27 जुलाई 1949 को दुनिया के पहले जेट-चालित कमर्शियल विमान , ब्रिटिश डी हैविलैंड कॉमेट ने इंग्लैंड में अपनी पहली उड़ान भरी. इसके साथ ही जेट इंजन ने विमानन उद्योग में क्रांति ला दी. इससे विमानों को तेजी से ऊपर चढ़ने और अधिक ऊंचाई तक उड़ने में सक्षम बनाकर हवाई यात्रा का समय आधा कर दिया गया.
कॉमेट विमान अंग्रेज विमान डिजाइनर और विमानन क्षेत्र के अग्रणी सर जेफ्री डी हैविलैंड (1882-1965) की रचना थी. डी हैविलैंड ने शुरुआत में मोटरसाइकिल और बसें डिजाइन कीं, लेकिन 1908 में विल्बर राइट को एक विमान का प्रदर्शन करते देखने के बाद, उन्होंने अपना खुद का विमान बनाने का फैसला किया.
राइट बंधुओं ने 1903 में उत्तरी कैरोलिना के किटी हॉक में अपनी प्रसिद्ध पहली उड़ान भरी थी. डी हैविलैंड ने 1910 में सफलतापूर्वक अपने पहले विमान का डिजाइन तैयार किया और उसे उड़ाया. इसके बाद उन्होंने अंग्रेजी विमान निर्माताओं के लिए काम किया और 1920 में अपनी खुद की कंपनी शुरू की. डी हैविलैंड एयरक्राफ्ट कंपनी विमानन उद्योग में एक अग्रणी कंपनी बन गई, जो हल्के इंजन और तेज, अधिक सुव्यवस्थित विमानों के विकास के लिए जानी जाती थी.
1939 में, जर्मनी में एक प्रायोगिक जेट-चालित विमान का उद्घाटन हुआ. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान , जर्मनी जेट लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करने वाला पहला देश था. डी हैविलैंड ने युद्ध के वर्षों के दौरान लड़ाकू विमानों का डिजाइन भी तैयार किया. विमानन में उनके योगदान के लिए उन्हें 1944 में नाइट की उपाधि से सम्मानित किया गया.
युद्ध के बाद डी हैविलैंड ने अपना ध्यान कमर्शियल जेट विमानों पर फोकस किया और कॉमेट और घोस्ट जेट इंजन विकसित किए. जुलाई 1949 में अपनी परीक्षण उड़ान के बाद, कॉमेट ने तीन और वर्षों तक टेस्ट और ट्रेनिंग उड़ानें भरीं. फिर, 2 मई 1952 को, ब्रिटिश ओवरसीज एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (बीओएसी) ने 44 सीटों वाले कॉमेट 1ए के साथ दुनिया की पहली कमर्शियल जेट सेवा शुरू की, जो लंदन से जोहान्सबर्ग तक यात्रियों को ले जाती थी.