कर्नाटक के शिवमोग्गा में आयोजित दशहरा उत्सव के दौरान एक बड़ा बवाल देखने को मिला. शोभायात्रा के वक्त अचानक हाथी 'सोमन्ना' के उग्र होने की वजह से अफरा-तफरी मच गई. सड़क पर दो हाथी तेजी से भागने लगे और इस दौरान पुलिसकर्मियों की एक टीम उनके पीछे भागती नजर आई.
शिवमोग्गा दशहरा जुलूस के दौरान जैसे ही हाथी सोमन्ना अचानक गुस्से में आ गया और भागने के दौरान उनपर रखा हौदा भी गिर गया. ऐसे में सुरक्षाकर्मियों और वहां मौजूद लोगों के हाथ-पांव फूल गए.
हालात काबू करने के लिए तुरंत जानवरों के डॉक्टरों को बुलाया गया. अधिकारियों ने सूझबूझ दिखाते हुए हाथी को शांत करने के लिए उसे बेहोशी का इंजेक्शन दिया. तब जाकर स्थिति काबू में आई.
भीड़ को नियंत्रित करने और लोगों की सुरक्षा के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. वीडियो में भी देखा जा सकता है कि किस तरह पुलिसकर्मी और अधिकारी हालात पर काबू पाने के लिए दौड़-भाग कर रहे हैं और लोगों को सुरक्षित दूरी पर रहने के लिए कह रहे हैं.
मौके पर पहुंचे एसपी और डीएफओ
शिवमोग्गा के एसपी और DFO तुरंत मौके पर पहुंचे. उन्होंने खुद मोर्चा संभालते हुए स्थिति और भीड़ नियंत्रण का जायजा लिया। प्रशासन की मुस्तैदी से बड़ा हादसा टल गया. प्रशासन के मुताबिक, बेहोश करने की दवा दिए जाने के बाद अब हाथी सोमन्ना की हालत में सुधार हो रहा है. फिलहाल उसे कोट सीतारामंजनेय मंदिर के पास रखा गया है, जहां पशु चिकित्सकों की देखरेख में उसकी रिकवरी जारी है.
वन, पर्यावरण और पारिस्थितिकी मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने इस पूरी घटना पर संज्ञान लिया है. उन्होंने अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं.
हाथी और महावतों के लिए 20 से 30 दिनों की ट्रेनिंग अनिवार्य
मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने वन विभाग को निर्देश दिया है कि अगले साल से दशहरा जम्बू सवारी में हिस्सा लेने वाले सभी हाथियों को जुलूस से पहले 20 दिन से एक महीने तक की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए. ये ट्रेनिंग अनुभवी महावतों और कावदियों (हाथी पालकों) की देखरेख में दी जाएगी, ताकि हाथी भीड़भाड़ और उत्सव के माहौल के आदी हो सकें.
मंत्री ने शिवमोग्गा के डिप्टी कमिश्नर, पुलिस अधीक्षक (SP) और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर बातचीत कर पूरी जानकारी ली. उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि आखिर हाथी के अचानक भड़कने और दौड़ने के क्या कारण रहे? क्या जुलूस से पहले पर्याप्त एहतियाती कदम उठाए गए थे? इसके अलावा, उन्होंने सार्वजनिक सुरक्षा, लोगों को हुई असुविधा और हाथी के भागने से वाहनों को हुए नुकसान का भी जायजा लिया.
'जनभावनाओं और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं'
रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि दशहरा जम्बू सवारी सिर्फ एक धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि ये लोगों की भावनाओं, परंपराओं और आस्था से जुड़ा एक बेहद अहम उत्सव है. ऐसे आयोजनों में हाथियों का बेकाबू होना या जुलूस का बाधित होना जनता के मन में डर पैदा करता है और उनकी भावनाओं को आहत करता है. इसलिए अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में इस तरह की चूक दोबारा न हो.
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मंत्री ने निर्देश दिए कि त्योहारों और बड़ी भीड़ वाले सार्वजनिक आयोजनों में भाग लेने वाले हाथियों को वाद्य यंत्रों की आवाज, भारी भीड़ और जुलूस के माहौल से परिचित कराने के लिए विशेष ट्रेनिंग दी जाए. साथ ही, जम्बू सवारी में शामिल होने वाले हर हाथी की शारीरिक फिटनेस, मानसिक स्थिति, क्षमता और तैयारियों की पहले से ही पूरी तरह जांचकी जानी चाहिए, ताकि जन सुरक्षा और हाथियों की सेहत को तरजीह दी जा सके.