नई नौकरी चाहिए तो अनुभव चाहिए और अनुभव दिखाने के लिए दस्तावेज. लेकिन अगर यही दस्तावेज फर्जी हो तो ? ग्वालियर में सामने आए एक ऐसे ही मामले में एक युवक पर बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी में ऊंचे पद पर नौकरी हासिल करने के लिए अपने पुराने अनुभव और सैलरी से जुड़े दस्तावेजों का सहारा लिया. उसने खुद को एक प्रतिष्ठित ग्रुप का पूर्व कर्मचारी बताया और हर महीने 2,80,670 रुपये सैलरी मिलने का दावा भी किया.
कंपनी में नौकरी मिल गई, पद भी बड़ा मिला और कुछ समय तक सब ठीक चलता रहा. लेकिन नौकरी छोड़ने के बाद जब कंपनी ने उसके पुराने रिकॉर्ड का दोबारा सत्यापन कराया तो पूरा मामला उलट गया. जिस कंपनी में काम करने का दावा किया गया था, वहां उसकी नौकरी का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला. बैंक से जुड़े दस्तावेजों पर भी सवाल खड़े हुए. जांच आगे बढ़ी तो मामला पुलिस तक पहुंचा और लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी को आखिरकार उत्तर प्रदेश के कानपुर से गिरफ्तार कर लिया गया.
पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान देवेंद्र कुमार दुबे के रूप में हुई है. आरोप है कि उसने 20 अगस्त 2025 को एक ऑटोमोबाइल कंपनी में ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट के पद पर नियुक्ति के दौरान अपने एक्सपीरियंस सार्टिफिकेट और सैलरी स्लिप से संबंधित दस्तावेज कंपनी के सामने पेश किए थे. इन दस्तावेजों के जरिए उसने कथित तौर पर यह साबित करने की कोशिश की कि वह इससे पहले एक बड़े ग्रुप में काम कर चुका है और वहां उसे करीब 2.80 लाख प्रतिमाह वेतन मिलता था. ऊंचे पद और हाई सैलरी का दावा देखकर उसे कंपनी में नौकरी मिल गई. कुछ समय तक वह वहां काम करता रहा. पहली नजर में उसके दस्तावेजों पर किसी तरह का संदेह सामने नहीं आया. लेकिन असली कहानी उसके इस्तीफे के बाद शुरू हुई.
इस्तीफा दिया तो शुरू हुआ दस्तावेजों का सत्यापन
पुलिस के अनुसार आरोपी ने मई 2026 में कंपनी से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद कंपनी की ओर से फुल एंड फाइनल सेटलमेंट की प्रक्रिया शुरू हुई. इसी दौरान उसके पुरानी नौकरी और सैलरी से जुड़ी जानकारी का दोबारा सत्यापन कराया गया. आमतौर पर कंपनियां वरिष्ठ पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच नियुक्ति के समय करती हैं, लेकिन इस मामले में नौकरी छोड़ने के बाद हुई जांच ने कथित फर्जीवाड़े की परतें खोल दीं. कंपनी ने उस संस्थान से संपर्क किया, जहां आरोपी ने पहले नौकरी करने का दावा किया था. जांच में कथित तौर पर ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि देवेंद्र कुमार दुबे वहां कर्मचारी रहा था. इसके बाद उसके द्वारा पेश किए गए वेतन से जुड़े बैंक रिकॉर्ड भी संदेह के घेरे में आ गए.
2,80,670 सैलरी का दावा भी सवालों में
आरोपी ने कंपनी के सामने अपने पुराने वेतन के तौर पर ₹2,80,670 प्रतिमाह मिलने का दावा किया था. इसके समर्थन में बैंक स्टेटमेंट समेत दूसरे दस्तावेज पेश किए गए थे. कंपनी की आंतरिक जांच में जब पुराने रोजगार का रिकॉर्ड ही नहीं मिला तो बैंक से जुड़े दस्तावेजों की विश्वसनीयता भी जांची गई. पुलिस के मुताबिक जांच में ये रिकॉर्ड भी संदिग्ध पाए गए. यानी जिस अनुभव और वेतन को आधार बनाकर आरोपी ने बड़ी कंपनी में ऊंचा पद हासिल किया था, वही बाद में उसके खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बनता चला गया.
केस दर्ज होते ही गायब हो गया आरोपी
मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की, लेकिन वह लगातार पुलिस की पकड़ से बाहर रहा. वरिष्ठ अधिकारियों ने उसकी गिरफ्तारी के लिए टीम को सक्रिय किया. जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी माध्यमों से उसकी लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की. इसी दौरान उसके उत्तर प्रदेश के कानपुर में होने की जानकारी सामने आई. इसके बाद ग्वालियर क्राइम ब्रांच की टीम कानपुर पहुंची और स्थानीय स्तर पर आरोपी की तलाश शुरू की. काफी प्रयास के बाद पुलिस ने उसे पनकी थाना क्षेत्र स्थित वैष्णवी कुती से गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी को लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गई. उसे न्यायालय के सामने पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. अब पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज कहां से तैयार कराए थे और इन दस्तावेजों को तैयार करने या उपलब्ध कराने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं. साथ ही बैंक रिकॉर्ड से जुड़े आरोपों की भी जांच की जा रही है.