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अभिषेक बनर्जी चौतरफा घिर गए हैं, बुरा वक्त और कितना ‘बुरा’ होगा?

अभिषेक बनर्जी फिलहाल अपने राजनीतिक करियर के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी के साये में राजनीति करते आ रहे अभिषेक बनर्जी भ्रष्टाचार के आरोपों और कानूनी मुश्किलों से तो पहले से ही जूझ रहे हैं, तृणमूल कांग्रेस की सरकार जाने के बाद उसमें काफी इजाफा हो गया है.

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TMC नेता ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी. (File Photo)
TMC नेता ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी. (File Photo)

तृणमूल कांग्रेस के परिवर्तन के नारे ने ममता बनर्जी को 2011 में सत्ता दिलाई थी, और 15 साल बाद बीजेपी के परिवर्तन के नारे ने ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल कर दिया. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने परिवर्तन यात्रा निकाली थी. बीजेपी की परिवर्तन यात्रा को लेकर तृणमूल कांग्रेस महासचिव काफी आक्रामक हो गए थे. यह उन दिनों की बात है जब बिहार में खुले में मांस-मछली बेचे जाने पर रोक लगा दी गई थी. पश्चिम बंगाल में यह चुनावी मुद्दा बन गया था. ममता बनर्जी और साथियों का कहना था कि बीजेपी सत्ता में आने पर लोगों के खान पान पर रोक लगा देगी. लेकिन, बीजेपी नेता मछली लेकर कैंपेन करने लगे, और लोगों पर कोई असर नहीं हुआ. 

बीजेपी की परिवर्तन यात्रा को लेकर अभिषेक बनर्जी ने टीएमसी कार्यकर्ताओं से आतिथ्य भाव के साथ पेश आने को कहा था. अभिषेक बनर्जी का कहना था, जब परिवर्तन यात्रा आपके इलाके से गुजरे तो बीजेपी नेताओं को आप लोग मछली, अंडे और चाय ऑफर करें. चुनाव बाद सत्ता बदल गई, और आलम यह है कि एक दिन लोग अभिषेक बनर्जी को ही अंडा ऑफर कर दिया. बहरहाल, पुलिस ने अभिषेक बनर्जी पर हमले के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, और जांच चल रही है. 

अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पहले से जो मामले चल रहे हैं वे तो हैं ही, अब नई मुसीबतें भी गले आ पड़ी हैं. फर्जी हस्ताक्षर केस में सीआईडी का नोटिस मिल चुका है. कोलकाता नगर निगम भी अभिषेक बनर्जी के स्वामित्व वाली कई संपत्तियों को लेकर नोटिस जारी कर चुका है. 

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अभिषेक बनर्जी की मुसीबतों की फेहरिस्त

1. अभिषेक बनर्जी, उनके माता-पिता और उनकी कंपनी लीप्स एंड बाउंड्स को कोलकाता नगर निगम ने नोटिस देकर संपत्तियों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है. हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि अभिषेक और उनके तीन करीबियों के स्वामित्व वाली संपत्तियों की जांच होगी. लीप्स एंड बाउंड्स कंपनी के नाम पर अभिषेक बनर्जी के पास 14 संपत्तियां हैं, और उनमें से 6 उनके पिता के नाम पर हैं.

भवानीपुर की आभार रैली में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा था, मैंने निगम मामलों के सचिव और कोलकाता नगर निगम के कमिश्नर से चार लोगों के संपत्तियों की डिटेल लेने को कहा है. और पूछा, आप उनके नाम जानना चाहेंगे?

फिर बोले, एक हैं बेलेघाटा के राजू नस्कर, जिनके पास 18 प्रॉपर्टी हैं. दूसरे हैं कस्बा के सोना पप्पू, जिनके पास 24 संपत्तियां हैं. तीसरे हैं अभिषेक बनर्जी. लीप्स एंड बाउंड्स के नाम पर 14 संपत्तियां रजिस्टर्ड हैं. चार उनके नाम पर हैं, और छह उनके पिता के नाम पर हैं. चौथे हैं जावेद (अहमद) खान (तृणमूल के कस्बा विधायक) के बेटे, जिनके पास 90 संपत्तियां हैं.

अभिषेक बनर्जी के माता-पिता और उनकी कंपनी लीप्स एंड बाउंड्स ने कोलकाता नगर निगम के नोटिस को कोलकाता हाईकोर्ट में चुनौती दी है. 

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2. पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्षी दल के नेता के चयन से जुड़े एक पत्र में तृणमूल कांग्रेस के विधायकों पर कथित फर्जी हस्ताक्षर और हेराफेरी का आरोप लगा है. पश्चिम बंगाल सीआईडी इस मामले की जांच कर रही है. सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी के कालीघाट वाले आवास की वीडियोग्राफी भी कराई है, और पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है.

3. पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी और रिश्वत के आरोप भी हैं. CBI और प्रवर्तन निदेशालय इस घोटाले की जांच कर रहे हैं. सीबीआई की तरफ से दायर सप्लीमेंट्री चार्जशीट में अभिषेक बनर्जी का नाम भी है, जिसमें टीएमसी महासचिव पर रिश्वत मांगने और दबाव बनाने का आरोप लगाया गया है.

4. ECL यानी ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों से अवैध कोयला खनन और करीब 1300 करोड़ रुपये की हेराफेरी से जुड़ा केस भी अभिषेक बनर्जी के खिलाफ है. प्रवर्तन निदेशालय PMLA के तहत दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रहा है. अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा बनर्जी को कई बार ईडी की तरफ से नोटिस भेजे गए हैं, और पूछताछ हुई है. अभिषेक बनर्जी और रुजिरा बनर्जी ने ईडी द्वारा दिल्ली बुलाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने उसे खारिज कर दिया था. 

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ये सब तो अभिषेक बनर्जी के सामने खड़ी हुई कानूनी मुसीबतें हैं, तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी निशाने पर वही हैं. टीएमसी नेता I-PAC के नाम पर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं, लेकिन उनके निशाने पर अभिषेक बनर्जी ही होते हैं क्योंकि चुनाव कैंपेन के लिए एजेंसी को उन्होंने ही हायर किया था. 

टीएमसी की सरकार जाते ही बढ़ीं मुश्किलें

कोयला और शिक्षक भर्ती घोटाला तो पुराने मामले हैं. ईडी और सीबीआई के अधिकारी कई बार अभिषेक बनर्जी से पूछताछ कर चुके हैं. कानूनी लड़ाई अभिषेक बनर्जी जरूरत के हिसाब से लड़ते रहे हैं, और साथ में राजनीतिक लड़ाई भी चलती रही है. 

विपक्ष में रहते भी बीजेपी नेता नेता आरोप लगाते रहे कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ एक के बाद एक भ्रष्टाचार के मामले सामने आते रहे हैं. ऐसे आरोपों से ममता बनर्जी तो सीधे सीधे बच जाती हैं, लेकिन संरक्षण देने का आरोप तो लगता ही रहा है. हां, अंगुली हमेशा अभिषेक बनर्जी की ओर ही अंगुली उठती रही है. 

बीजेपी नेताओं का यह आरोप भी लगा चुके हैं कि अभिषेक बनर्जी की पत्नी (जो थाई नागरिक हैं) रुजिरा बनर्जी बैंकॉक से लौटते वक्त कोलकाता एयरपोर्ट पर सोने की तस्करी के मामले में पकड़ी गई थीं. चुनावों में बीजेपी और दूसरे विपक्षी दलों के नेता आरोप लगाते रहे हैं कि पार्थ चटर्जी, अणुब्रत मंडल और ज्योतिप्रिय मल्लिक जैसे टीएमसी के 'लूट का हिस्सा' असल में 'शांतिनिकेतन' तक ही पहुंचता था. शांतिनिकेतन अभिषेक बनर्जी के घर का नाम है. 

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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार होने पर ममता बनर्जी खुद मोर्चे पर खड़ी हो जाती थीं, और मामला खत्म हो जाता था. 2016 के चुनाव से पहले जब स्टिंग ऑपरेशन से नारदा और शारदा घोटाले सामने आए तो ममता बनर्जी टीएमसी नेताओं के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बन गईं. टीएमसी नेताओं पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को जोरदार तरीके से खारिज किया, चुनाव लड़ाया और कुछ को मंत्री भी बना दिया था. 

अब सत्ता हाथ से चले जाने के बाद मामला आउट ऑफ कंट्रोल हो गया है. चुनावी हार के लिए अभिषेक बनर्जी पर सवाल उठ रहे हैं, और टीएमसी विधायक सुनने को तैयार नहीं हैं. मीटिंग बुलाई जाती है, और ज्यादातर गायब हो जाते हैं और उनका फोन नेटवर्क के बाहर हो जाता है. ऐसे दो विधायकों पर ममता बनर्जी ने एक्शन भी लिया है - मुश्किल यह है कि टीएमसी के टूट जाने का खतरा मंडराने लगा है. 

सीआईडी और नगर निगम के नोटिसों पर अभिषेक बनर्जी राजनीतिक जवाब देते हैं. घर गिराने से लेकर, 'जो करना है...' वाली स्टाइल में चैलेंज करते हैं. अगर सीआईडी के नोटिस पर जांच में सहयोग नहीं करते तो मामला अदालत तक जाएगा, और सिर पर गिरफ्तारी की तलवार भी लटक सकती है. 

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ममता बनर्जी भी फिलहाल कुछ खास नहीं कर पा रही हैं. कोई भी नेता अपने समर्थकों के बल पर और जनाधार के बूते ही ताकत दिखा पाता है, और ममता बनर्जी धीरे धीरे अकेले पड़ने लगी हैं. कोलकाता में ममता बनर्जी और टीएमसी नेता भी धरना देने पहुंचे हैं, और कार्यकर्ता भी. कोलकाता में धरना देने के लिए जगह की अनुमति नहीं मिलने पर अपने स्वाभाविक अंदाज में ममता बनर्जी कहा कि चाहे गिरफ्तार कर लिया जाए, लेकिन वो धरना तो देंगी ही - कोलकाता में धरना हो, या फिर दिल्ली में.

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