशेष सत्र बुलाये जाने की मांग भी सही है या गलत, ये भी मौके के लिहाज से ही देखा जाना चाहिये. और, देखा भी जाएगा. 

अकेले राहुल गांधी ही नहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे और तमाम कांग्रेस नेता भी सीजफायर पर चर्चा के लिए संसद के दोनो सदनों का विशेष सत्र बुलाये जाने की मांग कर रहे हैं. मल्लिकार्जन खड़गे पहले भी ऐसी मांग कर चुके हैं. ताकि पहलगाम आतंकवादी हमले पर गंभीरता से विचार किया जा सके. 

पहलगाम हमले के ठीक बाद, और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी. सर्वदलीय बैठक में सभी विपक्षी दलों ने केंद्र की बीजेपी सरकार के हर फैसले के साथ मजबूती से खड़े होने का वादा किया था. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का भी कहना रहा है, 'जो भी कर रहे हैं करिये'. 

मतलब, सरकार के हर कदम में, हर फैसले में विपक्ष का पूरा सपोर्ट का वादा किया गया था. लेकिन, अब वही विपक्ष, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे फौरन संसद का विशेष सत्र बुलाकर पूरे मामले, खासकर सीजफायर पर लंबी बहस चाहते हैं - बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस नेताओं की ये मांग जायज है?

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ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में चर्चा चाहती है कांग्रेस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में, राहुल गांधी ने लिखा है, मैं विपक्ष के सर्वसम्मति से किये गये रिक्वेस्ट को दोहरा रहा हूं… संसद का विशेष सत्र फौरन बुलाया जाये... पहलगाम आतंकी हमले, ऑपरेशन सिंदूर और अब सीजफायर पर चर्चा करना बहुत जरूरी है, जिसकी घोषणा सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से हुई है. 

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे लिखते हैं, आपको याद होगा कि मैंने, पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के मद्देनजर संसद के दोनो सदनों का एक विशेष सत्र बुलाने के लिए 28 अप्रैल, 2025 को पत्र के माध्यम से अनुरोध किया था… नये घटनाक्रम को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता ने आपको एक बार फिर पत्र लिखकर बताया है कि पहलगाम आतंकवाद, ऑपरेशन सिंदूर और पहले वाशिंगटन डीसी और बाद में भारत और पाकिस्तान की सरकारों की तरफ से की गई युद्ध विराम की घोषणाओं पर चर्चा करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने का अनुरोध किया है… मुझे विश्वास है आप सहमत होंगे.

संसद में बहस तो होनी चाहिये, लेकिन...

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी सोशल साइट X के जरिये कांग्रेस की मांग दोहराई है कि प्रधानमंत्री मोदी सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करें, और देश के राजनीतिक दलों को विश्वास में लें, ताकि इस संकट की घड़ी में राष्ट्रीय हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके.

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और, संसद का एक विशेष सत्र तत्काल बुलाया जाये… पहलगाम में हुए बर्बर आतंकी हमले से लेकर अब तक की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की जाये… और आगे की दिशा तय की जाये, ताकि देश एकजुट होकर सामूहिक संकल्प का प्रदर्शन कर सके.

1. निश्चित तौर पर संसद में पूरे मामले पर बहस होनी चाहिये, ताकि देश को मालूम हो सके कि क्या हुआ था? पहलगाम तक आतंकवादी कैसे पहुंचे? जिस दिन आतंकवादी हमला हुआ, वहां सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं थे? हमलावर आतंकवादियों के बारे में क्या अपडेट है?

2. ये ठीक है कि सरकार ने सुरक्षा में चूक की बात मान ली है, लेकिन चूक के लिए किसे जिम्मेदार पाया गया, और किसी को जिम्मेदार पाया गया उसके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?

3. ऑपरेशन सिंदूर की कुछ बातें सरकार और सेना की तरफ से बताई गई हैं, लेकिन पाकिस्तान को कुल कितना नुकसान हुआ ये बताया जाना बाकी है.

सेना को भी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कुछ नुकसान हुआ क्या, ये भी बताया जाना बाकी है. 

4. ये तो सबसे बड़ा सवाल है कि सीजफायर की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से क्यों हुई? जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बोल दिया था कि उनका देश भारत और पाकिस्तान के झगड़े में शामिल नहीं होगा, तो अचानक क्या हुआ की अमेरिका को दखल देना पड़ा?  

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5. बेशक संसद में देश के अहम मसलों पर चर्चा होती रही है, और अब भी होनी ही चाहिये. लेकिन क्या ये बहस फौरन ही होनी चाहिये. बाद में नहीं हो सकती. 

निश्चित तौर पर विपक्ष का नेता होने के नाते राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को ऐसी डिमांड का हक है, और कांग्रेस नेतृत्व के हिसाब से ये मांग सही भी हो सकती है, लेकिन क्या ये वक्त ऐसी बातों के लिए वास्तव में सही भी है. 

फिलहाल मौजूदा हालात से उबरना ज्यादा जरूरी है, बनिस्बत दलगत राजनीति के. हाल के दिनों में कांग्रेस ने सरकार के साथ जिस तरह सहयोग किया है, वैसा ही स्टैंड बनाये रखना चाहिये - अभी सीक्रेट मीटिंग का वक्त है, लाइव टीवी पर बहस का नहीं.

अब भी सपोर्ट का लेवल पहले जैसा ही बरकरार रहना चाहिये, क्योंकि बिहार चुनाव में अभी वक्त है. ये ठीक है कि कांग्रेस को शिकायत होगी कि पहलगाम हमले पर बयान देने के लिए मोदी बिहार पहुंच गये थे, लेकिन राजनीति के मौके अभी बहुत मिलेंगे. और, 15 मई को तो राहुल गांधी बिहार दौरे पर जा रही रहे हैं. 
 

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