पंजाब चुनाव की तैयारी तो बीजेपी ने पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे आने के तत्काल बाद ही शुरू कर दी थी. करीब डेढ़ महीने बाद तीन दिन के पंजाब दौरे पर पहुंचे बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने तैयारियों का जायजा लिया, और आगे की रणनीति के हिसाब नेताओं और कार्यकर्ताओं को दिशानिर्देश दिए.
पंजाब में विधानसभा चुनाव तो 2027 में होने हैं, लेकिन चुनाव जल्दी भी होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं. पंजाब में बीजेपी के दो विधायक हैं, जबकि विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं. लोकसभा की 13 सीटों में से बीजेपी के पास कोई भी नहीं है, लेकिन पंजाब से राज्यसभा की 7 सीटों में से 6 सांसद अब बीजेपी के पास हैं. ये सांसद आम आदमी पार्टी के थे, जो राघव चड्ढा के नेतृत्व में बगावत करके बीजेपी में शामिल हो गए - और पंजाब में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के खिलाफ बीजेपी अब राघव चड्ढा और साथियों को मोर्चे पर तैनात करने वाली है.
बीते 10 साल से बीजेपी की पंजाब की सत्ता में कोई भागीदारी नहीं है. पहले शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी की गठबंधन सरकार हुआ करती थी, लेकिन कृषि कानूनों पर टकराव के बाद 2020 में गठबंधन टूट गया. 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला.
बीजेपी इस बार पूरे दमखम के साथ पंजाब चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है. पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के झगड़े में बीजेपी अपना पूरा स्कोप देख रही है. मुख्यमंत्री भगवंत मान के विवादों में आ जाने के बाद बीजेपी को चुनावी राह थोड़ी आसान भी लगने लगी है. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने पंजाब की सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है.
नवीन स्लोगन- 'पंजाब नु बचाना है, भाजपा नु लियाना है.'
नितिन नवीन ने अमृतसर में हरमंदिर साहिब, दुर्गाना मंदिर और राम तीर्थ मंदिर में मत्था टेककर और जलियांवाला बाग का दौरा करके अपनी पंजाब यात्रा शुरू की. अमृतसर, जालंधर और लुधियाना का दौरा किया, और कार्यकर्ताओं, विधायकों, जिला अध्यक्षों, उद्योगपतियों और कृषि विशेषज्ञों से भी पंजाब दौरे में मुलाकात की.
बताते हैं कि जनवरी से ही स्थानीय मुद्दों और संभावित उम्मीदवारों पर हर चुनाव क्षेत्र से रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को नियमित रूप से भेजी जा रही थी. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के दौरे में इन चीजों की समीक्षा भी की गई. नितिन नवीन ने हर बूथ पर कम से कम 10 सक्रिय कार्यकर्ताओं की टीम तैयार करने को कहा है. यह टीम बीजेपी की केंद्र सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को घर-घर पहुंचाने का काम करेगी. नितिन नवीन का कहना था कि जब जनता तक योजनाओं की सही जानकारी पहुंचेगी, तभी पार्टी की पकड़ मजबूत होगी.
बीजेपी नेतृत्व को पार्टी में आपसी गुटबाजी की भी फिक्र दिखी. नितिन नवीन ने आपसी मतभेद और निजी अहंकार छोड़कर एक साथ काम करने की सलाह दी है. पंजाब दौरे में नितिन नवीन ने युवाओं, उद्यमियों और वकीलों से भी संवाद किया और उनके सुझाव लिए. युवाओं से बीजेपी अध्यक्ष ने विदेश जाने के बजाय पंजाब में ही रहकर काम करने की अपील की, ताकि पंजाब और देश दोनों तेजी से विकास कर सकें. नितिन नवीन के दौरे में एक नारा चल रहा था - 'पंजाब नु बचाना है, भाजपा नु लियाना है.'
नितिन नवीन पंजाब में बीजेपी युवा मोर्चा प्रमुख के रूप में पहले भी काम कर चुके हैं. 2012 के पंजाब विधानसभा चुनाव में कई हफ्तों तक नितिन नवीन ने कैंपेन में हिस्सा लिया था. बताते हैं कि इस बार नितिन नवीन बीजेपी महासचिव तरुण चुघ के जरिए पंजाब में चुनाव अभियान की सीधी निगरानी कर सकते हैं.
1. सूत्रों के हवाले से आई खबर के अनुसार, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की सीधी निगरानी में एक स्पेशल टीम पंजाब में काम कर रही है. यह टीम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी के संपर्कों के जरिए पंजाब भर में हजारों डेरों तक नए सिरे से पहुंच बनाने की मुहिम चला रही है.
2. अव्वल तो नितिन नवीन ने बीजेपी के सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है, लेकिन यह सवाल खत्म नहीं हुआ है कि क्या बीजेपी अपने पुराने साथी शिरोमणि अकाली दल के साथ फिर से गठबंधन नहीं करेगी. जब चंद्रबाबू नायडू के एनडीए छोड़ने के बाद टीडीपी से गठबंधन हो सकता है, नीतीश कुमार की जेडीयू से बार बार गठबंधन टूटने के बाद भी साथ हुआ जा सकता है, तो अकाली दल से क्यों नहीं.
बिट्टू की पंजाब पॉलिटिक्स में दिलचस्पी
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को पंजाब चुनाव में बड़ी भूमिका मिलने की भी चर्चा है. अव्वल तो उनका राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो चुका है, लेकिन जॉर्ज कूरियन की तरफ उनका इस्तीफा नहीं हुआ है. ध्यान रहे, दोनों का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को ही खत्म हुआ था. ऐसी भी चर्चा है कि बिट्टू की जगह पंजाब से किसी और को मौका मिले, और उनको पंजाब की जिम्मेदारी दी जाए. वैसे हाल फिलहाल बिट्टू ने खुद भी पंजाब की राजनीति में खास दिलचस्पी जाहिर की है.
1. पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के पदग्रहण समारोह के दौरान 3 जून को रवनीत सिंह बिट्टू की तरफ से पहला संकेत मिला था. रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा था, दिल्ली में 17 साल हो गए मैं लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य रहा हूं. अब मेरा मन पंजाब की विधानसभा में आकर सूबे के लिए काम करने का है.
रवनीत सिंह बिट्टू कांग्रेस से बीजेपी में आए थे, और कभी राहुल गांधी के करीबी नेताओं में शुमार थे, लेकिन बाद मेंउनको 'गद्दार' तक करार दिया गया था. पंजाब में काम करने को लेकर बिट्टू का कहना था, हमें जिम्मेदारी सौंपिए, हमारा सामान बांधकर पंजाब भेज दीजिए. हम पंजाब के हित में गांव-गांव, गली-गली और घर-घर जाकर लोगों के दरवाजे खटखटाएंगे.
2. बीजेपी के राज्यसभा उम्मीदवारों की 4 जून को आई 11 उम्मीदवारों की सूची में रवनीत सिंह बिट्टू का नाम शामिल न होना भी एक संकेत समझा गया. क्योंकि, बिट्टू की जगह बीजेपी ने पंजाब से आने वाले राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजा है.
3. पंजाब चुनाव के लिए रवनीत बिट्टू हर तरह से फिट बैठते हैं. सोशल मीडिया पर भी बिट्टू को लगातार 'Punjab Always' मुहिम चलाते देखा गया है. पंजाब से जुड़े मुद्दे उठाने के साथ साथ बिट्टू रेल मंत्रालय की परियोजनाओं, रेलवे स्टेशनों के रेनोवेशन जैसी चीजों को लेकर लगातार सक्रिय देखे गए हैं.
केजरीवाल के बैकफायर करते हथियार
पंजाब में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के खिलाफ तो बीजेपी ने पहले से ही मोर्चेबंदी कर रखी है. आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों को बीजेपी में शामिल किए जाने की एक वजह पंजाब चुनाव ही था. अब बीजेपी आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल को उनके ही हथियार से चुनावों में घेरने की तैयारी में है - और मुख्यमंत्री भगवंत मान का चुनाव से पहले विवादों में फंस जाना भी बीजेपी के लिए बड़ा मौका नजर आ रहा है.
बीजेपी नेता के रूप में राघव चड्ढा भी पंजाब का दौरा कर चुके हैं. आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद राघव चड्ढा पहली बार पंजाब के तीन दिन के दौरे पर थे. पंजाब में राघव चड्डा ने नितिन नवीन की मौजूदगी में हुई बीजेपी की महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लिया. यह बैठक पंजाब विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा के लिए ही बुलाई गई थी. रिपोर्ट के अनुसार, लुधियाना में हुई बैठक में आम आदमी पार्टी से बीजेपी में आए सभी सांसदों को बुलाया गया था, लेकिन सिर्फ दो सांसद ही मौजूद थे.
राघव चड्ढा सहित पंजाब के सभी 6 राज्यसभा सांसदों को चुनाव अभियान में इस्तेमाल किया जाना तो पक्का है ही, सांसदों को आम आदमी पार्टी की सरकार, भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल को घेरने के लिए मोर्चे पर तैनात किया जा सकता है.