सीजफायर (ceasefire) एक ऐसा समझौता होता है जिसमें दो या दो से अधिक विरोधी पक्ष अस्थायी या स्थायी रूप से युद्ध को रोकने पर सहमत होते हैं. यह कदम आमतौर पर युद्ध हो रहे क्षेत्रों में शांति बहाल करने, वार्ता का मार्ग प्रशस्त करने और मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए उठाया जाता है. सीजफायर केवल गोलीबारी रोकने तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह एक बड़े कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा भी होता है.
भारत में सीजफायर भारत-पाकिस्तान सीमा और जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में चर्चा में रही है. 2003 में भारत और पाकिस्तान ने एक द्विपक्षीय सीजफायर समझौता किया था, जिसे कई बार उल्लंघनों के बावजूद फिर से लागू किया गया. 2021 में दोनों देशों ने नियंत्रण रेखा पर सीजफायर की पुनः पुष्टि की, जिससे सीमावर्ती इलाकों में आम नागरिकों को बहुत राहत मिली.
सीजफायर कोई अंतिम समाधान नहीं है, लेकिन यह युद्ध और हिंसा की आग में एक ठंडक का एहसास जरूर है.
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते के मसौदे को जानबूझकर धुंधला रखा गया है. इसका मकसद विवादों को तुरंत सुलझाने के बजाय भविष्य की बातचीत का रास्ता आसान बनाना है. अमेरिकी अधिकारियों ने इसे 'अविश्वसनीय रूप से अस्पष्ट' बताया है और इसे एक राजनीतिक दस्तावेज करार दिया है.
इजरायल ने हिजबुल्लाह आतंकवादी समूह के खिलाफ लेबनान में अपने जमीनी सैन्य अभियान को तेज कर दिया है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सेना को लेबनान में अपनी कार्रवाई बढ़ाने का आदेश दिया है. इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में ऐतिहासिक बियोफोर्ट किले पर कब्जा कर लिया है और जहरानी नदी की ओर तेजी से बढ़ रही है.
अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में गांबिया के झंडे वाले एक व्यावसायिक जहाज को ईरानी बंदरगाह की ओर बढ़ने से रोक दिया. बार-बार चेतावनी देने के बाद भी जहाज ने आदेशों का पालन नहीं किया. इसके जवाब में अमेरिकी एयरफोर्स ने हेलफायर मिसाइल से जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाया और उसे पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया.
अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकाने पर फिर एयरस्ट्राइक की. बंदर अब्बास में तीन धमाकों और एयर डिफेंस एक्टिव होने से मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है. ये 48 घंटे में ईरान पर अमेरिका का दूसरा हमला है. इससे पहले अमेरिकी सेंटकॉम ने दक्षिणी ईरान में मिसाइल लॉन्च साइट्स और संदिग्ध नौसैनिक गतिविधियों को निशाना बनाया था.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर फिर सख्त बयान दिया है. उन्होंने मांग की कि ईरान अपने पास मौजूद एनरिच्ड यूरेनियम का पूरा भंडार अमेरिका को सौंप दे या अंतरराष्ट्रीय निगरानी में उसे नष्ट करे. यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच संभावित सीजफायर और परमाणु समझौते को लेकर बातचीत जारी है. पश्चिमी देशों को लंबे समय से आशंका है कि उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल हथियार निर्माण में हो सकता है.
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव में पाकिस्तान मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है. इस बीच खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान ने ईरान के सैन्य विमानों को अपने नूर खान एयरबेस पर पनाह दी थी. पाकिस्तान के इस कदम पर अमेरिकी सीनेटर ने सवाल उठाए हैं, जबकि पाकिस्तान ने इन दानों को झूठा बताया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वाशिंगटन ने ईरान के साथ बातचीत में प्रगति की है और संकेत दिया है कि जल्द ही एक संभावित समझौता हो सकता है. साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तेहरान परमाणु हथियार नहीं रख सकता.
पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में आज से शांति वार्ता शुरू हो रही है. वार्ता में दोनों देशों के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल हैं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और कई उच्च अधिकारी भी इस वार्ता में हिस्सा ले रहे हैं.
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार से फोन पर बातचीत की और पाकिस्तान के शांति प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया. अराघची ने अमेरिका और इजरायल को क्षेत्रीय अस्थिरता का जिम्मेदार ठहराया.
अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा था कि शनिवार तक अच्छी खबर मिलेगी. यानी ईरान से कोई समझौता हो सकता है. लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता तो क्या वो बातचीत भी नहीं हुई जिसकी उम्मीद थी. वार्ता का फेल होना नए खतरे की घंटी है. और इस बीच राष्ट्रपति पुतिन की भी इसमें एंट्री हो गई है. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने सेंट पीटर्सबर्ग पहुंच गए हैं. इससे पहले वो दो बार पाकिस्तान गए और बीच में ओमान का दौरा भी किया. इस दौरान अराघची ने अमेरिका को एक ऑफर दिया. उन्होंने कहा, ईरान होर्मुज खोलने को तैयार है, लेकिन परमाणु मुद्दे पर बातचीत को टाल दिया जाए. यही वो मुद्दा है जिस पर अमेरिका और ईरान के बीच सबसे ज्यादा टकराव है. अराघची शनिवार को पाकिस्तान में इंतजार करते रहे लेकिन ट्रंप ने अपनी टीम नहीं भेजी. और इन सबके बीच पाकिस्तान ने दलाल देश की जो भूमिका निभाई वो उसमें भी नाकाम रहा. ईरान ने मध्यस्थ के रूप में उसकी मंशा पर भी सवाल खड़े किए हैं.
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता का केंद्र बनने जा रही है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के आज रात पहुँचने की खबर है, जिसके बाद ठप पड़ी बातचीत फिर शुरू हो सकती है. अमेरिकी रक्षा मंत्री ने इसे ईरान के लिए 'बेहतरीन मौका' बताया है. इस हाई-प्रोफाइल बैठक की सुरक्षा के लिए पूरा शहर किले में तब्दील कर दिया गया है
पश्चिम एशिया में शांति बहाली की दिशा में बड़ी कामयाबी मिली है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और लेबनान के बीच जारी युद्धविराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाने की घोषणा की है. व्हाइट हाउस में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद ट्रंप ने लेबनान को हिज्बुल्लाह से सुरक्षा दिलाने में मदद का भरोसा दिया है.
जिस दूसरे दौर की वार्ता के लिए सीजफायर बढ़ाने की बात हो रही है. उसके होस्ट यानि पाकिस्तान को ही ईरान ने कठघरे में खड़ा कर दिया है. ईरानी मीडिया ने मध्यस्थ पाकिस्तान की तटस्थता पर सवाल किया है. मीडिया रिपोर्ट में पाकिस्तानी सेना प्रमुख मुनीर को अमेरिका परस्त बताया गया. सवाल ईरानी प्रपोजल की डिलिवरी पर भी है. ईरान का दावा है कि मुनीर ने तेहरान का प्रस्ताव वॉशिंगटन तक पहुंचाया लेकिन कोई साफ़ जवाब नहीं मिला. पाकिस्तान पर आरोप है कि वो पब्लिक में US के साथ रहते हुए भी प्राइवेट तौर पर ईरान से बातचीत कर रहा है. एनालिस्ट का कहना है कि पाकिस्तान एक बैलेंस्ड बिचौलिए के तौर पर काम नहीं कर रहा है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने अमेरिका और ईरान से अनुरोध किया है कि सीजफायर को अतिरिक्त 14 दिनों के लिए और बढ़ाने पर विचार किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि डिप्लोमेसी और बातचीत को एक और मौका दिया जाना चाहिए.
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की समयसीमा बुधवार रात खत्म हो रही है जिससे महायुद्ध का खतरा बढ़ गया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने दोनों मुल्कों से शांति वार्ता के लिए 14 दिन का अतिरिक्त समय मांगा है. जहाँ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के आने की चर्चा है वहीं ईरान ने फिलहाल किसी भी डेलिगेशन के इस्लामाबाद पहुँचने से इनकार कर दिया है. ट्रंप के सख्त रुख और ईरान की शर्तों ने कूटनीतिक कोशिशों को अधर में लटका दिया है
अमेरिका और ईरान के बीच शांति की समयसीमा कल खत्म हो रही है. अगर अगले कुछ घंटों में समझौता नहीं हुआ, तो भीषण युद्ध दोबारा शुरू हो सकता है. एक तरफ ट्रंप प्रशासन बातचीत के लिए दबाव बना रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान ने साफ कर दिया है कि वह धमकियों से नहीं डरेगा. दुनिया इस समय बारूद के ढेर पर बैठी है, जहां एक छोटी सी चूक महाविनाश का कारण बन सकती है
पाकिस्तान इन दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने की हर संभव कोशिश में जुटा है. हाल ही में भारत-पाक तनाव कम करने के नाम पर पाकिस्तान ने ट्रंप को 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया था. इस्लामाबाद को उम्मीद है कि वह इस बहाने खुद को एक 'पीसमेकर' के तौर पर स्थापित कर पाएगा.
हिज़्बुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने सीजफायर को को लेकर साफ कर दिया है कि यह तभी संभव होगा जब इजरायल भी इसका पालन करेगा. कासिम ने कहा है कि हमें दुश्मन पर भरोसा नहीं है.
7 अप्रैल को ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्धविराम हुआ था. दो हफ्ते के इस युद्धविराम के महज 5 दिन बाकी हैं लेकिन ईरान-अमेरिका के बीच अगले दौर की बातचीत कब होगी ये साफ नहीं है. ट्रंप के हुक्म पर उनका संदेश लेकर पाकिस्तान के आर्मी चीफ कल तेहरान पहुंचे. साथ में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी थे. दूसरी तरफ, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सऊदी अरब पहुंचे. उन्होंने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बात की. उनके मदीना जाने की तस्वीरें भी आई हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मुनीर और शहबाज को ईरान और दूसरे मुस्लिम देशों से बात करने के लिए चुना है. वो उनकी पीठ भी थपथपा रहे हैं. लेकिन जिस समय आसिम मुनीर ईरान में मौजूद थे, उसी समय ईरान के विदेश मंत्री ने धमकी दे दी कि होर्मुज की नाकाबंदी के गंभीर नतीजे हो सकते हैं. अब तक ईरान की तरफ से ये साफ नहीं किया गया है कि आसिम मुनीर के जरिए मिले अमेरिकी प्रस्ताव क्या हैं और उन पर उसका क्या रुख है? यही नहीं, अब तक उसने अगले दौर की बातचीत की तारीख को लेकर भी कुछ नहीं कहा है.
इजरायल और लेबनान के बीच दशकों से चली आ रही दुश्मनी अब कूटनीतिक मेज पर सुलझती दिख रही है. इजरायली मंत्री गिला गामलियेल के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन आज सीधी बातचीत करेंगे. 30 साल से भी अधिक वक्त के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच ये पहला सीधा संवाद होगा.
भारतीय झंडे वाला LPG कैरियर 'जग विक्रम' सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर सुरक्षित कांडला बंदरगाह पहुंच गया है. इस जहाज पर 20,400 मीट्रिक टन LPG लदी हुई है, जो भारत की घरेलू एलपीजी आपूर्ति चेन को मजबूत करेगी.