मध्य प्रदेश में बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों को दोबारा पटरी पर लाने और रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है. मुरैना जिले की वर्षों से बंद पड़ी कैलारस शुगर मिल को फिर से चालू करने की औपचारिक कवायद शुरू कर दी गई है. राज्य शासन के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) विभाग ने इस संबंध में 'रुचि की अभिव्यक्ति' (EOI) आमंत्रित की है.
MSME कमिश्नर दिलीप कुमार ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में 19 अगस्त 2025 को हुई कैबिनेट मीटिंग में कैलारस चीनी मिल की भूमि MSME विभाग को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया था.
सरकार की मंशा मिल को 'जैसी है, जहां है' के आधार पर 30 वर्षों की लीज पर देने की है. संतोषजनक कार्य प्रदर्शन के आधार पर इस लीज अवधि को आगे भी बढ़ाया जा सकेगा.
15 सितंबर तक जमा होंगे ऑनलाइन प्रस्ताव
मिल के पुनरुद्धार में रुचि रखने वाले निवेशकों और कंपनियों के लिए पूरा शेड्यूल जारी कर दिया गया है. इच्छुक जन इस संबंध में लिखित प्रश्न आदि 7 सितंबर 2026 शाम 5 बजे तक पूछ सकेंगे. रुचि की अभिव्यक्ति जमा करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर शाम 5 बजे रखी गई है. अगले दिन 16 सितंबर को प्रस्ताव शाम 5 बजे खोले जाएंगे.
इच्छुक कंपनियां जो शुगर और संबंधित उप-उत्पादों के निर्माण में सक्षम हैं, वे MP Tenders पोर्टल http://www.mptenders.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं. विस्तृत जानकारी http://mpmsme.gov.in पर उपलब्ध है.
1250 मीट्रिक टन प्रतिदिन पेराई क्षमता
कैलारस शुगर मिल मुरैना जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-552) पर स्थित है और कैलारस रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी 3 किमी से भी कम है. 12.86 हेक्टेयर भूमि में फैली इस मिल की गन्ने की पेराई क्षमता 1250 मीट्रिक टन प्रतिदिन है. मिल की संपत्तियों में फैक्ट्री बिल्डिंग, प्लांट-मशीनरी, वर्कशॉप और बड़े गोदाम शामिल हैं. इसके दोबारा चालू होने से क्षेत्र के गन्ना किसानों, युवाओं और स्थानीय व्यापारियों को बड़ा फायदा मिलेगा.