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भागीरथपुरा दूषित पानी कांड: 36 मौतों की जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश, जानिए क्यों नहीं होगी सार्वजनिक

इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में 36 मौतों की जांच रिपोर्ट MP हाईकोर्ट में पेश हो चुकी है. जानिए रिपोर्ट में क्या है और इसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया.

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भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की 600 पन्नों की रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश.(File Photo)
भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की 600 पन्नों की रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश.(File Photo)

Indore Bhagirathpura Contaminated Water Case: इंदौर के चर्चित भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच पूरी हो चुकी है. जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पेश कर दी है, लेकिन फिलहाल इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा. मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग उठी, जिस पर राज्य सरकार और याचिकाकर्ता पक्ष ने विरोध जताया. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 36 लोगों की मौत के बाद यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था. अब जांच पूरी होने और रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश होने के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर दूषित पानी की सप्लाई के लिए कौन जिम्मेदार था और रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ है.

27 जनवरी 2026 को बना था जांच आयोग

मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 27 जनवरी 2026 को रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया था.

आयोग को भागीरथपुरा में दूषित पानी की सप्लाई के कारणों की जांच करने के साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों और विभागों की भूमिका की पड़ताल करने के निर्देश दिए गए थे. इसके अलावा प्रभावित परिवारों को राहत और मुआवजे समेत मामले के सभी पहलुओं पर रिपोर्ट तैयार करनी थी.

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जांच आयोग ने नगर निगम, इंदौर विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों से दस्तावेज जुटाए. प्रभावित लोगों के लिखित बयान भी लिए गए. इसके बाद सैकड़ों पन्नों की जांच रिपोर्ट तैयार कर हाईकोर्ट में पेश की गई.

रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग पर सरकार का विरोध

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की गई. हालांकि राज्य सरकार ने इसका विरोध किया.

याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता अजय बगड़िया ने भी रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि रिपोर्ट सामने आने के बाद अलग-अलग पक्ष अपनी सुविधा के अनुसार उसकी अलग-अलग व्याख्या कर सकते हैं. इससे मूल याचिका के उद्देश्य पर असर पड़ सकता है.

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने के मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. ऐसे में फिलहाल जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाएगी.

जांच में किसकी जिम्मेदारी तय हुई? रिपोर्ट में क्या है, अभी नहीं होगा खुलासा

जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में जमा होने के बावजूद उसमें क्या निष्कर्ष निकले हैं, इसकी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हो सकी है. रिपोर्ट में दूषित पानी की वजह, पानी की सप्लाई व्यवस्था में कथित लापरवाही और संबंधित अधिकारियों या विभागों की भूमिका पर क्या कहा गया है, यह फिलहाल गोपनीय है.

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पूरी जांच प्रक्रिया को मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गोपनीय रखा गया था. अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही यह साफ होगा कि जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाएगा या नहीं.

सरकारी अस्पतालों के पानी में भी वही बैक्टीरिया मिलने का आरोप

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अजय बगड़िया ने इंदौर की पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि इंदौर शहर के कई सरकारी अस्पतालों के पेयजल में भी वही बैक्टीरिया पाए जाने का आरोप है, जो भागीरथपुरा के दूषित पानी में मिला था.

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं. इसके कारण लोगों को निजी अस्पतालों और पैकेज्ड पानी पर निर्भर होना पड़ रहा है.

इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने इंदौर में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के संबंध में एक नई जनहित याचिका भी तैयार की है.

36 मौतों के बाद उठा था पूरे शहर की पेयजल व्यवस्था पर सवाल

भागीरथपुरा त्रासदी ने इंदौर की पेयजल व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े किए थे. दूषित पानी पीने से 36 लोगों की मौत के बाद हाईकोर्ट ने मामले की जांच के लिए आयोग का गठन किया था.

अब आयोग की रिपोर्ट तैयार होकर हाईकोर्ट तक पहुंच चुकी है, लेकिन रिपोर्ट में क्या सामने आया है, इसका खुलासा अभी बाकी है. फिलहाल सबकी नजर हाईकोर्ट के अगले फैसले पर है, जिससे यह तय होगा कि भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच रिपोर्ट आखिर कब और किन शर्तों के साथ सार्वजनिक होगी.

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