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क्या ट्रंप की कुर्सी पर होगा असर? अमेरिका में हो रहे मिडटर्म इलेक्शन का क्या है मतलब

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव हो रहे हैं. यह चुनाव होता क्या है? क्या इस चुनाव में हार- जीत से वहां के राष्ट्रपति भी चेंज हो सकते हैं? चलिए जानते हैं कि इस चुनाव में क्या होता है, किनके बीच चुनाव होता है, कौन- कौन इसमें हिस्सा लेते हैं? कौन- कौन इसके वोटर होते हैं और इस चुनाव का क्या असर होता है?

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अमेरिका में मंगलवार को मिडटर्म इलेक्शन के लिए वोटिंग हो रही है. (Photo - X/Donald Trump))
अमेरिका में मंगलवार को मिडटर्म इलेक्शन के लिए वोटिंग हो रही है. (Photo - X/Donald Trump))

अमेरिका में अभी मिडटर्म इलेक्शन हो रहे हैं. दरअसल, अमेरिका में ये चुनाव राष्ट्रपति चुनाव के ठीक दो साल बाद होते हैं. इस चुनाव में राष्ट्रपति पद के लिए वोटिंग नहीं होती, लेकिन इसके नतीजे राष्ट्रपति की ताकत और सरकार के कामकाज पर बड़ा असर डाल सकते हैं. इस चुनाव को लेकर लोगों के मन में बहुत सारे सवाल हैं. आखिर ये चुनाव होता क्या है, इसमें वोट कौन डालते हैं, इसका असर कैसा होता है? चलिए जानते हैं अमेरिका के मिड टर्म चुनाव से जुड़ी वो सारी बातें जो आप जानना चाहते हैं?

इस चुनाव में अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर वोटिंग होती है. वहीं, सीनेट की करीब एक तिहाई सीटों के लिए चुनाव कराया जाता है. इसके अलावा कई राज्यों के गवर्नर और स्थानीय प्रतिनिधि भी चुने जाते हैं. यानी इस चुनाव से यह तय हो सकता है कि राष्ट्रपति की पार्टी संसद में बहुमत में रहेगी या विपक्षी पार्टी को ज्यादा ताकत मिलेगी.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब राष्ट्रपति का चुनाव ही नहीं होता तो क्या मिडटर्म इलेक्शन के नतीजों से राष्ट्रपति बदल सकता है? आखिर इसमें कौन वोट डालता है, उम्मीदवार कौन होते हैं और यह चुनाव अमेरिका की राजनीति के लिए इतना अहम क्यों है? आइए समझते हैं.

मिडटर्म इलेक्शन का मतलब क्या होता है?

अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता है. ये राष्ट्रपति चुनाव के दो साल बाद दो होते हैं. अंग्रेजी में 'मिडटर्म' का मतलब है कार्यकाल का बीच का समय. मसलन, अमेरिका में 2024 में राष्ट्रपति चुनाव हुए थे. इसके दो साल बाद 3 नवंबर 2026 को मिडटर्म इलेक्शन हो रहे हैं. इसी तरह अगला राष्ट्रपति चुनाव 2028 में होगा.

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इस चुनाव का मुख्य मकसद अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के सदस्यों को चुनना है. अमेरिकी कांग्रेस के दो सदन हैं- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट. इन दोनों सदनों में किस पार्टी के पास बहुमत होगा, यह मिडटर्म इलेक्शन के नतीजों से तय हो सकता है. 

क्या मिडटर्म इलेक्शन से राष्ट्रपति बदल जाते हैं?
नहीं, मिडटर्म इलेक्शन में राष्ट्रपति का चुनाव नहीं होता और इसके नतीजों से राष्ट्रपति सीधे नहीं बदलते.अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता है. राष्ट्रपति चुनने के लिए अलग से चुनाव होता है. मिडटर्म इलेक्शन में राष्ट्रपति की कुर्सी दांव पर नहीं होती, बल्कि संसद और राज्यों के कई पदों के लिए चुनाव होता है.

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि राष्ट्रपति के लिए इस चुनाव के नतीजे मायने नहीं रखते. अगर राष्ट्रपति की पार्टी कांग्रेस के किसी एक या दोनों सदनों में बहुमत खो देती है, तो उसे अपने फैसले लागू कराने में मुश्किल हो सकती है.

मसलन, राष्ट्रपति कोई नया कानून बनाना चाहता है तो उसे कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत पड़ सकती है. अगर विपक्षी पार्टी के पास बहुमत है, तो वह उस प्रस्ताव को रोक सकती है या उसमें बदलाव की मांग कर सकती है. कांग्रेस की समितियां राष्ट्रपति के प्रशासन के कामकाज की जांच भी कर सकती हैं.

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यानी मिडटर्म इलेक्शन राष्ट्रपति को पद से नहीं हटाता, लेकिन उसके राजनीतिक अधिकार और काम करने की क्षमता पर असर डाल सकता है. 

मिडटर्म इलेक्शन में किन पदों के लिए चुनाव होता है?

इस चुनाव में सिर्फ एक या दो पदों के लिए वोटिंग नहीं होती. अमेरिकी संसद से लेकर राज्यों की सरकारों तक कई पदों के लिए चुनाव होता है. 

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटें - अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 435 वोटिंग सदस्य होते हैं. इन सभी सीटों के लिए हर दो साल में चुनाव होता है. हर प्रतिनिधि किसी खास चुनावी क्षेत्र यानी कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करता है.

सीनेट की करीब एक तिहाई सीटें-  सीनेट अमेरिकी संसद का ऊपरी सदन है. इसमें कुल 100 सदस्य होते हैं और हर राज्य से दो सीनेटर चुने जाते हैं. सीनेटर का कार्यकाल छह साल का होता है. इसलिए सभी सीटों पर एक साथ चुनाव नहीं होता. हर दो साल में करीब एक तिहाई सीटों के लिए चुनाव कराया जाता है.

राज्यों के गवर्नर और दूसरी सीटें- मिडटर्म इलेक्शन के दौरान कई राज्यों में गवर्नर के चुनाव भी होते हैं. इसके अलावा राज्य की विधानसभाओं, अटॉर्नी जनरल और अन्य स्थानीय पदों के लिए भी वोटिंग हो सकती है. किन पदों पर चुनाव होगा, यह राज्य के चुनावी कैलेंडर पर निर्भर करता है.

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इस बार के मिडटर्म इलेक्शन में 36 राज्यों के गवर्नर पद के लिए चुनाव हो रहे हैं. इसके अलावा राज्य विधानसभाओं की हजारों सीटों पर भी वोटिंग हो रही है.

मिडटर्म इलेक्शन में कौन वोट डाल सकता है?

अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन में वोट डालने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं.
अमेरिकी नागरिक होना जरूरी है: भारत या किसी दूसरे देश का नागरिक सिर्फ अमेरिका में रहने के आधार पर इस चुनाव में वोट नहीं डाल सकता.
उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए: चुनाव के दिन तक 18 साल की उम्र पूरी करने वाले नागरिक वोट डाल सकते हैं.
वोटर रजिस्ट्रेशन जरूरी है: ज्यादातर राज्यों में वोट डालने के लिए मतदाता के रूप में रजिस्ट्रेशन कराना होता है. नॉर्थ डकोटा इसका अपवाद है.

राज्य में रहने की शर्तें पूरी करनी होती हैं: मतदाता को संबंधित राज्य के निवास संबंधी नियमों का पालन करना होता है.

अमेरिका में वोटिंग के नियम सभी राज्यों में एक जैसे नहीं हैं. वोटर रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख, वोटिंग के तरीके और कुछ दूसरी शर्तें राज्य के हिसाब से अलग हो सकती हैं. अमेरिकी नागरिक विदेश में रहते हुए भी निर्धारित नियमों के तहत वोट डाल सकते हैं. 

चुनाव किनके बीच होता है? क्या सिर्फ दो पार्टियां लड़ती हैं?

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अमेरिकी राजनीति में मुख्य रूप से दो बड़ी पार्टियों का दबदबा है- डेमोक्रेटिक पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी.

मिडटर्म इलेक्शन में इन दोनों पार्टियों के उम्मीदवार हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, सीनेट, गवर्नर और दूसरे पदों के लिए चुनाव लड़ते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि चुनाव सिर्फ इन्हीं दो पार्टियों के बीच होता है.

अमेरिका में निर्दलीय और छोटी पार्टियों के उम्मीदवार भी चुनाव लड़ सकते हैं. हालांकि, बैलेट यानी वोटिंग पेपर पर उम्मीदवार का नाम शामिल करने के लिए राज्य के निर्धारित नियमों का पालन करना होता है.

चुनाव से पहले कई राज्यों में प्राइमरी इलेक्शन भी होते हैं. इनके जरिए कोई पार्टी तय करती है कि आम चुनाव में उसका उम्मीदवार कौन होगा. कुछ राज्यों में उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया अलग भी हो सकती है.

उदाहरण के लिए, अगर किसी राज्य के एक चुनावी क्षेत्र में डेमोक्रेटिक पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार आमने-सामने हैं, तो उस क्षेत्र के योग्य मतदाता अपने वोट से तय करेंगे कि उनका प्रतिनिधि कौन बनेगा. चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवार को अपने प्रतिद्वंद्वियों से ज्यादा वोट हासिल करने होते हैं. हालांकि, चुनाव जीतने के सटीक नियम संबंधित पद और राज्य के कानून पर निर्भर करते हैं. 

मिडटर्म इलेक्शन में राष्ट्रपति की पार्टी की हार क्यों मायने रखती है?

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मिडटर्म इलेक्शन को अमेरिकी राष्ट्रपति के कामकाज पर जनता की प्रतिक्रिया के तौर पर भी देखा जाता है. राष्ट्रपति को सत्ता संभाले दो साल हो चुके होते हैं. इस दौरान सरकार ने अर्थव्यवस्था, रोजगार, महंगाई, टैक्स, विदेश नीति और दूसरे मुद्दों पर क्या काम किया, इसका असर मतदाताओं के फैसले पर पड़ सकता है.

अगर मतदाता राष्ट्रपति की पार्टी के काम से खुश नहीं हैं, तो वे दूसरी पार्टी के उम्मीदवारों को वोट दे सकते हैं. इससे कांग्रेस में सत्ता का संतुलन बदल सकता है.

मान लीजिए, राष्ट्रपति रिपब्लिकन पार्टी से हैं, लेकिन मिडटर्म इलेक्शन में डेमोक्रेटिक पार्टी को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत मिल जाता है. ऐसे में राष्ट्रपति को बजट और कानूनों से जुड़े प्रस्तावों पर विपक्ष का सामना करना पड़ सकता है. 

हालांकि, हर मुद्दे पर दोनों सदनों की भूमिका एक जैसी नहीं होती. मसलन, टैक्स और सरकारी खर्च से जुड़े कई विधायी प्रस्तावों में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की खास भूमिका होती है, जबकि सीनेट कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों और अंतरराष्ट्रीय संधियों की मंजूरी में अहम भूमिका निभाती है.इसलिए राष्ट्रपति की पार्टी के लिए दोनों सदनों में बहुमत बनाए रखना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होता है. 

कुल मिलाकर, क्यों अहम है मिडटर्म इलेक्शन?

अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन भले ही राष्ट्रपति चुनाव जितना चर्चित न हो, लेकिन देश की राजनीति में इसकी अहम भूमिका है. इससे तय होता है कि संसद के दोनों सदनों में किस पार्टी का दबदबा रहेगा और राष्ट्रपति को अपने एजेंडे पर आगे बढ़ने में कितना सहयोग मिलेगा.

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यही वजह है कि मिडटर्म इलेक्शन को सिर्फ संसद के सदस्यों को चुनने वाला चुनाव नहीं माना जाता. यह अमेरिकी मतदाताओं के लिए राष्ट्रपति की नीतियों पर अपनी राय जाहिर करने का भी मौका होता है.

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