Parliament’s Special Sitting Special Parliament Session Live Updates: संसद का विशेष सत्र आज गुरुवार से शुरू हो गया. मोदी सरकार ने लोकसभा में पेश करने के लिए तीन बिलों की सूची जारी की है. इनका मकसद 2029 तक महिलाओं के लिए आरक्षण कानून को लागू करना और लोकसभा की सदस्य संख्या को बढ़ाकर 850 तक करना है. केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पहले दो बिल पेश करेंगे, वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीसरा बिल पेश करेंगे. लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति ने इस चर्चा के लिए 18 घंटे का समय तय किया है. लोकसभा से पास होने के बाद राज्यसभा में इन बिलों पर चर्चा होगी. परिसीमन इस रणनीति का सबसे पेचीदा हिस्सा है.
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डीएमके सांसद टीआर बालू ने सदन में पेश तीनों बिलों का विरोध किया. उन्होंने कहा कि ये तीनों बिल ही सैंडविच बिल हैं, हम विरोध करते हैं. क्योंकि ये आपस में इंटरलिंक हैं. हमारी पार्टी इसका विरोध करती है. हमने काले झंडे दिखाए. इस पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि आप चाहे पीले झंडे दिखाओ या काले दिखाओ. इससे सदन को कोई फर्क नहीं पड़ता.
अमित शाह ने कहा कि, मुस्लिमों को धर्म के आधार पर आरक्षण गैर संवैधानिक है, इसका सवाल ही पैदा नहीं होता. अखिलेश यादव बोले कि आपने अनडेमोक्रेटिक बात कही है. धर्म की बात कही होगी. पूरा देश आधी आबादी को आरक्षण चाहता है. मैं जानना चाहता हूं कि मुस्लिम महिलाओं के लिए क्या. अमित शाह ने कहा- समाजवादी पार्टी पूरी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को दे दे, हमें कहां आपत्ति है.
सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि जनगणना क्यों नहीं करा रहे. आप धोखा देकर ये बिल लाना चाहते हैं. इस पर अमित शाह ने कहा- अध्यक्ष जी सदन की कार्रवाई को पूरा देश देख रहा हैय कुछ बयान ऐसे किए गए जो जनता में चिंता पैदा कर रहे हैं. अखिलेश पूछ रहे हैं जनगणना क्यों नहीं हो रही है। मैं देश को बताना चाहता हूं जनगणना जारी है. उन्होंने कहा कि हम जातीय जनगणना की मांग करेंगे. मैं बताना चाहता हूं कि सरकार इसका भी निर्णय ले चुकी है। और जाति के साथ ही यह जनगणना हो रही है.
लोकसभा में परिसीन बिल पेश होते ही हंगामा शुरू हो गया है. सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि देश के संविधान में हम संसद को पावर इस बात की दी गई है कि संविधान की रक्षा करें, सुरक्षा करें, लेकिन सभापति जी आज ऐसे बिल आए हैं कि जो हमारे संविधान को ही तोड़-मरोड़ रहे हैं और इसका हम समाजवादी पार्टी के लोग पुरजोर विरोध करते हैं. सभापति जी जिस तरह से डिलिमिटेशन को जनगणना से पृथक किया जा रहा है. ये मैं समझता हूं कि ये संविधान की भावनाओं के पूरी तरह से विरोध में हैं. समाजवादियों से बड़ा महिलाओं का हितैषी इस देश की कोई पार्टी नहीं है. आज भी आपसे ज्यादा सदस्य हमारे पास हैं. इसलिए सभापति जी आपके माध्यम से सरकार से अनुरोध है कि इस बिल को संविधान संशोधन बिल को परिसीमन बिल को केंद्र आज संशोधन बिल को वापस लिया जाए.
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में परिसीमन बिल पेश कर दिया है. बिल के लोकसभा में पेश करते ही कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने बिल का विरोध किया तो सदन में हंगामा शुरू हो गया.
लोकसभा के विशेष सत्र की कार्यवाही शुरू हो गई है. इस मौके पर सबसे पहले आशा भोसले के निधन पर शोक जताया.
टीडीपी सूत्रों के हवाले से सामने आया है कि सदन में सरकार की तरफ़ से कहा जायेगा कि परिसीमन बिल से सभी राज्यो में लोकसभा और विधानसभा में 50 प्रतिशत सीट बढ़ाई जायेंगी.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी संसद पहुंच गए हैं, यहां वे महिलाओं के लिए आरक्षण और परिसीमन पर केंद्रित विशेष सत्र में हिस्सा लेंगे.
पीएम मोदी ने X पर लिखा- 'आज से शुरू हो रही संसद की विशेष बैठक में हमारा देश नारी सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है. हमारी माताओं-बहनों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है और यही भावना लेकर हम इस दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं.'
मल्लिकार्जुन खड़गे बोले- वे विधेयक के सिद्धांत के पक्ष में हैं, लेकिन सरकार के तरीके पर गंभीर आपत्ति जताई. खड़गे ने आरोप लगाया कि ये प्रक्रिया राजनीति से प्रेरित है और विपक्ष को दबाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने दोहराया कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसके प्रस्तुतिकरण और लागू करने के तरीके पर सवाल उठा रहा है. खड़गे ने कहा कि हम संसद में एकजुट होकर लड़ेंगे. हमने तय किया है कि इस विधेयक और इसके संशोधनों के खिलाफ सामूहिक रूप से आवाज उठाएंगे.
दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्ष की अहम बैठक हुई. इसमें करीब 20 दलों के वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया. बैठक के बाद विपक्ष ने एकजुट रुख दिखाते हुए सरकार के तरीके पर गंभीर आपत्तियां जताईं. इस बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, UBT के संजय राउत, AAP के संजय सिंह, DMK के टी.आर. बालू, CPI की एनी राजा, IUML के ई.टी. मोहम्मद बशीर, के.सी. वेणुगोपाल और कपिल सिब्बल भी मौजूद रहे.
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव भी सहयोगियों के साथ पहुंचे. इसके अलावा टीएमसी सांसद सागरिका घोष, एनसीपी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले, निलोत्पल बसु और एन.के. प्रेमचंद्रन भी चर्चा में शामिल हुए. कुछ नेता वर्चुअली भी जुड़े. इनमें उद्धव ठाकरे, हेमंत सोरेन और दीपांकर भट्टाचार्य शामिल रहे. बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्ष का साझा रुख स्पष्ट किया.
दक्षिण भारत के कई राज्यों को डर है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का बंटवारा होने से उनकी राष्ट्रीय स्तर पर ताकत कम हो सकती है. हालांकि, सरकार का कहना है कि सीटें घटेंगी नहीं, बल्कि सभी राज्यों की सीटें बढ़ेंगी, जिससे संतुलन बना रहेगा. फिर भी, क्षेत्रीय दल इसे अपने प्रभाव में संभावित कमी के रूप में देख रहे हैं. कुल मिलाकर, ये सिर्फ एक विधेयक नहीं, बल्कि आने वाले समय की राजनीति की दिशा तय करने वाला कदम है. असल में, ये कहानी 2023 से शुरू होती है, जब संसद ने “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” पारित किया था.
इस कानून में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान तो था, लेकिन इसे लागू करने के लिए पहले नई जनगणना और परिसीमन जरूरी बताया गया था. इसी कारण कई लोगों को लगा कि इस बदलाव को जमीन पर उतरने में काफी समय लग सकता है. लेकिन हर कहानी में एक दूसरा पक्ष भी होता है. जैसे ही ये विधेयक सामने आए, विपक्षी दलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया. उनका कहना है कि यह कदम पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले महिलाओं को आकर्षित करने की कोशिश है और इसे उन्होंने तुष्टिकरण की राजनीति बताया. अब सबकी नजरें उस विशेष संसद सत्र पर टिकी हैं, जहां तय होगा कि ये प्रस्ताव कानून बनते हैं या नहीं.
संसद में पेश होने वाले परिसीमन विधेयक के विरोध में तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन ने काला झंडा लहराया है. उन्होंने बिल की प्रतियां भी जलाईं और कहा कि “फासीवादी बीजेपी का घमंड चूर-चूर हो. पहले भी जब तमिलनाडु में हिंदी थोपने के खिलाफ प्रतिरोध की आग भड़की थी, तो उसकी तपिश दिल्ली तक पहुंची थी। वह आग तब ही शांत हुई, जब दिल्ली को झुकना पड़ा.
महिला आरक्षण विधेयक सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि यह बीजेपी और उसके सहयोगियों के ताज़ा छल का एक "काला दस्तावेज़" है, जो दरअसल "चालाक लोगों की एक गुप्त योजना" है. इसके भीतर पिछड़े और दलित समाज की महिलाओं को स्थायी रूप से कमजोर करने की साजिश छिपी हुई है. उन्हें वास्तविक जनप्रतिनिधित्व से वंचित करने के लिए एक चक्रव्यूह रचा जा रहा है. यह विधेयक वर्चस्ववादी सोच रखने वालों की हार की हताशा और महिलाओं के प्रति उनके शोषणकारी-दमनकारी सामंती मानसिकता से जन्मा है. महिला आरक्षण विधेयक असल में एक "जनविरोधी दिखावा" भर है.
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि मुख्य मुद्दा आज महिलाओ को आरक्षण देना है. 33% रिजर्वेशन देने के बाद इतिहास हो जायेगा. बाकि मुद्दा उठा कर के महिला आरक्षण को हानि पहुंचा रहे हैं. Delimitation को लेकर दक्षिण भारत में भ्रम फ़ैलाने का कोशिश की जा रही है. ऐसा नहीं करना चाहिए. डीएमके कार्यकर्ता आज सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री M. K. Stalin के निर्देश पर पूरे राज्य के जिलों में विरोध प्रदर्शन करेंगे. तमिलनाडु में नारे लग रहे हैं. “फासीवादी बीजेपी का घमंड चूर-चूर हो.
तीनों विधेयक पास होते हैं तो 2029 के आम चुनाव से ही महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू होने का रास्ता साफ हो सकता है. ये प्रस्ताव 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर आधारित हैं, जिसमें महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान था.
सबसे बड़ा प्रस्ताव- लोकसभा की सीटों को बढ़ाना. अभी लोकसभा में 543 सीटें हैं, लेकिन सरकार चाहती है कि इन्हें बढ़ाकर अधिकतम 850 किया जाए, ताकि बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से प्रतिनिधित्व बेहतर हो सके.
दूसरा अहम प्रस्ताव- सरकार ने सुझाव दिया कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की एक-तिहाई (33%) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं, ताकि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ सके.
हालांकि उस कानून को लागू करने की शर्त ये थी कि पहले नई जनगणना और उसके बाद परिसीमन हो. उस समय चिंता जताई गई थी कि ये आरक्षण लागू होने में काफी समय (शायद एक दशक या उससे ज्यादा) लग सकता है. अब नए विधेयकों के जरिए सरकार उस प्रक्रिया को तेज करना चाहती है, ताकि 2029 के आम चुनाव तक महिलाओं को आरक्षण मिल सके.
डीएमके कार्यकर्ता आज सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री M. K. Stalin के निर्देश पर पूरे राज्य के जिलों में विरोध प्रदर्शन करेंगे. तमिलनाडु में नारे लग रहे हैं. “फासीवादी बीजेपी का घमंड चूर-चूर हो. पहले भी जब तमिलनाडु में हिंदी थोपने के खिलाफ प्रतिरोध की आग भड़की थी, तो उसकी तपिश दिल्ली तक पहुंची थी। वह आग तब ही शांत हुई, जब दिल्ली को झुकना पड़ा.
सीएम एमके स्टालिन ने कहा- आज मैंने एक बार फिर उस ‘काले कानून’ की प्रति जलाकर नई आग जलाई है, जो तमिलों को उनकी ही जमीन पर शरणार्थी बना देता है.यह आग अब पूरे द्रविड़ भूभाग में फैलेगी और बीजेपी के अहंकार को खत्म करेगी.उन्होंने कहा ‘तमिल हमारी मां है तमिल हमारी आत्मा की धधकती हुई चेतना है!’
1. केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण तय करना है.
2. संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 जनसंख्या की नई परिभाषा, बढ़ती आबादी के मद्देनजर संसद में सदस्यों की संख्या को बढ़ाना इसका मकसद.
3. परिसीमन विधेयक 2026 लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना है. सीटों का फिर से निर्धारण होगा.