scorecardresearch
 

पेड़ पर उल्टा लटक कर बिता देता है जिंदगी, जमीन पर मारा जाता है ये जानवर

दुनिया कई अनोखे और अजीबोगरीब जीव- जंतुओं से भरा पड़ा है. ऐसा ही एक अनूठा जानवर, अपनी जिंदगी का 90 प्रतिशत पेड़ पर ही काट देता है. जब कभी भी वह जमीन पर आता है तो उसकी जिंदगी खतरे में आ जाती है.

Advertisement
X
इस जानवर की जिंदगी का अधिकतर समय पेड़ पर उल्टा लटके कट जाता है (Photo - Pexels)
इस जानवर की जिंदगी का अधिकतर समय पेड़ पर उल्टा लटके कट जाता है (Photo - Pexels)

जरा सोचिए, कोई ऐसा जानवर जो अपनी जिंदगी का ज्यादातर वक्त पेड़ पर उल्टा लटककर बिताता हो. खाना खाना हो, सोना हो या आराम करना हो, वह पेड़ की डालियों पर ही रहता है. यहां तक कि उसे पेशाब या पॉटी करने के लिए भी हफ्ते में सिर्फ एक बार पेड़ से नीचे उतरना पड़ता है. लेकिन जमीन पर उतरना उसके लिए काफी जोखिम भरा होता है. 

यह जानवर है स्लॉथ, जो मध्य और दक्षिण अमेरिका के घने जंगलों में पाया जाता है. इसकी धीमी चाल और पेड़ों पर लटके रहने की आदत इसे बाकी जानवरों से अलग बनाती है. स्लॉथ की जिंदगी जितनी सुस्त दिखाई देती है, उतनी ही दिलचस्प भी है. 

यह जानवर अपने शरीर की ऊर्जा बचाने के लिए बेहद धीरे-धीरे चलता है. इसकी जिंदगी का ज्यादातर हिस्सा पेड़ों की ऊंची डालियों पर गुजरता है. लेकिन इसके पेड़ से नीचे उतरने की एक ऐसी वजह है, जो वैज्ञानिकों को भी हैरान करती है.

हफ्ते में सिर्फ एक बार करता है पॉटी
स्लॉथ की सबसे अनोखी आदतों में से एक है इसका मल त्याग करना. ज्यादातर जानवर जहां अपनी जरूरत के हिसाब से कभी भी मल त्याग कर लेते हैं, वहीं स्लॉथ आमतौर पर करीब हफ्ते में एक बार ऐसा करता है.

Advertisement

आप सोच रहे होंगे कि जब यह जानवर ज्यादातर समय पेड़ पर उल्टा लटका रहता है, तो वहीं से मल त्याग क्यों नहीं कर लेता? आखिर जमीन पर उतरने की इतनी मेहनत क्यों करता है?

दरअसल, स्लॉथ पेड़ से नीचे उतरकर उसी पेड़ के तने के पास जमीन पर मल त्याग करता है. यह सफर उसके लिए आसान नहीं होता. उसे धीरे-धीरे पेड़ से नीचे उतरना पड़ता है, जिससे वह जमीन पर मौजूद शिकारियों की नजर में आ सकता है.

यही वजह है कि स्लॉथ का जमीन पर उतरना उसके लिए जोखिम भरा हो सकता है. हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि जमीन पर आते ही वह मारा जाता है. खतरा जरूर बढ़ जाता है, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता.

आखिर क्या खाता है स्लॉथ?
स्लॉथ मुख्य रूप से शाकाहारी होता है. इसका भोजन पत्तियों, फलों और पेड़ों के रस से बनता है. पत्तियों को पचाना आसान नहीं होता, क्योंकि उनमें रेशे काफी ज्यादा होते हैं. ऐसे भोजन को पचाने के लिए स्लॉथ के शरीर में एक खास व्यवस्था होती है.

इसके पेट में कई हिस्से होते हैं, जो पत्तियों जैसे रेशेदार भोजन को पचाने में मदद करते हैं. स्लॉथ का मेटाबॉलिज्म यानी शरीर में भोजन से ऊर्जा बनाने की प्रक्रिया भी काफी धीमी होती है. इसी कारण इसे भोजन पचाने में लंबा वक्त लग सकता है.

Advertisement

इसका पेट कभी-कभी शरीर के कुल वजन का करीब 37 फीसदी तक भोजन से भरा हो सकता है. जब तक पेट में पहले खाए गए भोजन के लिए पर्याप्त जगह नहीं बनती, तब तक यह ज्यादा भोजन नहीं खा पाता. कुछ भोजन को पचने में कई दिन और कभी-कभी हफ्तों तक लग सकते हैं.

यही वजह है कि स्लॉथ दूसरे कई स्तनधारी जानवरों की तुलना में रोजाना बहुत कम भोजन करता है. उसकी धीमी चाल और कम ऊर्जा खर्च करने की आदत इसी जीवनशैली का हिस्सा हैं.

पेड़ पर ही सोना, खाना और बच्चे पैदा करना
आज की सभी स्लॉथ प्रजातियां पेड़ों पर रहने वाली स्तनधारी हैं. ये अपने लंबे और मुड़े हुए पंजों की मदद से पेड़ों की डालियों पर लटकी रहती हैं. इन्हीं पंजों के सहारे ये एक डाल से दूसरी डाल तक पहुंचती हैं.

इनकी जिंदगी का ज्यादातर हिस्सा पेड़ों पर ही गुजरता है. खाना खाना, सोना, आराम करना, संभोग करना और बच्चों को जन्म देना जैसे काम भी ये पेड़ों पर ही करती हैं.

स्लॉथ के शरीर पर भी बसती है एक अलग दुनिया
स्लॉथ के बारे में एक और दिलचस्प बात है. इसके शरीर पर मौजूद बाल सिर्फ इसे गर्म रखने का काम नहीं करते, बल्कि कई छोटे जीवों का घर भी होते हैं. इसके बालों में सूक्ष्म जीव, कीड़े, फफूंद और शैवाल यानी एल्गी तक पाए जा सकते हैं.

Advertisement

कुछ खास पतंगों का जीवन चक्र भी स्लॉथ से जुड़ा होता है.पतंगे की एक प्रजाति स्लॉथ के साथ खास संबंध रखती है. जब स्लॉथ मल त्याग करने के लिए जमीन पर उतरता है, तो मादा पतंगे उसके मल में अंडे दे देती हैं. वहां से निकले लार्वा बड़े होकर पतंगे बनते हैं. वयस्क पतंगे फिर पेड़ों की ओर लौटती हैं और स्लॉथ के बालों में पहुंचकर प्रजनन करती हैं. इस तरह यह चक्र आगे बढ़ता रहता है.

यानी स्लॉथ का जमीन पर उतरना सिर्फ उसकी अपनी जरूरत से जुड़ा मामला नहीं है. इससे कुछ दूसरे जीवों का जीवन चक्र भी जुड़ा हुआ है.

शरीर पर उगने वाली हरी काई कैसे बचाती है जान?
स्लॉथ के बालों में हरे शैवाल भी उग सकते हैं. इन शैवाल और स्लॉथ के बीच एक तरह का सहजीवी संबंध माना जाता है, यानी दोनों को इससे फायदा मिल सकता है.

स्लॉथ के बाल पानी को सोखकर लंबे समय तक अपने भीतर बनाए रख सकते हैं. इससे शैवाल को नमी और रहने की जगह मिलती है. वहीं, शैवाल से भरपूर बाल स्लॉथ के शरीर को हरा-सा रंग दे सकते हैं. इससे वह पेड़ों की पत्तियों के बीच आसानी से छिप सकता है.

जंगल में स्लॉथ के कई शिकारी होते हैं, जिनमें हार्पी ईगल, ओसेलॉट और जगुआर शामिल हैं. ये शिकारी अपने शिकार को तलाशने के लिए उसकी गतिविधियों पर भी ध्यान देते हैं. ऐसे में स्लॉथ का धीरे-धीरे चलना और पेड़ों पर लंबे समय तक स्थिर रहना उसे आसपास के माहौल में घुलने-मिलने में मदद करता है.

Advertisement

हालांकि, हरे शैवाल ही स्लॉथ की सुरक्षा का एकमात्र कारण नहीं हैं. उसका रंग, पेड़ों के बीच रहने की आदत और बहुत कम हलचल करना भी उसे छिपे रहने में मदद करते हैं.

आखिर जमीन पर उतरना क्यों है इतना जोखिम भरा?
स्लॉथ पेड़ों पर रहने के लिए अच्छी तरह अनुकूलित है. उसके लंबे पंजे डालियों पर पकड़ बनाने में मदद करते हैं, लेकिन जमीन पर वह उतनी तेजी से नहीं चल सकता. पेड़ से नीचे उतरने के बाद उसे शिकारियों के सामने आने का खतरा रहता है. यही वजह है कि वह जमीन पर कम ही आता है.

उसकी धीमी जीवनशैली, कम ऊर्जा खर्च करने वाला शरीर और पत्तियों को पचाने की खास व्यवस्था उसे जंगल में जीने में मदद करती है. वहीं, उसके शरीर पर रहने वाले शैवाल और पतंगों जैसे जीवों के साथ उसका रिश्ता प्रकृति की एक अलग ही कहानी बताता है.

यह भी पढ़ें: स्पर्म व्हेल... जिसके होते हैं काफी बड़े दांत, अगर टकरा जाए तो पलट जाती है नाव

कुल मिलाकर, स्लॉथ ऐसा जानवर है जिसकी जिंदगी का हर हिस्सा पेड़ों के आसपास घूमता है. वह वहां खाना खाता है, सोता है और अपना परिवार बढ़ाता है. लेकिन जब उसे जमीन पर उतरना पड़ता है, तो उसकी यही धीमी चाल उसके लिए खतरा बन सकती है. प्रकृति में जीवों के जीने का तरीका कितना अनोखा हो सकता है, स्लॉथ इसका शानदार उदाहरण है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement