भारत में घर खरीदने और उसे बेहतर बनाने के तरीकों में बदलाव देखने को मिल रहा है. अब युवा घर से जुड़ी चीजें चुनते वक्त अपनी पसंद, जरूरतों और लाइफस्टाइल को भी ध्यान में रख रहे हैं. डेलॉयट की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, पहली बार घर खरीदने वाले लोगों की ऐवरेज उम्र पहले 40 साल के आसपास हुआ करती थी, जो अब घटकर 30 साल के शुरुआती सालों में आ गई है.
सोशल मीडिया से मिल रहे हैं घर सजाने के आइडिया
घर से जुड़ी चीजें खरीदने के लिए सोशल मीडिया एक अहम जरिया बन रहा है. डेलॉयट की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 80% खरीदार सोशल मीडिया के जरिए घर और घरेलू इस्तेमाल के सामान के बारे में जानते हैं. वहीं, हर तीन में से एक ग्राहक का कहना है कि ब्रांड के वीडियो उनके खरीदारी के फैसले को प्रभावित करते हैं.
युवाओं में इसका असर ज्यादा दिखाई देता है. रिपोर्ट के अनुसार, 18 से 28 साल की उम्र के करीब 57 % लोग घर से जुड़ी चीजों के लिए क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स से आइडिया लेते हैं. वहीं, 45 से 60 साल के लोगों में ये आंकड़ा 27% है.
अब कस्टमर सोशल मीडिया पर किसी सोफे, लाइटिंग या किचन से जुड़ा आइडिया देखने के बाद उसके बारे में ऑनलाइन जानकारी जुटाते हैं, दूसरे ऑप्शन्स से तुलना करते हैं और फिर दुकान जाकर खरीदारी कर सकते हैं.
घर को अपनी पसंद के मुताबिक बनाना चाहते हैं युवा
जेन जी के लिए घर से जुड़ी चीजों में पर्सनल पसंद का महत्व बढ़ रहा है. डेलॉयट के सर्वे के मुताबिक, 18 से 28 साल के करीब 35% लोग घर में सुधार को अपनी पसंद जाहिर करने से जोड़ते हैं. 45 से 60 साल के लोगों में ऐसा मानने वालों की संख्या 26% है.
रिपोर्ट में घर के मालिकों को चार अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया है. इनमें 39% लोग ऐसे हैं, जो घर में काम आने वाली चीजों को प्राथमिकता देते हैं. वहीं, 34% लोग घर को अपनी पसंद और लाइफस्टाइल के हिसाब से सजाना पसंद करते हैं. इसके अलावा, 21% लोग स्मार्ट टेक्नोलॉजी वाले घर पसंद करते हैं, जबकि 6% लोग अपने घर में लगातार बदलाव और अपग्रेड करते रहते हैं. इन सभी की पसंद अलग-अलग है, जिसमें घर की उपयोगिता, सजावट, टेक्नोलॉजी और बार-बार बदलाव करना शामिल है.
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घर में छोटे-छोटे बदलावों पर भी ध्यान
अब घर में बदलाव सिर्फ एक बार होने वाला काम नहीं रह गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, युवा ऐसे फर्नीचर में इंटरेस्ट दिखा रहे हैं जिन्हें अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल किया जा सके. घर में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है.
इसके अलावा, पर्दे, कालीन, कुशन और बेडशीट जैसी चीजों को बदलकर घर के लुक में बदलाव करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है. अपनी जरूरत के मुताबिक फर्नीचर और घर से जुड़ी चीजों को चुनने का चलन इस बदलाव का हिस्सा है.
2030 तक कितना बढ़ सकता है बाजार?
डेलॉयट का अनुमान है कि भारत का होम और हाउसहोल्ड बाजार अगले पांच साल में 1.6 गुना बढ़ सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2030 तक यह बाजार 260 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. इसमें बेहतर और प्रीमियम सामान की मांग, घर में बार-बार बदलाव करने का चलन और बड़े शहरों के साथ दूसरे इलाकों में बढ़ती आकांक्षाओं की भूमिका हो सकती है.