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अय्यप्पा, योगी आद‍ित्‍यनाथ और लेफ्ट... एक संगम ज‍िसने केरल चुनाव के नतीजे बदल द‍िए

क्या केरल में सत्ता परिवर्तन में धर्म की राजनीति की भी बड़ी भूमिका थी? विधानसभा चुनाव में हार की समीक्षा के बाद लेफ्ट फ्रंट एलडीएफ का नेतृत्व करने वाली सीपीएम ने ही यह बात स्वीकार की है. सीपीएम का यह भी मानना है कि ग्लोबल अय्यप्पा सम्मेलन में योगी आदित्यनाथ का संदेश पढ़ा जाना भी नुकसानदेह साबित हुआ.

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पी. विजयन. (Photo: PTI)
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पी. विजयन. (Photo: PTI)

केरलम में विधानसभा चुनाव से पहले एक सम्मेलन हुआ था. ग्लोबल अय्यप्पा सम्मेलन. 20 सितंबर को सम्मेलन का आयोजन सबरीमाला अय्यप्पा मंदिर के पास पंपा में हुआ था. केरलम में सत्ता परिवर्तन के करीब महीना भर बाद ग्लोबल अय्यप्पा सम्मेलन का खास तौर पर जिक्र हो रहा है, और केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री पी. विजयन की हार की एक बड़ी वजह माना जा रहा है. 

खास बात यह है कि सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक संदेश भी पढ़ा गया था. ऐसा तब हुआ जब केरलम बीजेपी के नेता भी सरकारी आयोजन का विरोध कर रहे थे. बिल्कुल वैसे ही जैसे कांग्रेस और बाकी यूडीएफ नेताओं की तरफ से तत्कालीन मुख्यमंत्री पी. विजयन की आलोचना हो रही थी. नेताओं का आरोप था कि सीपीएम धर्म और राजनीति को मिलाकर चुनाव जीतने के लिए हिंदू कार्ड का इस्तेमाल कर रही है. 

केरलम विधानसभा चुनावों में एलडीएफ की हार की विस्तृत समीक्षा के बाद CPI(M) के राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने माना है कि ऐसी चीजों से गलत संदेश गया, जो एलडीएफ की हार की वजह बना. प्रेस कॉन्फ्रेंस में एमवी गोविंदन ने कहा कि योगी आदित्यनाथ का संदेश पढ़ा जाना भी सही नहीं था. 

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ग्लोबल अय्यप्पा सम्मेलन, 2025

ग्लोबल अय्यप्पा सम्मेलन त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के 75 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किया गया था. आयोजन के पीछे तत्कालीन मुख्यमंत्री और एलडीएफ नेता का मकसद था, सबरीमाला को वैश्विक तीर्थस्थल बनाना, अय्यप्पा में आस्था रखने वाले हिंदू श्रद्धालुओं को बुलाना - और 2018-19 के सबरीमाला विवाद के बाद खराब हुई छवि को सुधारने का प्रयास करना. असल में, सबरीमाला विवाद के दौरान मंदिर में महिलाओं के प्रवेश मुद्दे पर पी. विजयन सरकार के स्टैंड से लोगों में भारी नाराजगी देखी गई थी. 

और अब CPI(M) स्वीकार कर रही है कि 2025 में हुए ग्लोबल अय्यप्पा डिवोटीज कॉन्फ्रेंस, जिसे हिंदू वोटर को साधने की एक और कोशिश के रूप में देखा गया, पूरी तरह उल्टा पड़ गया.  CPI(M) के राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने मीडिया से कहा, अय्यप्पा सम्मेलन का आयोजन देवस्वम बोर्ड ने किया था... लेकिन, इसे सरकारी आयोजन के रूप में प्रचारित किए जाने के कारण लोगों में भ्रम पैदा हुआ... आरएसएस के प्रमुख नेताओं में से एक, योगी आदित्यनाथ का संदेश पढ़ना सही नहीं था.

अव्वल तो केरलम बीजेपी भी तत्कालीन सरकार चला रहे पी. विजयन के सरकारी आयोजन का विरोध कर रही थी, लेकिन यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से आयोजन को खुला समर्थन  मिला. ग्लोबल अय्यप्पा सम्मेलन बेशक त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड का आयोजन था, लेकिन तत्कालीन एलडीएफ सरकार का पूरा सपोर्ट हासिल था. यहां तक कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को न्योता भी राज्य सरकार की तरफ से भेजा गया था.  

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यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सम्मेलन के लिए अपनी शुभकामनाएं और बधाई भेजी थी, जिसे पढ़कर सुनाया गया था. योगी आदित्यनाथ ने भगवान अय्यप्पा की उपासना के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व की तारीफ करते हुए आयोजन को धर्म, सात्विक मूल्यों और एकता को बढ़ावा देने वाली ताकत बताया था. 

अपने संदेश में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था, भगवान अय्यप्पा धर्म के दैवीय रक्षक हैं. उनकी उपासना धर्म के मार्ग को प्रज्ज्वलित करती है, और भक्तों को सात्विक मूल्यों के संरक्षण और प्रसार के लिए प्रेरित करती है. सौहार्द, समावेश और एकता को मजबूत करने के लिए प्राचीन ज्ञान और परंपराओं का प्रसार आवश्यक है. इस दृष्टि से अगोला अय्यप्पा सम्मेलन का विशेष महत्व है.

केरलम सरकार के निमंत्रण के जवाब में भेजे अपने संदेश में योगी आदित्यनाथ ने निमंत्रण के लिए केरल के तत्कालीन देवस्वम मंत्री वीएन वासवन का भी आभार जताया था. तब सरकार की तरफ से बताया गया था कि कार्यक्रम में कुल 4,126 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. सम्मेलन में 182 विदेशी प्रतिभागी शामिल थे, जिनमें 39 श्रीलंका से पहुंचे थे. देश के विभिन्न हिस्सों से 2,125 लोग पहुंचे थे, और बाकी 1,219 प्रतिनिधि केरल के थे.

न माया मिली न राम

सितंबर, 2018 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने 4:1 के बहुमत से सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को लेकर लगी सदियों पुरानी पाबंदी को असंवैधानिक घोषित कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यह प्रथा महिलाओं के मौलिक अधिकारों और समानता (अनुच्छेद 14 और 25) के अधिकार का उल्लंघन करती है.

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला था, लिहाजा राज्य सरकार को लागू करना ही था. एलडीएफ सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री पी. विजयन ने स्वागत करते हुए कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करेगी. यहां तक कि रिव्यू पेटिशन भी दाखिल करने से इनकार कर दिया था. महिलाओं के लिए जरूरी सुविधाओं के इंतजाम के साथ पुलिस सुरक्षा देने का भी ऐलान किया. कुछ महिलाओं को पुलिस एस्कॉर्ट के साथ मंदिर में प्रवेश भी कराया गया. 

बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जाहिर की थी. केरल दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट को ऐसे फैसले देने चाहिए जिनका पालन किया जा सके. बाद में, जब तक पी. विजयन को डैमेज महसूस हुआ, तब तक मामला कंट्रोल के बाहर हो चुका था. त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के ग्लोबल अय्यप्पा सम्मेलन की नींव उसके बाद ही पड़ी थी. 

1. सीपीएम ने हार की समीक्षा के दौरान कई कारण पाए हैं जिनकी वजह से चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ा. सम्मेलन में योगी आदित्यनाथ का संदेश पढ़कर सुनाया जाना ही नहीं, SNDP योग के महासचिव और एझावा नेता वेल्लापल्ली नटेशन के मुस्लिम विरोधी बयानों का मजबूती से विरोध न करना भी सीपीएम की हार की वजह मानी गई है. 

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2. सबरीमला सोना चोरी मामले को लेकर हिंदू श्रद्धालुओं की नाराजगी को भी CPI(M) ने हार की एक वजह के रूप में स्वीकार किया है. इस केस में सीपीएम सीनियर नेता और पूर्व विधायक ए पद्मकुमार गिरफ्तार भी हुए थे. और, यह मामला तब सामने आया जब ए पद्मकुमार सबरीमला मंदिर का प्रबंधन करने वाले त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के अध्यक्ष थे.

3. सीपीएम राज्य सचिव एमवी गोविंदन के मुताबिक, पार्टी ने पद्मकुमार से स्पष्टीकरण मांगा था, और पार्टी के सभी पदों से उन्हें हटा भी दिया था. लेकिन, विरोधियों की तरफ से प्रचारित किया गया कि घोटाले के शुरुआती दौर में पार्टी ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की, जिसका असर भी पड़ा.

CPI(M) का यह भी आरोप है कि बीजेपी ने 30 विधानसभा सीटों पर अपने वोट कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को ट्रांसफर करा दिए. लेकिन यह नहीं बताया है कि वे कौन सी सीटें हैं. एमवी गोविंदन कहते हैं, 30 विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी के वोट यूडीएफ को मिल गए, जबकि कुछ सीटों पर यूडीएफ के वोट बीजेपी को ट्रांसफर हुए. बीजेपी जिन तीन सीटों पर जीती, वहां यूडीएफ तीसरे स्थान पर रहा.

कुल मिलाकर ग्लोबल अय्यप्पा  संगम LDF और पी. विजयन के लिए दोधारी तलवार साबित हुआ. सबरीमाला के मुद्दे पर हिंदू समुदाय को साधने की कोशिश जरूर हुई, लेकिन दांव उल्टा पड़ गया. योगी आदित्यनाथ का अप्रत्याशित सपोर्ट चर्चित जरूर रहा, लेकिन सीपीएम के लिए गेम चेंजर नहीं बन सका.

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