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Why Silver Foil is Used on Indian Sweets: काजू कतली से लेकर बर्फी तक... सिर्फ सजावट नहीं, मिठाइयों पर चांदी का वर्क लगाने की यह है असली वजह

Why Silver Foil is Used on Indian Sweets: क्या आप जानते हैं कि मिठाइयों पर लगी चमकदार चांदी की परत सिर्फ उनकी खूबसूरती बढ़ाने के लिए नहीं होती, बल्कि इसके पीछे परंपरा, धार्मिक मान्यताएं और कई दिलचस्प कारण जुड़े हुए हैं.

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काजू कतली से बर्फी तक, आखिर मिठाइयों पर क्यों लगाया जाता है चांदी का वर्क? (Photo-ITG)
काजू कतली से बर्फी तक, आखिर मिठाइयों पर क्यों लगाया जाता है चांदी का वर्क? (Photo-ITG)

Why Silver Foil is Used on Indian Sweets: भारत में त्योहार, शादी-ब्याह, पूजा-पाठ या किसी भी शुभ अवसर पर मिठाइयों का खास महत्व होता है. आपने अक्सर देखा होगा कि बर्फी, पेड़ा, काजू कतली और कई दूसरी मिठाइयों के ऊपर चांदी की चमकदार परत लगी होती है. इसे चांदी का वर्क या वरक कहा जाता है. हालांकि ज्यादातर लोग इसे सिर्फ सजावट का हिस्सा मानते हैं लेकिन इसके पीछे सदियों पुरानी परंपरा, संस्कृति और विज्ञान छिपा हुआ है.

मिठाई को देता है शाही लुक
चांदी का वर्क मिठाई को शाही और प्रीमियम लुक देता है. इसकी पतली चमकदार परत मिठाई की खूबसूरती बढ़ा देती है, जिससे वह त्योहारों, शादी-ब्याह और मेहमाननवाजी के लिए और भी खास लगती है. यही कारण है कि काजू कतली, पेड़ा और बर्फी जैसी मिठाइयों पर अक्सर वर्क लगाया जाता है.

लंबे समय तक सेफ रखने के लिए
चांदी के वर्क का इस्तेमाल केवल मिठाईयों को सुंदर बनाने के लिए ही नहीं किया जाता था, बल्कि उन्हें लंबे समय तक सेफ रखने के उद्देश्य से भी किया जाता था. चांदी में नेचुरल एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-माइक्रोबियल गुण जाते हैं. यही वजह है कि पुराने जमाने में, जब रेफ्रिजरेटर जैसी सुविधाएं नहीं थीं, तब दूध और मावे से बनी मिठाइयों पर चांदी की बेहद पतली परत लगाई जाती थी. माना जाता है कि इससे मिठाइयां अपेक्षाकृत अधिक समय तक ताजा और सुरक्षित बनी रहती थीं.

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आयुर्वेद और धार्मिक मान्यताओं से भी जुड़ा है महत्व
भारतीय परंपराओं और आयुर्वेद में चांदी को शीतलता, पवित्रता, सौम्यता और मानसिक संतुलन का प्रतीक माना गया है. यही कारण है कि धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ में चढ़ाए जाने वाले प्रसाद पर भी चांदी का वर्क लगाया जाता है. इससे प्रसाद की पवित्रता और विशेष महत्व को दर्शाया जाता है.

चांदी का वर्क कैसे बनता है?
असली चांदी का वर्क बेहद पतला होता है. इसे शुद्ध चांदी को विशेष प्रोसेस के तहत बार-बार पीटकर तैयार किया जाता है. यह इतना नाजुक होता है कि हल्के स्पर्श से भी टूट सकता है. चूंकि शुद्ध चांदी शरीर में एब्जॉर्ब नहीं होती, इसलिए सीमित मात्रा में इसका सेवन सेफ माना जाता है.

आज भी क्यों बरकरार है यह परंपरा?
भले ही आज मिठाइयों की पैकेजिंग और प्रेजेंटेशन के तरीके बदल गए हों लेकिन चांदी का वर्क अब भी भारतीय मिठाइयों की पहचान बना हुआ है. यह परंपरा न केवल मिठाइयों को आकर्षक बनाती है, बल्कि भारतीय संस्कृति, उत्सव और मेहमाननवाजी की भावना को भी दर्शाती है. यही वजह है कि चांदी के वर्क से सजी मिठाइयां आज भी हर खास मौके की शान मानी जाती हैं.

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