scorecardresearch
 

Ramayana: रामायण की USP बना रावण से भिड़ने वाला 'जटायु', अनुपम खेर की आवाज ने किया कमाल

रामायण में रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी के बीच जटायु ने सबका दिल जीत लिया. अनुपम खेर की आवाज ने इस VFX किरदार में ऐसी जान डाली कि दर्शक भावुक हो गए.

Advertisement
X
रामायण के जटायु ने यश-रणबीर को पछाड़ा (Photo: Screengrab)
रामायण के जटायु ने यश-रणबीर को पछाड़ा (Photo: Screengrab)

रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश स्टारर फिल्म 'रामायण' कितनी अच्छी है और कितनी बुरी, इस पर बहस हो सकती है. फिल्म की भव्यता, VFX, कहानी और किरदारों को लेकर दर्शकों की अलग-अलग राय हो सकती है. लेकिन एक किरदार ऐसा है, जिस पर शायद ही किसी की दो राय हो. यह किरदार है जटायु का. एक ऐसा किरदार, जो पर्दे पर नजर तो आता है, लेकिन उसे किसी कलाकार ने अपने शरीर से नहीं निभाया. उसे पूरी तरह VFX की मदद से तैयार किया गया है. इसके बावजूद वह फिल्म के सबसे जीवंत और दिल को छू लेने वाले किरदारों में से एक बनकर उभरता है.

और इसके पीछे सबसे बड़ा हाथ है अनुपम खेर की आवाज का.

कहते हैं कि एक कलाकार की असली ताकत सिर्फ उसके चेहरे या हाव-भाव में नहीं, बल्कि उसकी आवाज में भी छिपी होती है. अनुपम खेर ने जटायु के किरदार के लिए इसे सच साबित कर दिया है. उन्होंने अपनी आवाज से इस काल्पनिक पक्षी में ऐसी जान फूंकी है कि कई मौकों पर लगता ही नहीं कि पर्दे पर कोई VFX से बना किरदार है. उनकी आवाज में अनुभव है, अपनापन है, दर्द है और एक ऐसी गहराई है, जो सीधे दिल तक पहुंचती है.

जटायु के किरदार के लिए उन्हें किसी बड़े डायलॉग या भारी-भरकम संवाद की जरूरत नहीं पड़ी. उनकी आवाज ही इस किरदार की पहचान बन गई. चाहे बूढ़े जटायु की धीमी और अनुभवी आवाज हो या फिर मौत के करीब पहुंचने पर दर्द से कराहते हुए सीता हरण की जानकारी देने वाला प्रसंग, अनुपम हर जगह अपनी छाप छोड़ते हैं. उनकी आवाज में वह पीड़ा महसूस होती है, जो पर्दे पर बैठे दर्शक को भी बेचैन कर देती है.

Advertisement

राम के जन्म से लेकर वनवास तक, हर खास पल के गवाह बने जटायु

फिल्म में जटायु की मौजूदगी सिर्फ सीता हरण तक सीमित नहीं है. उनका किरदार शुरुआत से ही कहानी का हिस्सा बना रहता है. राम के जन्म के समय अयोध्या नगरी में जटायु का परिचय कराया जाता है. वह आसमान से नन्हे राम के दर्शन करते हैं और उन्हें अपना प्रिय बताते हैं. यहीं से जटायु और राम के बीच एक खास जुड़ाव महसूस होने लगता है.

इसके बाद राम के जीवन के हर बड़े मौके पर जटायु की मौजूदगी दिखाई देती है. चाहे उनके राज्याभिषेक की तैयारी हो या सीता के साथ विवाह का प्रसंग, जटायु हर खुशी के गवाह बनते हैं. वनवास के दौरान भी वह राम और सीता की गतिविधियों पर नजर रखते हैं. ऐसा लगता है जैसे वह सिर्फ आसमान में उड़ने वाला पक्षी नहीं, बल्कि राम के जीवन का एक ऐसा हिस्सा हैं, जो हर सुख-दुख में उनके साथ खड़ा है.

जटायु का किरदार धीरे-धीरे दर्शकों के मन में अपनी जगह बनाता जाता है. लेकिन फिल्म में उनका सबसे भावुक और यादगार पल तब आता है, जब रावण सीता का हरण करके उन्हें अपने साथ ले जा रहा होता है.

सीता को बचाने के लिए रावण से भिड़ गए जटायु, यह दृश्य भर देगा आंखें

Advertisement

सीता हरण का प्रसंग रामायण के सबसे महत्वपूर्ण और भावुक दृश्यों में से एक है. लेकिन फिल्म में जटायु की एंट्री इस दृश्य को एक अलग ही ऊंचाई पर ले जाती है. जब वह रावण को सीता का हरण करते देखते हैं, तो अपनी उम्र और ताकत की परवाह किए बिना उससे भिड़ जाते हैं. उन्हें पता है कि सामने लंका का शक्तिशाली राजा है, लेकिन इसके बावजूद वह सीता को बचाने की पूरी कोशिश करते हैं.

जटायु और रावण के बीच होने वाला युद्ध फिल्म के सबसे शानदार दृश्यों में शामिल है. एक तरफ रावण का अहंकार और अपार शक्ति है, तो दूसरी तरफ एक बूढ़े पक्षी का साहस और धर्म के लिए लड़ने का जज्बा. जटायु पुष्पक विमान को रोकने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं. वह बार-बार रावण पर हमला करते हैं और उसे सीता को ले जाने से रोकना चाहते हैं.

लेकिन आखिरकार रावण उनके पंख काट देता है. जटायु आसमान से धम्म से जमीन पर आ गिरते हैं. यह दृश्य सिर्फ एक युद्ध का अंत नहीं है, बल्कि एक ऐसे योद्धा की हार है, जिसने अपनी आखिरी सांस तक अपने धर्म और कर्तव्य का साथ नहीं छोड़ा.

सच कहें तो इस दृश्य को देखकर दिल बैठ जाता है. एक पल के लिए लगता है कि काश जटायु किसी तरह सीता को बचा पाते. उनकी बेबसी, दर्द और हार दर्शकों को भीतर तक झकझोर देती है. यहां अनुपम खेर की आवाज इस दृश्य को और भी भावुक बना देती है. उनकी आवाज में दर्द इतना गहरा है कि जटायु की पीड़ा पर्दे से निकलकर सीधे दर्शकों के दिल तक पहुंचती है.

Advertisement

जटायु सिर्फ एक पक्षी नहीं, रामायण की भावनाओं का चेहरा हैं

रामायण में जटायु का महत्व सिर्फ इसलिए नहीं है कि उन्होंने सीता को बचाने के लिए रावण से युद्ध किया. उनका महत्व इस बात में भी है कि उन्होंने अपने प्राणों की परवाह किए बिना एक स्त्री की रक्षा के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी. वह जानते थे कि रावण से जीतना आसान नहीं है, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय लड़ना चुना.

यही वजह है कि जटायु का किरदार आज भी रामायण के सबसे भावुक प्रसंगों में गिना जाता है. फिल्म में इस किरदार को जिस तरह पेश किया गया है, वह इसकी सबसे बड़ी खूबियों में से एक है. जहां कई बड़े किरदार अपनी भव्यता और संवादों के बावजूद उतना प्रभाव नहीं छोड़ पाते, वहीं जटायु बिना किसी बड़े दिखावे के दिल में उतर जाते हैं.

यह कहना गलत नहीं होगा कि रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश जैसे बड़े सितारों के बीच जटायु अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहते हैं. अनुपम खेर ने साबित कर दिया है कि किसी किरदार को यादगार बनाने के लिए हर बार पर्दे पर चेहरा दिखाना जरूरी नहीं होता. कभी-कभी सिर्फ एक आवाज भी इतिहास रच सकती है.

और जटायु के मामले में यही हुआ है. वह फिल्म के उन किरदारों में से हैं, जिनके जाने के बाद भी उनकी आवाज और उनका दर्द लंबे समय तक याद रह जाता है. शायद यही किसी कलाकार और उसके किरदार की सबसे बड़ी जीत है.

Advertisement

कुल मिलाकर, रामायण की भव्यता अपनी जगह है, लेकिन इस फिल्म में अगर कोई किरदार सचमुच दिल जीतने में कामयाब रहा है, तो वह जटायु हैं. और इस जीत का सबसे बड़ा श्रेय जाता है अनुपम खेर को, जिन्होंने अपनी आवाज से एक पक्षी को सिर्फ जीवंत ही नहीं किया, बल्कि उसे दर्शकों की भावनाओं का हिस्सा बना दिया.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement