
मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में शामिल और देश की सबसे जटिल जल सुरंगों में शुमार स्लीमनाबाद टनल अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है. मुख्यमंत्री मोहन यादव के अनुसार, कटनी जिले में बन रही इस 11.952 किलोमीटर लंबी महा-सुरंग का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है.
वर्तमान में इस प्रोजेक्ट का 96.66% भौतिक कार्य पूर्ण हो चुका है और टनल में मात्र अंतिम 1 मीटर का 'ब्रेक-थ्रू' शेष रह गया है. इसके पूरी तरह क्रियाशील होते ही बरगी दायीं तट मुख्य नहर के माध्यम से नर्मदा का पावन जल विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के 1,450 गांवों तक सीधे पहुंचेगा, जिससे सिंचाई और पेयजल की समस्या हमेशा के लिए समाप्त होगी.
सोनभद्र और नर्मदा का पौराणिक विरह मिटाएगा यह 'महासेतु'
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अमरकंटक से निकलने के बाद मां नर्मदा और सोनभद्र विपरीत दिशाओं में बहकर हमेशा के लिए अलग हो गए थे. यह टनल विंध्य पर्वतमाला को भेदकर नर्मदा के पानी को सीधे सोन नदी के कछार तक पहुंचाने का काम करेगी. 17 सालों से अटकी इस महा-परियोजना को सरकार के त्वरित फैसलों और बजटीय स्वीकृतियों के बल पर रिकॉर्ड रफ्तार मिली है.

जब पस्त हो गई अमेरिकी मशीन, जर्मन तकनीक ने रचा इतिहास
जमीन से करीब 30 मीटर नीचे और 40 मीटर ऊंची मार्बल, कठोर लाइमस्टोन व डोलोमाइट की चट्टानों को भेदना एक बड़ा इंजीनियरिंग चैलेंज था. टनल के भीतर प्रति मिनट 25,000 लीटर तक पानी का रिसाव हो रहा था, जिससे पूर्व में काम कर रही भारी-भरकम अमेरिकी मशीन टूटकर पस्त हो गई थी.
जर्मन तकनीक से सफलता
इसके बाद अत्याधुनिक जर्मन हेरेनकनेक्ट मशीन और विशेष 'टेम ग्राउटिंग' तकनीक को मैदान में उतारा गया. घनी आबादी, राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) और व्यस्त रेलवे ट्रैक के नीचे से बिना किसी नुकसान के 10.14 मीटर व्यास वाली इस सुरंग को बेहद सुरक्षित तरीके से पूरा कर लिया गया.

विंध्य के इन 5 जिलों को मिलेगा नया जीवन
सुरंग के शुरू होते ही बरगी दायीं तट मुख्य नहर से पानी सीधे खेतों तक पहुंचेगा, जिससे 5 जिलों की भूमि सिंचित होगी:
सतना जिला: सबसे अधिक 1,04,970 हेक्टेयर भूमि हरी-भरी होगी.
मैहर जिला: 54,227 हेक्टेयर भूमि को पानी मिलेगा.
कटनी जिला: 21,823 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी.
रीवा जिला: 3,084 हेक्टेयर क्षेत्र टनल से सिंचित होगा (इसके अलावा त्योंथर, लोंही, सिरमौर और सेमरिया परियोजनाओं से कुल 1.32 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य है).
पन्ना जिला: 448 हेक्टेयर सूखी भूमि को जीवन मिलेगा.

सरकार का सिलसिलेवार रोडमैप
मार्च 2026 तक: 44,160 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता धरातल पर उतारी जा चुकी है.
दिसंबर 2026 तक: 87,433 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बढ़ाई जाएगी.
दिसंबर 2027 तक: कुल 1,54,693 हेक्टेयर (1.54 लाख हेक्टेयर से अधिक) भूमि में पूर्ण सिंचाई व्यवस्था स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है.