मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में जहां एक तरफ नए और दुर्लभ वन्यजीवों की दस्तक से खुशी का माहौल था, वहीं दूसरी तरफ दुखद खबर आई है. भारत में जन्मी 27 महीने की एक मादा चीता की शिनवार को इलाज के दौरान मौत हो गई. KGP11 पिछले कुछ दिनों से पालपुर स्थित पशु चिकित्सा केंद्र में गंभीर हालत में भर्ती थी.
चीता प्रोजेक्ट के फील्ड डायरेक्टर के अनुसार, यह मादा चीता 1 जून को मुरैना जिले के पहाड़गढ़ वन क्षेत्र के पास बेहद गंभीर और घायल अवस्था में पाई गई थी. सूचना मिलते ही वन्यजीव विशेषज्ञों और फील्ड स्टाफ की टीम मौके पर पहुंची और उसे तुरंत रेस्क्यू किया गया. घायल चीता को गहन चिकित्सा और बेहतर इलाज के लिए पालपुर स्थित पशु चिकित्सा केंद्र लाया गया था.
डॉक्टरों की तमाम कोशिशें रहीं नाकाम
पालपुर केंद्र में डॉक्टरों और वन्यजीव विशेषज्ञों की विशेष फील्ड टीमों ने चौबीसों घंटे निगरानी रखते हुए KGP11 को बचाने की हर संभव कोशिश की. लेकिन चोटें इतनी गहरी थीं कि आज शाम इस मादा चीता ने दम तोड़ दिया.
फील्ड डायरेक्टर ने बताया कि कल, 7 जून को चीता का पोस्टमार्टम किया जाएगा. मौत की असल और सटीक वजह पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो सकेगी.
कितनी बची चीतों की संख्या?
इस दुखद घटना के बाद अब भारत में चीतों के आंकड़े बदल गए हैं. कूनो में अब चीतों की कुल संख्या 49 रह गई है, जिसमें भारत की धरती पर जन्मे 32 चीते शामिल हैं.
जंगल में खुले घूम रहे चीते
इन 49 चीतों में से 19 चीते इस समय कूनो के जंगलों में खुलेआम स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं, जबकि बाकी सभी चीते पूरी तरह स्वस्थ और ठीक हैं.
देश में कुल संख्या
वर्तमान में पूरे भारत में चीतों की कुल संख्या अब 52 हो गई है. इनमें कूनो नेशनल पार्क के 49 चीते और गांधी सागर अभयारण्य में मौजूद 3 चीते शामिल हैं.