रेलवे स्टेशन पर आपने कई जगह मोटे-मोटे पाइप लगे हुए देखे होंगे. इन पाइपों का इस्तेमाल स्टेशन और ट्रेनों से जुड़े अलग-अलग कामों के लिए पानी पहुंचाने में किया जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इन पाइपों में पानी आता कहां से है? दरअसल, रेलवे स्टेशनों पर पानी की सप्लाई के लिए एक पूरा सिस्टम काम करता है. हर स्टेशन पर पानी का सोर्स एक जैसा नहीं होता. कई जगह पानी स्थानीय जलापूर्ति व्यवस्था से आता है, जबकि कुछ स्टेशनों पर रेलवे अपने ट्यूबवेल या दूसरे जल स्रोतों का इस्तेमाल करता है.
पहले पहुंचता है पानी स्टोरेज टैंक में
स्टेशन पर आने वाले पानी को सीधे हर जगह इस्तेमाल नहीं किया जाता. आमतौर पर पानी को पहले बड़े स्टोरेज टैंक में जमा किया जाता है. इन टैंकों को स्टेशन की जरूरत के हिसाब से ऊंचाई पर भी बनाया जाता है. इसके बाद पाइपों के नेटवर्क के जरिए पानी को प्लेटफॉर्म, टॉयलेट, रेलवे कर्मचारियों के क्वार्टर और दूसरी जगहों तक पहुंचाया जाता है.
ट्रेन में भी इसी सिस्टम से जाता है पानी
रेलवे स्टेशनों पर लगे कुछ खास पाइपों का इस्तेमाल खड़ी ट्रेनों में पानी भरने के लिए भी किया जाता है. ट्रेन के कोच में पानी की टंकियां होती हैं. स्टेशन पर ट्रेन के रुकने के दौरान पाइप को कोच के वाटर इनलेट से जोड़ा जाता है और टंकी में पानी भरा जाता है. इसी वजह से कई बार प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन के नीचे या किनारे मोटे पाइप जुड़े हुए दिखाई देते हैं.
पानी का असली सोर्स क्या होता है?
यह स्टेशन की जगह और वहां उपलब्ध जल व्यवस्था पर निर्भर करता है. किसी स्टेशन पर नगर निगम या स्थानीय जल आपूर्ति से पानी मिल सकता है, तो किसी जगह भूजल या दूसरे स्थानीय स्रोतों से पानी लिया जाता है. इसके बाद जरूरत के मुताबिक इसे स्टोरेज टैंक और पंपिंग सिस्टम के जरिए अलग-अलग जगहों तक पहुंचाया जाता है. यानी प्लेटफॉर्म पर दिखने वाला पाइप खुद पानी का सोर्स नहीं होता. वह सिर्फ पानी को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने वाले पूरे सिस्टम का हिस्सा होता है.
आखिर क्यों जरूरी है यह सिस्टम?
रेलवे स्टेशन पर हर दिन बड़ी संख्या में यात्री आते-जाते हैं. इसके अलावा ट्रेनों में भी पानी की जरूरत होती है. ऐसे में लगातार और पर्याप्त पानी की सप्लाई बनाए रखने के लिए टैंक, पंप और पाइप का पूरा नेटवर्क काम करता है. तो अगली बार स्टेशन पर ऐसे पाइप दिखें, तो समझ जाइए कि इनके पीछे सिर्फ एक पाइप नहीं, बल्कि पानी को स्टोर करने और अलग-अलग जगह पहुंचाने का पूरा सिस्टम काम कर रहा है.