बागेश्वर धाम में 500 किलोमीटर लंबी सनातन हिंदू एकता यात्रा का समापन हो गया. यह यात्रा बुंदेलखंड के पांच जिलों से होकर गुजरी और बागेश्वर धाम पहुंचकर पूरी हुई. समापन के मौके पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने यात्रा के उद्देश्य बताए. उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने, हिंदू समुदाय को एकजुट करने और बुंदेलखंड को नशामुक्त बनाने की बात कही.
पीठाधीश्वर का मतलब धाम की गद्दी संभालने वाले प्रमुख से है. बागेश्वर धाम मध्य प्रदेश के छतरपुर में स्थित है, और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इसी धाम के पीठाधीश्वर हैं. उनकी यात्रा 500 किलोमीटर लंबी थी और बुंदेलखंड क्षेत्र के पांच जिलों से गुजरने के बाद बागेश्वर धाम पहुंचकर संपन्न हुई. इसे रथ यात्रा भी कहा गया.
शास्त्री ने कहा कि यात्रा का एक उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाने का संदेश देना था. उन्होंने कहा, “आइए, सुनिश्चित करें कि हमारी महिलाएं बुर्के के पीछे छिपकर न रहें. इसके बजाय वे दुर्गा या काली की तरह बनें और सशक्त हों. वे IPS या IAS अधिकारी भी बन सकती हैं. हमारी रथ यात्रा का यही उद्देश्य था.” उनकी बात का सार यह है कि महिलाएं आगे बढ़ें, मजबूत बनें और IPS या IAS जैसे बड़े पदों तक पहुंचने का लक्ष्य रखें.
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यात्रा का दूसरा उद्देश्य हिंदू समुदाय को एकजुट करना था. तीसरा उद्देश्य बुंदेलखंड को नशामुक्त देखना था. शास्त्री के मुताबिक यात्रा के जरिए इन्हीं बातों का संदेश बुंदेलखंड के लोगों तक पहुंचाया गया. यानी एक तरफ समाज को जोड़ने की बात थी, तो दूसरी तरफ नशे से दूर रहने का संदेश.
उन्होंने कहा कि पूरे देश को जागरूक करने की कोशिश से पहले अपने घर और अपने क्षेत्र को जागरूक करना जरूरी है. इसी सोच के तहत यात्रा का ध्यान बुंदेलखंड पर रखा गया.
यात्रा के समापन पर शास्त्री ने इसमें शामिल होने वाले और सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार जताया. उन्होंने यात्रा के दौरान महिला सशक्तीकरण, हिंदू एकता और नशामुक्त बुंदेलखंड के लक्ष्यों पर खास जोर दिया. इस तरह यात्रा सिर्फ धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके जरिए महिला सशक्तीकरण और नशामुक्ति जैसे सामाजिक मुद्दों पर भी बात रखी गई.