मध्य प्रदेश के इंदौर में साइबर अपराध के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. इस साल जनवरी से अक्टूबर के बीच पुलिस को साइबर धोखाधड़ी की करीब 7000 शिकायतें मिलीं. इन मामलों में लोगों को लगभग 50 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. हालांकि, पुलिस करीब 7 करोड़ रुपये रिकवर कराने में सफल रही है.
यह जानकारी गुरुवार को अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश डंडोतिया ने दी. उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी ठगी के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं. अब वे डिजिटल अरेस्ट, APK फाइल और फर्जी निवेश योजनाओं के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी इस्तेमाल कर रहे हैं.
350 से ज्यादा हैक सोशल मीडिया अकाउंट रिकवर
राजेश डंडोतिया के मुताबिक, जनवरी से अक्टूबर के बीच साइबर अपराधियों द्वारा हैक किए गए 350 से ज्यादा सोशल मीडिया अकाउंट रिकवर किए गए हैं. इसके अलावा, लोगों के नाम और फोटो का गलत इस्तेमाल करके बनाए गए 450 से अधिक फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक कराए गए.
डिजिटल अरेस्ट और APK फाइल से ठगी
अधिकारी ने बताया कि साइबर अपराधी अलग-अलग तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं. इनमें डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराकर पैसे वसूलना, APK फाइल भेजकर मोबाइल फोन का कंट्रोल हासिल करना और निवेश, गेमिंग या वर्क फ्रॉम होम के नाम पर ठगी करना शामिल है.
ठग लोगों को भरोसे में लेकर उनसे बैंकिंग और निजी जानकारियां हासिल करते हैं. कई मामलों में मोबाइल फोन तक पहुंच बनाकर आर्थिक नुकसान पहुंचाया जाता है.
AI से आवाज और चेहरे की नकल कर रहे ठग
डंडोतिया ने बताया कि साइबर अपराधी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ठगी के तरीके और परिष्कृत कर रहे हैं. वे लोगों के रिश्तेदारों या परिचितों की आवाज और चेहरे की नकल करके उन्हें धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं.
इस तरह की ठगी में किसी परिचित की आवाज या वीडियो के जरिए मदद के नाम पर पैसे मांगे जा सकते हैं. इसलिए अनजान नंबर से आए ऐसे कॉल या वीडियो पर तुरंत भरोसा करने के बजाय संबंधित व्यक्ति से उसके पुराने नंबर पर संपर्क करके पुष्टि करना जरूरी है.
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अक्टूबर तक इंदौर में साइबर धोखाधड़ी से करीब 50 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. पुलिस ने इनमें से लगभग 7 करोड़ रुपये वापस रिकवर कराए हैं.