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नाना पाटेकर की कार्डियक अरेस्ट ने ली जान, क्या होते हैं इसके संकेत

Nana Patekar Died At 75: नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया है. उनके निधन का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया जा रहा है. इसने एक बार फिर कार्डियर अरेस्ट को चर्चा में ला दिया है. कार्डियक अरेस्ट, हार्ट अटैक से बिल्कुल अलग और बहुत ही खतरनाक होता है. जानें कार्डियक अरेस्ट क्या होता है, इसके कारण और शुरुआती संकेत क्या हैं और ऐसी इमरजेंसी में CPR से कैसे जान बचाई जा सकती है.

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नाना पाटेकर ने गोवा में अंतिम सांस ली.
नाना पाटेकर ने गोवा में अंतिम सांस ली.

Nana Patekar Died At 75: हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर ने हर किसी को झकझोर दिया है. 75 साल के नाना पाटेकर को गोवा स्थित उनके घर पर कथित तौर पर बेहोशी की हालत में पाया गया. उन्हें सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई थी, जिसके बाद मणिपाल हॉस्पिटल मेडिकल टीम को उनके फ्लैट पर भेजा गया था. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां मेडिकल टीम ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. शुरुआती रिपोर्टों में मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट बताई जा रही है. मामला मेडिको-लीगल होने की वजह से पोस्टमार्टम भी किया जाएगा. उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने भी निधन की पुष्टि की है.

नाना पाटेकर के निधन के बाद एक बार फिर कार्डियक अरेस्ट को लेकर चिंता बढ़ गई है. सबसे डराने वाली बात ये है कि यह ऐसी मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें व्यक्ति को संभलने का ज्यादा वक्त नहीं मिलता. कई मामलों में कोई बड़ा संकेत मिलने से पहले ही व्यक्ति अचानक गिर जाता है और कुछ ही मिनटों में स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है. मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक, तुरंत CPR और जरूरत पड़ने पर डिफिब्रिलेशन मिलने से बचने की संभावना बढ़ सकती है.

आखिर कार्डियक अरेस्ट होता क्या है?
कार्डियक अरेस्ट को आसान भाषा में समझें तो इसमें दिल की धड़कन को कंट्रोल करने वाले इलेक्ट्रिकल सिस्टम में अचानक गड़बड़ी हो जाती है. दिल सामान्य तरीके से धड़कना बंद कर देता है और शरीर में खून पंप नहीं हो पाता. इसका सीधा असर दिमाग और शरीर के दूसरे जरूरी अंगों तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन पर पड़ता है.

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यही वजह है कि कार्डियक अरेस्ट को समय के खिलाफ चलने वाली मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है. व्यक्ति कुछ ही देर में बेहोश हो सकता है और सामान्य तरीके से सांस लेना बंद कर सकता है. अगर तुरंत मदद नहीं मिलती तो ये जानलेवा साबित हो सकता है.

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट एक नहीं हैं
अक्सर लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों बिल्कुल अलग हैं. हार्ट अटैक में दिल तक खून पहुंचाने वाली नस में ब्लॉकेज हो जाता है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में दिल की धड़कन को कंट्रोल करने वाली इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी अचानक गड़बड़ा जाती है. हालांकि दोनों के बीच एक अहम कनेक्शन भी है. हार्ट अटैक कुछ मामलों में दिल की इलेक्ट्रिकल सिस्टम को प्रभावित कर सकता है और कार्डियक अरेस्ट की स्थिति पैदा कर सकता है.

क्यों आता है कार्डियक अरेस्ट?
कार्डियक अरेस्ट होने की कई वजहें हो सकती हैं. इनमें दिल की धड़कन का अचानक अनियमित या असामान्य हो जाना एक बड़ी वजह है. इसके अलावा दिल की नसों से जुड़ी बीमारी, पहले हार्ट अटैक आ चुका होना, हार्ट फेलियर, दिल की मांसपेशियों की बीमारी, जन्म से जुड़ी हार्ट कंडीशन और दिल की इलेक्ट्रिकल सिस्टम में गड़बड़ी भी इसका खतरा बढ़ा सकती है.

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कुछ मामलों में शरीर में ऑक्सीजन की बहुत ज्यादा कमी, ज्यादा खून बहना, गंभीर इंफेक्शन, कुछ दवाओं का असर या जहरीले पदार्थों के संपर्क में आने से भी कार्डियक अरेस्ट हो सकता है.

  • दिल की धड़कन का अचानक गड़बड़ा जाना एक बड़ी वजह है.
  • दिल की नसों से जुड़ी बीमारी या पहले हार्ट अटैक आ चुका होना.
  • हार्ट फेलियर या दिल की मांसपेशियों से जुड़ी बीमारी.
  • जन्म से जुड़ी कुछ हार्ट कंडीशन.
  • दिल की इलेक्ट्रिकल सिस्टम में गड़बड़ी.
  • शरीर में ऑक्सीजन की बहुत ज्यादा कमी.
  • ज्यादा खून बहना.
  • गंभीर इंफेक्शन.
  • कुछ दवाओं का असर या जहरीले पदार्थों के संपर्क में आना.

सबसे खतरनाक बात- कई बार पहले से कोई साफ संकेत नहीं मिलता
कार्डियक अरेस्ट की सबसे बड़ी चिंता यही है कि ये हमेशा पहले से कोई संकेत देकर नहीं आता. कई बार व्यक्ति अचानक गिर जाता है, बेहोश हो जाता है और सामान्य रूप से सांस लेना बंद कर देता है.

हालांकि, कुछ लोगों में कार्डियक अरेस्ट से पहले कुछ लक्षण नजर आ सकते हैं, जैसे:

  • सीने में दर्द या दबाव महसूस होना
  • सांस लेने में परेशानी
  • चक्कर आना
  • अचानक कमजोरी महसूस होना
  • दिल की धड़कन तेज या गड़बड़ होना
  • मतली या उल्टी होना

लेकिन जरूरी नहीं कि कार्डियक अरेस्ट से पहले हर व्यक्ति में ये लक्षण दिखाई दें.

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ये संकेत दिखें तो बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर किसी व्यक्ति को अचानक सीने में दर्द, सांस फूलना, चक्कर, असामान्य धड़कन या अचानक कमजोरी महसूस हो रही है तो इसे मामूली समस्या समझकर टालना ठीक नहीं है. खासकर अगर व्यक्ति की हालत तेजी से बिगड़ रही हो तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए.

और अगर कोई व्यक्ति अचानक गिर जाए, आवाज देने या कंधा थपथपाने पर किसी भी तरह का कोई रिएक्शन न दे और सामान्य तरीके से सांस न ले रहा हो, तो इसे कार्डियक अरेस्ट की इमरजेंसी मानकर तुरंत एक्शन लेना चाहिए.

किसी को अचानक कार्डियक अरेस्ट आए तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में एक-एक सेकंड बेहद महत्वपूर्ण होता है. तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद के लिए कॉल करें. अगर व्यक्ति बेहोश है और सामान्य तरीके से सांस नहीं ले रहा है, तो तुरंत CPR शुरू करें.

अगर आसपास AED यानी ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर मौजूद है, तो उसे भी जल्द से जल्द इस्तेमाल करें. CPR शरीर में खून का फ्लो बनाए रखने में मदद करता है, जबकि AED दिल की खतरनाक धड़कन को सामान्य करने में मदद कर सकता है.

हर घर में CPR की बेसिक जानकारी क्यों जरूरी है?
कार्डियक अरेस्ट में अस्पताल पहुंचने तक का हर मिनट बेहद जरूरी होता है. ऐसे में सिर्फ एंबुलेंस का इंतजार करना काफी नहीं होता. शुरुआती कुछ मिनटों में आसपास मौजूद लोगों की मदद बहुत अहम हो सकती है. अगर व्यक्ति को तुरंत CPR दिया जाए और जरूरत पड़ने पर डिफिब्रिलेटर का इस्तेमाल किया जाए, तो उसके बचने की संभावना बढ़ सकती है.

नाना पाटेकर के निधन की खबर ने एक बार फिर यह समझाया है कि कार्डियक अरेस्ट कितनी गंभीर इमरजेंसी है, जिसमें हर सेकंड मायने रखता है. इसके लक्षणों को पहचानना और समय रहते CPR जैसी मदद देना किसी की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है.

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