दुबई में न कोई बड़ी नदी है और न ही मीठे पानी का कोई बड़ा प्राकृतिक स्रोत, फिर भी यहां लाखों लोगों के घरों, होटलों और गगनचुंबी इमारतों तक हर दिन पानी पहुंचता है. सवाल है कि आखिर ये पानी आता कहां से है? इसका जवाब है समुद्र.
दुबई की पानी की जरूरत का बड़ा हिस्सा समुद्र के खारे पानी को साफ करके पूरा किया जाता है. दुबई इलेक्ट्रिसिटी एंड वॉटर अथॉरिटी यानी DEWA के मुताबिक, शहर में समुद्री पानी को डिसेलिनेशन प्लांट में ले जाकर पीने लायक बनाया जाता है. इसके लिए सी वॉटर रिवर्स ऑस्मोसिस यानी SWRO जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस प्रक्रिया में समुद्री पानी को खास मेम्ब्रेन से गुजारा जाता है, जो नमक और दूसरी अशुद्धियों को अलग कर देती हैं.
DEWA की 2025 सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक, उस साल के अंत तक दुबई में डिसेलिनेटेड पानी बनाने की स्थापित क्षमता 495 मिलियन इम्पीरियल गैलन प्रतिदिन थी. 2025 में DEWA ने कुल 158,359 मिलियन इम्पीरियल गैलन डिसेलिनेटेड पानी का प्रोडक्शन किया. इसी साल 25 अगस्त को पानी की रोजाना मांग 487 मिलियन इम्पीरियल गैलन तक पहुंच गई थी.
समुद्र के पानी को कैसे बनाते हैं पीने लायक?
समुद्री पानी में बड़ी मात्रा में नमक और घुले हुए खनिज होते हैं. रिवर्स ऑस्मोसिस तकनीक में पानी को बहुत ज्यादा दबाव के साथ बेहद महीन मेम्ब्रेन से गुजारा जाता है. मेम्ब्रेन नमक और कई अशुद्धियों को रोक देती है, जबकि पानी आगे निकल जाता है. इसके बाद पानी की गुणवत्ता की जांच कर उसे सप्लाई नेटवर्क में भेजा जाता है.
DEWA के मुताबिक, उसके द्वारा तैयार, ट्रांसमिट और सप्लाई किया जाने वाला पीने का पानी विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO की लेटेस्ट ड्रिंकिंग वॉटर क्वालिटी गाइडलाइंस के अनुरूप है.
क्या दुबई में भूजल बिल्कुल नहीं है?
ऐसा नहीं है. दुबई में भूजल के कुएं भी मौजूद हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से आपातकाल और जरूरत के समय के लिए किया जाता है. DEWA के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में इन कुओं से औसतन सिर्फ 1.155 मिलियन इम्पीरियल गैलन प्रतिदिन पानी निकाला गया. इसके मुकाबले डिसेलिनेटेड पानी का उत्पादन सैकड़ों मिलियन इम्पीरियल गैलन प्रतिदिन रहा.
दुनिया के बड़े डिसेलिनेशन प्लांट में से एक दुबई में
DEWA के मुताबिक, जेबेल अली पावर एंड डिसेलिनेशन कॉम्प्लेक्स को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने दुनिया की सबसे बड़ी सिंगल-साइट वॉटर डिसेलिनेशन फैसिलिटी के रूप में मान्यता दी है. इसकी उत्पादन क्षमता 490 मिलियन इम्पीरियल गैलन प्रतिदिन बताई गई है. वहीं हस्यान में 180 मिलियन इम्पीरियल गैलन प्रतिदिन क्षमता वाला एक बड़ा सी वॉटर रिवर्स ऑस्मोसिस प्रोजेक्ट विकसित किया जा रहा है.
यानी दुबई में पानी का सबसे बड़ा राज किसी छिपी हुई नदी या झील में नहीं, बल्कि समुद्र के खारे पानी को आधुनिक तकनीक से मीठा और पीने लायक बनाने में है.