scorecardresearch
 

मशहूर कवियों ने व्यंग्य में बयां किया मॉर्डन प्रेम, तालियां बजाने पर मजबूर हुए लोग

साहित्य आज तक का मंच सज चुका है. साहित्य आज तक के दूसरे दिन डॉ. सुरेश अवस्थी, फारूक सरल और पॉपुलर मेरठी ने अपनी कविताओं से लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया. तीनों ही कवियों ने आज की मॉर्डन दिक्कतों और युवाओं पर बात की.

Advertisement
X
कवि डॉक्टर सुरेश अवस्थी
कवि डॉक्टर सुरेश अवस्थी

साहित्य के सितारों का महाकुंभ शुरू हो चुका है. साहित्य आज तक 2022 के दूसरे दिन कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ. डॉ. सुरेश अवस्थी, फारूक सरल और पॉपुलर मेरठी कवि सम्मेलन का हिस्सा बने. सभी कविओं ने अपनी रचनाओं से साहित्य आज तक का माहौल खुशनुमा बना दिया. 

व्यंग में बड़ी बात कह गये कवि 
पॉपुलर मेरठी व्यंग्य तरीके से दिल की बात कहने के लिये जाने जाते हैं. पॉपुलर मेरठी ने शुरूआत की चंद लाइनों में लाइमलाइट लूट ली. व्यंग्य करते हुए वो कहते हैं,  'ना तो कुछ गाने बजाने में मजा, ना कुछ माल कमाने में मजा आता है. नाम खुजली का बुरा लगता है सबको, लेकिन फिर भी खुजलाने में मजा आता है.'

इसके बाद उन्होंने घोटालों पर व्यंग्य किया. पॉपुलर मेरठी कहते हैं,  'दब चुकी मेरे पुराने घोटालों की फाइल. ये ना हो कि नये साल में पकड़ा जाउं.' अपनी सासू मां का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'मेरी सासू मां भी कैसी कि गजब साइंटिस्ट, रोज फटने वाला बम मेरे नाम कर दिया.' स्टेज से जाते-जाते वो देश के नेताओं का जिक्र करते हुए कहते हैं, 'जिसे मिलना है हमसे अभी मिल ले, चुनाव जीतने के बाद हम नहीं मिलते.'

Advertisement

फारूख सरल ने किया पुराने फोटो का जिक्र 
फारूख सरल ने स्टेज पर आते ही पुराने फोटो एल्बम का जिक्र किया है. वो कहते हैं कि 'एक दिन मेरे बेटे ने पुराने एल्बम में मेरा फोटो देख लिया. इसके बाद वो अपनी मम्मी से कहता है, ये कौन है. सूरत तो जानी-पहचानी है. आप ही लगाएं अनुमान जरा कौन है. श्रीमती बोलीं- बेटा यही तो हैं बाप तेरे. अब मत पूछना कि ये इंसान कौन है. बेटे ने कहा पापा ये हैं घर में तो ये दाढ़ी वाला गंजा बेइमान कौन है.' कवि कहते हैं कि यही छोटी-छोटी बातें आनंद देती हैं.

आगे उन्होंने ये भी कहा कि फोन के आने से दो दिक्कतें हो गई हैं. पहली ये है कि कवि सम्मेलन में कम तालियां बजती हैं. इसके अलावा निजी जिंदगी में भी कई परेशानियां आ गई हैं.  

सोशल मीडिया पर बना प्रेम का मजाक
फारूख सरल और पॉपुलर मेरठी के बाद मंच पर डॉक्टर सुरेश अवस्थी आये और कहा कि सोशल मीडिया पर प्रेम का मजाक बन चुका है. प्रेम पर बात करते हुए वो कहते, 'त्याग तपस्या तन बने, मन हो जाए फकीर. प्रेम अगर जीना चाहो, तो हर दिन पढ़ो कबीर.' 

प्रेम पर कवि की ये लाइनें सुनने के बाद साहित्य आज तक का मंच तालियों के शोर गंजू उठा. 

Advertisement

18 नवंबर से साहित्य आज तक का आगाज हो चुका है. साहित्य आज तक मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम, इंडिया गेट, दिल्ली में हो रहा है. जो 20 नवंबर तक चलेगा.  


Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement