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आनंद विहार में टर्मिनल और छत्रपति शिवाजी में टर्मिनस लिखा होता है... इनमें फर्क क्या है?

आनंद विहार में टर्मिनल और मुंबई के छत्रपति शिवाजी में टर्मिनस लिखा होने के पीछे रेलवे के अलग-अलग कारण हैं. टर्मिनस रेलवे लाइन का आखिरी स्टेशन होता है, जबकि टर्मिनल ऐसा बड़ा स्टेशन होता है जहां से बड़ी संख्या में ट्रेनों का संचालन किया जाता है. 

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हर टर्मिनस को टर्मिनल नहीं कहा जा सकता और हर टर्मिनल, टर्मिनस नहीं होता. ( Photo: ITG)
हर टर्मिनस को टर्मिनल नहीं कहा जा सकता और हर टर्मिनल, टर्मिनस नहीं होता. ( Photo: ITG)

भारत में हर दिन लाखों लोग रेलवे से सफर करते हैं. टिकट बुक करते समय या स्टेशन पर लगे बोर्ड देखते हुए आपने कई स्टेशनों के नाम के आगे टर्मिनल  और  टर्मिनस लिखा जरूर देखा होगा. जैसे दिल्ली का आनंद विहार टर्मिनल और मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस. पहली नजर में ये दोनों शब्द एक जैसे लगते हैं, लेकिन इनका मतलब बिल्कुल अलग होता है. यही वजह है कि भारतीय रेलवे हर स्टेशन के लिए इनका इस्तेमाल सोच-समझकर करती है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि टर्मिनल और टर्मिनस में क्या अंतर होता है.

टर्मिनस क्या होता है?
टर्मिनस ऐसे रेलवे स्टेशन को कहा जाता है, जहां रेलवे लाइन खत्म हो जाती है. यानी ट्रेन उस स्टेशन पर पहुंचने के बाद आगे उसी ट्रैक पर नहीं जा सकती. उसे वापस उसी दिशा में लौटना पड़ता है, जहां से वह आई थी. इसे आप किसी सड़क के आखिरी छोर की तरह समझ सकते हैं. आगे रास्ता नहीं होता, इसलिए वाहन को वापस मुड़ना पड़ता है.

मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. यहां आने वाली कई ट्रेनें यहीं अपनी यात्रा पूरी करती हैं. आगे उसी लाइन पर जाने का रास्ता नहीं होता, इसलिए ट्रेन को वापस दूसरी दिशा में रवाना किया जाता है.

टर्मिनल क्या होता है?
टर्मिनल का मतलब थोड़ा अलग होता है. यह ऐसा स्टेशन होता है, जहां से बड़ी संख्या में ट्रेनों का संचालन किया जाता है. यहां यात्रियों की सुविधा के लिए ज्यादा प्लेटफॉर्म, पार्किंग, वेटिंग एरिया, टिकट काउंटर और दूसरी आधुनिक सुविधाएं होती हैं. जरूरी नहीं कि टर्मिनल रेलवे लाइन का आखिरी स्टेशन ही हो. कई बार रेलवे किसी बड़े स्टेशन को सिर्फ इसलिए टर्मिनल घोषित कर देती है ताकि वहां से ट्रेनों का बेहतर संचालन किया जा सके और दूसरे स्टेशनों पर भीड़ कम हो.

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दिल्ली का आनंद विहार टर्मिनल इसी वजह से बनाया गया था. इसका मकसद नई दिल्ली और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बढ़ती भीड़ को कम करना था. यहां से देश के कई राज्यों के लिए लंबी दूरी की ट्रेनें चलाई जाती हैं.

क्या हर टर्मिनल, टर्मिनस होता है?
हर टर्मिनस को टर्मिनल नहीं कहा जा सकता और हर टर्मिनल, टर्मिनस नहीं होता. इसे आसान भाषा में ऐसे समझिए. मान लीजिए एक सड़क है, जिस पर बस चलती है. अगर सड़क का आखिरी पड़ाव आ गया और उसके आगे सड़क ही नहीं है, तो वह टर्मिनस जैसा है. यानी यात्रा यहीं खत्म हो जाती है. अब दूसरी तरफ एक बड़ा बस अड्डा सोचिए, जहां से कई शहरों के लिए दर्जनों बसें चलती हैं. वहां टिकट काउंटर, इंतजार करने की जगह और कई प्लेटफॉर्म होते हैं. ऐसे बस अड्डे को टर्मिनल की तरह समझ सकते हैं.

यानी आसान शब्दों में टर्मिनस बताता है कि रेल की पटरी यहीं खत्म होती है, जबकि टर्मिनल बताता है कि यह एक बड़ा स्टेशन है, जहां से बहुत सारी ट्रेनें चलती हैं और यात्रियों के लिए ज्यादा सुविधाएं होती हैं.

भारतीय रेलवे में दोनों शब्द क्यों इस्तेमाल होते हैं?
भारतीय रेलवे के पास हजारों स्टेशन हैं. हर स्टेशन की भूमिका अलग होती है. कुछ स्टेशन सिर्फ बीच में पड़ाव होते हैं, कुछ जंक्शन होते हैं, कुछ टर्मिनल और कुछ टर्मिनस.रेलवे इन नामों के जरिए यात्रियों को यह संकेत देती है कि स्टेशन का संचालन किस तरह होता है.

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उदाहरण के लिए आनंद विहार टर्मिनल (दिल्ली) बड़ी संख्या में ट्रेनों का संचालन, भीड़ कम करने के लिए विकसित स्टेशन. छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (मुंबई) रेलवे लाइन का अंतिम सिरा, जहां कई ट्रेनों की यात्रा समाप्त होती है.

जंक्शन, सेंट्रल और टर्मिनल में भी होता है अंतर रेलवे स्टेशनों के नाम में कई दूसरे शब्द भी जुड़े होते हैं.

जंक्शन – जहां तीन या उससे अधिक रेलवे लाइनें मिलती हैं.
सेंट्रल– किसी बड़े शहर का प्रमुख रेलवे स्टेशन.
टर्मिनल– बड़ा स्टेशन, जहां से कई ट्रेनों का संचालन होता है.
टर्मिनस – रेलवे लाइन का अंतिम स्टेशन.

इसलिए स्टेशन के नाम में लिखा हर शब्द उसकी खास पहचान बताता है.

अगली बार जब आप आनंद विहार टर्मिनल और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस का नाम देखें, तो समझ जाइए कि दोनों एक जैसे नहीं हैं. टर्मिनस उस स्टेशन को कहते हैं जहां रेलवे लाइन समाप्त होती है और ट्रेन को वापस लौटना पड़ता है. वहीं टर्मिनल ऐसा बड़ा स्टेशन होता है जहां से बड़ी संख्या में ट्रेनों का संचालन किया जाता है और यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होती हैं. यानी दोनों शब्द रेलवे की अलग-अलग व्यवस्था और स्टेशन की अलग भूमिका को दर्शाते हैं.

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