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किराएदारों के लिए ये मीटर है बेस्ट, जानिए ये कितने रुपये का आता है?

किराए के घर में बिजली के ज्यादा बिल को लेकर अक्सर किराएदार और मकान मालिक के बीच विवाद होता है. ऐसे में सब-मीटर से कमरे या फ्लैट की बिजली खपत का अलग हिसाब रखा जा सकता है. जानिए यह मीटर कैसे काम करता है और इसकी कीमत कितनी होती है.

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सब-मीटर की कीमत उसके प्रकार, कंपनी और फीचर्स के हिसाब से अलग-अलग होती है. ( Photo: ITG)
सब-मीटर की कीमत उसके प्रकार, कंपनी और फीचर्स के हिसाब से अलग-अलग होती है. ( Photo: ITG)

अगर आप किराए के घर में रहते हैं तो बिजली का बिल हर महीने सिरदर्द बन सकता है. खासकर तब, जब मकान मालिक पूरे घर का बिल किराएदारों के बीच बांटकर देता है. ऐसी स्थिति में अक्सर यह समझना मुश्किल हो जाता है कि आखिर आपके हिस्से में कितनी बिजली खर्च हुई और कितना बिल होना चाहिए. कई बार कमरे या फ्लैट में अलग मीटर नहीं होने की वजह से किराएदार को ज्यादा पैसे भी देने पड़ सकते हैं. लेकिन अब इस परेशानी से बचने के लिए एक आसान तरीका है.

किराएदार अपने कमरे या फ्लैट की बिजली खपत को अलग से जानने के लिए सब-मीटर यानी अलग बिजली मीटर लगवा सकते हैं. यह मीटर खासतौर पर उन लोगों के लिए काम का हो सकता है जो किराए के मकान में रहते हैं और अपनी बिजली की खपत का हिसाब खुद रखना चाहते हैं.

कैसे काम करता है ये मीटर?
सब-मीटर को उस कमरे, फ्लैट या हिस्से की बिजली लाइन में लगाया जाता है, जिसकी बिजली खपत अलग से मापनी हो. इसके बाद कमरे में चलने वाले पंखे, बल्ब, टीवी, फ्रिज, कूलर, एसी या दूसरे बिजली के सामान से कितनी बिजली खर्च हुई, उसका हिसाब मीटर में दर्ज होता रहता है. मान लीजिए किसी मकान में चार किराएदार रहते हैं और पूरे घर के लिए एक ही बिजली कनेक्शन है. ऐसे में चारों का बिल बांटना मुश्किल हो सकता है. अगर हर हिस्से में अलग सब-मीटर लगा हो तो हर किराएदार की बिजली खपत अलग से देखी जा सकती है. यानी जितनी बिजली इस्तेमाल की, उसका हिसाब उतना ही साफ रहेगा.

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किरायेदारों के लिए सबसे बड़ा फायदा यह है कि उन्हें अपनी बिजली खपत का अंदाजा रहता है. अगर किसी महीने बिजली का बिल अचानक बढ़ जाता है तो मीटर देखकर पता लगाया जा सकता है कि वास्तव में कितनी यूनिट बिजली इस्तेमाल हुई. यह उन लोगों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकता है जो लंबे समय तक किराए के मकान में रहते हैं. इससे मकान मालिक और किराएदार के बीच बिजली के बिल को लेकर होने वाली बहस भी कम हो सकती है. अगर कमरे में एसी, गीजर या कूलर जैसी ज्यादा बिजली खपत करने वाली चीजें चलती हैं तो उनका असर भी मीटर की रीडिंग में दिखाई देगा.

कितने रुपये में आता है ये मीटर?
सब-मीटर की कीमत उसके प्रकार, कंपनी और फीचर्स के हिसाब से अलग-अलग होती है. बाजार में सामान्य सिंगल-फेज डिजिटल सब-मीटर करीब 1000 से 2,500 रुपये के आसपास मिल सकते हैं. वहीं बेहतर क्वालिटी, स्मार्ट फीचर या ज्यादा सुविधाओं वाले मॉडल की कीमत इससे ज्यादा भी हो सकती है. इसके अलावा मीटर लगवाने के लिए इलेक्ट्रीशियन का चार्ज अलग से देना पड़ सकता है. इसलिए खरीदने से पहले मीटर की कीमत के साथ इंस्टॉलेशन का खर्च भी पूछ लेना चाहिए.

मीटर खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
सब-मीटर खरीदते समय सिर्फ कम कीमत देखकर इसे नहीं खरीदना चाहिए. यह देखना जरूरी है कि मीटर आपकी बिजली सप्लाई के हिसाब से सही है या नहीं. साथ ही उसकी रीडिंग आसानी से दिखाई देती हो और मीटर की क्वालिटी अच्छी हो. अगर आप एसी, गीजर या दूसरे ज्यादा बिजली खपत करने वाले उपकरण चलाते हैं तो मीटर की क्षमता भी उसी हिसाब से होनी चाहिए. मीटर को खुद से लगाने के बजाय किसी योग्य इलेक्ट्रिशियन से इंस्टॉल करवाना ज्यादा सुरक्षित रहता है.

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सब-मीटर आपकी बिजली खपत का हिसाब रखने के लिए उपयोगी है, लेकिन इसे सरकारी बिजली कनेक्शन वाले आधिकारिक मीटर का विकल्प नहीं समझना चाहिए. असली बिजली कनेक्शन और बिल की व्यवस्था बिजली वितरण कंपनी के नियमों के अनुसार ही होती है. यानी किराएदारों के लिए सब-मीटर एक ऐसा आसान तरीका है, जिससे अपनी बिजली खपत का अलग हिसाब रखा जा सकता है. खासकर तब, जब एक ही मुख्य मीटर से कई कमरे या किराएदार जुड़े हों. इससे हर महीने बिजली की यूनिट को लेकर होने वाला कन्फ्यूजन काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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