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जमानत के बाद जेल से बाहर आए सौरव और आशुतोष, अब 23 अक्टूबर को अगली सुनवाई

सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल से बाहर आ गए हैं. जमानत के बाद दोनों ने कोर्ट में शांति बनाए रखने और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर लिखित आश्वासन दिया. मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को होगी.

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सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ से बाहर निकले. (Photo: PTI)
सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ से बाहर निकले. (Photo: PTI)

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल से बाहर आ गए हैं. दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट से जमानत मिलने के बाद दोनों को 21 अक्टूबर को रिहा कर दिया गया. दिल्ली पुलिस ने उनकी न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया. अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजे होगी.

दोनों नेताओं को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था. उन पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने, बैरिकेडिंग तोड़ने और पहले दिए गए शांति बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप थे. 14 अक्टूबर को उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया था. 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई. बुधवार को फिर कोर्ट में पेशी हुई, जहां उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया.

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कोर्ट में लिखित आश्वासन, शांति बनाए रखने की बात

जमानत की प्रक्रिया के दौरान सौरव दास और आशुतोष रांका ने कोर्ट में लिखित आश्वासन दिया कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और कानून-व्यवस्था बनाए रखेंगे. दोनों ने न्यायपालिका पर भरोसा जताया. उन्होंने यह भी कहा कि जब तक जंतर-मंतर को कानूनी प्रक्रिया के तहत दोबारा प्रदर्शन स्थल घोषित नहीं किया जाता, तब तक वे वहां प्रदर्शन के लिए लोगों को नहीं बुलाएंगे. भविष्य में किसी भी प्रदर्शन को संविधान के दायरे में करने का आश्वासन भी दिया.

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कोर्ट ने दोनों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानतदारों की शर्त पूरी करने के बाद रिहा करने का आदेश दिया. निजी मुचलका कोर्ट को दिया गया भरोसा होता है कि संबंधित व्यक्ति तय शर्तों का पालन करेगा. यह रकम नकद जमा कराने के बराबर नहीं है. पुलिस को अगली सुनवाई पर जमानतदारों की जांच रिपोर्ट भी पेश करनी होगी.

यह भी पढ़ें: क्या है SEM कोर्ट, जहां फंसी हुई है सौरव-रांका की रिहाई? सामान्य कोर्ट से कितना अलग

जमानत से पहले हाईकोर्ट पहुंचे थे दोनों नेता

SEM कोर्ट में सुनवाई से पहले दोनों नेताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी हिरासत को चुनौती दी थी. हाईकोर्ट में उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाने की बात कहे जाने के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली.

इस मामले की सुनवाई कर रहे मजिस्ट्रेट को कथित तौर पर धमकी दिए जाने की बात भी सामने आई थी. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की. दोनों नेताओं को जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि वे मामले में बरी हो गए हैं. अब 23 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में मामले से जुड़ी आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी.
 

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