
मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित महाराज बाड़े स्थित गोरखी परिसर के देवघर में एक बार फिर सिंधिया राजवंश की 300 साल पुरानी अनूठी आस्था का भव्य दृश्य देखने को मिला. केंद्रीय मंत्री और सिंधिया 'राजपरिवार के महाराज' ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बाबा मंसूर शाह के उर्स के पावन अवसर पर परंपरा अनुसार देवघर पहुंचकर उनकी विशेष पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा.
सिंधिया राजघराने में सूफी संत बाबा मंसूर शाह की पूजा की यह परंपरा महादजी सिंधिया के समय से यानी लगभग तीन शताब्दियों से निरंतर चली आ रही है, जिसके पीछे एक चमत्कारिक ऐतिहासिक घटना जुड़ी हुई है.
पानीपत का युद्ध, घायल महादजी और 'आधी रोटी' का रहस्य
इतिहास और प्रचलित लोकमान्यताओं के अनुसार, जब मराठा साम्राज्य के महान योद्धा और सिंधिया राजवंश के संस्थापक महादजी सिंधिया पानीपत के तीसरे युद्ध (1761) में गंभीर रूप से घायल हो गए थे, तब ग्वालियर में उनके परिवार को उनकी सलामती की भारी चिंता सता रही थी.
उस दौरान महादजी सिंधिया की मां और पत्नी प्रसिद्ध सूफी संत बाबा मंसूर शाह की शरण में पहुंचीं. संत मंसूर शाह ने उन्हें आश्वस्त किया कि महादजी सुरक्षित हैं और वे जल्द जीवित वापस लौटेंगे. जब महादजी सिंधिया सकुशल वापस लौटे, तो पूरे परिवार ने इसे बाबा मंसूर शाह का ईश्वरीय आशीर्वाद माना.
इसके बाद संत मंसूर शाह ने महादजी सिंधिया को 'आधी रोटी' का टुकड़ा भेंट करते हुए आशीर्वाद दिया कि उनका राजवंश अगली पांच पीढ़ियों तक वैभव के साथ राज करेगा.

गोरखी के देवघर में आज भी सुरक्षित हैं आधी रोटी के अवशेष
सिंधिया राजपरिवार के करीबी बाल खांडे ने बताया कि बाबा मंसूर शाह की दी गई वही 'आधी रोटी' आज भी सिंधिया परिवार के लिए एक पवित्र और अनमोल धरोहर है. ग्वालियर के गोरखी स्थित देवघर में आज भी इस रोटी के अवशेष और बाबा मंसूर शाह की स्मृति से जुड़ी वस्तुएं पूरी निष्ठा और सुरक्षा के साथ रखी गई हैं, जिनकी हर वर्ष विधिवत पूजा की जाती है.

'परंपरा जड़ों को सींचती है'
बाबा मंसूर शाह के उर्स पर देवघर में पूजा-अर्चना के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए लिखा, "आज, ग्वालियर के महाराज बाड़ा स्थित गोरखी मंदिर में बाबा मंसूर शाह के उर्स पर पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया.

सिंधिया घराने के मार्गदर्शक और आराध्य संत के श्रीचरणों में श्रद्धा अर्पित करते हुए सभी देशवासियों के सुख-शांति, समृद्धि और सर्वांगीण विकास की प्रार्थना की."

उन्होंने एक अन्य संदेश में लिखा कि "परंपरा जड़ों को सींचती है और नई ऊर्जा व आशीर्वाद का संचार करती है..."