दुनिया में एक ऐसी भी जगह है, जहां जाने के बाद दोबारा लौटकर आना मुश्किल है. वहां जो भी गया, वहां जो भी गया, वो जिंदा बचकर नहीं लौट सका. दुनिया की यह सबसे खतरनाक जगह कहीं और नहीं, भारत में ही है. यह जगह है समुद्र के बीच घने जंगलों से घिरा उत्तरी सेंटिनल द्वीप.
उत्तरी सेंटीनल द्वीप पर आजतक जिन लोगों ने भी जाने की कोशिश की, वो जिंदा नहीं बच पाए. अंडमान-निकोबार के नॉर्थ सेंटीनल द्वीप पर दुनिया के सबसे अलग-थलग लोग रहते हैं. ये सेंटेनलीज आदिवासी हैं. इन आदिवासियों का आजतक आधुनिक दुनिया से संपर्क नहीं हो पाया है.
यहां रहने वाली सेंटिनली जनजाति आज भी शिकार करके अपना पेट पालते हैं. इनका धनुष और बाण का इस्तेमाल करके घुसपैठियों को खदेड़ने का लंबा इतिहास रहा है. उत्तरी सेंटिनल द्वीप के सेंटेनली लोग बाहरी दुनिया से संपर्क रखने से बचते रहे हैं. स्थानीय प्रशासन भी इन लोगों को संरक्षित करने के लिए इस द्वीप के चारों ओर 5 किलोमीटर के क्षेत्र को प्रतिबंधित कर रखा है.
द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, 2004 की सुनामी के बाद, सेंटिनलीज की खैरियत जानने के लिए जब हेलीकॉप्टरों भेजे गए तो उन आदिवासियों ने उन पर भी तीर चलाया था. उस द्वीप पर आजतक जो भी लोग गए, उन्हें सेंटेनलीज आदिवासियों ने तीर से छलनी कर दिया.
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, एक मिशनरी ने कुछ साल पहले उन आदिवासियों से चोरी- चुपके संपर्क करने की कोशिश की. लेकिन, द्वीप पर उतरते ही चाऊ नाम के मिशनरी पर तीरों की बौछार शुरू हो गई. जिन कबीले के लोगों ने उसकी हत्या की, उन पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता क्योंकि उनसे संपर्क करना गैरकानूनी है. वेलोग एक संरक्षित जनजाति हैं.
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इस समुदाय को बचाने के लिए ही नॉर्थ सेंटिनल आईलैंड पर लोगों का जाना प्रतिबंधित कर दिया गया है. क्योंकि, बाकी दुनिया की तरह उनलोगों में नॉर्मल फ्लू को झेल पाने लायक भी इम्युनिटी डेवलप नहीं हो पाई है. साथ ही बाहरी लोगों के घुसपैठ के डर से उनकी आक्रामकता इस द्वीप को आम इंसानों के लिए खतरनाक बना देते हैं.