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फ्लाइट के बाद बैग नहीं आया या टूटा मिला? जानिए एयरपोर्ट से निकलने से पहले क्या करें

फ्लाइट से उतरने के बाद अगर आपका बैग कन्वेयर बेल्ट पर नहीं आता है तो घबराने के बजाय तुरंत कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए. एयरपोर्ट से बाहर निकलने से पहले सामान की शिकायत दर्ज कराएं, पीआईआर नंबर संभालकर रखें और जरूरी खरीदारी की रसीद सुरक्षित रखें.

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जानिए बैग गुम होने पर क्लेम और मुआवजे से जुड़ी जरूरी बातें. ( Photo: ITG)
जानिए बैग गुम होने पर क्लेम और मुआवजे से जुड़ी जरूरी बातें. ( Photo: ITG)

सोचिए, लंबी फ्लाइट के बाद आप एयरपोर्ट पहुंचते हैं. कन्वेयर बेल्ट पर बाकी सभी यात्रियों के बैग आते जा रहे हैं, लेकिन आपका बैग नहीं दिख रहा. आप काफी देर तक इंतजार करते हैं, फिर भी सामान नहीं आता. ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है. आपको तुरंत कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए. सबसे जरूरी बात यह है कि एयरपोर्ट से बाहर निकलने से पहले अपने सामान की शिकायत जरूर दर्ज कराएं. इसके लिए एयरलाइन के बैगेज सर्विस डेस्क पर जाएं और अपना बैग नहीं मिलने की जानकारी दें.

सबसे पहले PIR जरूर बनवाएं
अगर आपका चेक-इन बैगेज कन्वेयर बेल्ट पर नहीं आया है, तो एयरपोर्ट के बैगेज सर्विस डेस्क पर जाएं और शिकायत दर्ज कराएं. आमतौर पर एयरलाइन इस तरह की शिकायत के लिए प्रॉपर्टी इरेग्यूलेरिटी रिपोर्ट यानी PIR दर्ज करती है. इसमें आपके सामान के नहीं मिलने की जानकारी दर्ज होती है और आपको एक रेफरेंस नंबर दिया जाता है.

इस रिपोर्ट को संभालकर रखें. आगे बैग को ट्रैक करने, एयरलाइन से संपर्क करने या लागू नियमों के तहत क्लेम करने में यह दस्तावेज काम आ सकता है. इसलिए सिर्फ यह सोचकर एयरपोर्ट से बाहर न निकलें कि एयरलाइन बाद में बैग घर पहुंचा देगी. पहले अपनी शिकायत दर्ज कराना ज्यादा सुरक्षित है.

बैग मिल गया, लेकिन टूटा हुआ है तो?
कई बार ऐसी स्थिति भी आती है कि बैग कन्वेयर बेल्ट पर तो मिल जाता है, लेकिन उसकी हालत पहले जैसी नहीं होती. जैसे बैग का पहिया निकल गया हो, हैंडल टूट गया हो, जिप खराब हो गई हो या बैग का कोई हिस्सा फट गया हो. ऐसे मामले में भी यात्री को इसे सामान्य बात समझकर एयरपोर्ट से निकलने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. सबसे पहले एयरलाइन के बैगेज सर्विस डेस्क पर जाकर डैमेज्ड बैगेज की शिकायत दर्ज करानी चाहिए. एयरलाइन को दिखाएं कि बैग किस हालत में मिला है और शिकायत का रिकॉर्ड या रेफरेंस नंबर जरूर लें.

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अगर संभव हो तो बैग की तुरंत फोटो और वीडियो भी बना लें. खासकर टूटे हुए पहिए, हैंडल, जिप या फटे हुए हिस्से की साफ तस्वीर रखें. बैगेज टैग की फोटो भी साथ में रख लें. ये चीजें बाद में शिकायत या क्लेम की प्रक्रिया में काम आ सकती हैं.

पहिया निकल गया तो क्या एयरलाइन पैसे देगी?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि नुकसान किस तरह का है और एयरलाइन की लागू शर्तें क्या हैं. सामान्य इस्तेमाल से होने वाली मामूली टूट-फूट और एयरलाइन की जिम्मेदारी के दौरान हुए नुकसान के बीच अंतर किया जा सकता है. इसलिए सिर्फ पहिया निकल जाने का मतलब यह नहीं है कि हर मामले में एक तय रकम मिल जाएगी. अगर आपको लगता है कि बैग एयरलाइन के पास चेक-इन होने के बाद क्षतिग्रस्त हुआ है, तो एयरपोर्ट पर ही इसकी रिपोर्ट करना सबसे जरूरी कदम है. एयरलाइन मामले की जांच और अपनी लागू पॉलिसी के आधार पर आगे की प्रक्रिया बता सकती है.

जरूरी सामान खरीद सकते हैं
अगर आप किसी दूसरे शहर या देश की यात्रा पर गए हैं और आपका सामान समय पर नहीं पहुंचा है, तो आपको कुछ जरूरी चीजें खरीदने की जरूरत पड़ सकती है. जैसे कपड़े, टूथब्रश, टूथपेस्ट और रोजमर्रा की जरूरी चीजें. ऐसे में हर खरीदारी की रसीद संभालकर रखें. बाद में एयरलाइन की लागू पॉलिसी या नियमों के तहत खर्च के रिंबर्समेंट का दावा करते समय ये रसीदें काम आ सकती हैं. हालांकि, हर चीज का खर्च अपने आप वापस मिल जाएगा, ऐसा मानकर महंगी खरीदारी न करें. केवल जरूरी सामान खरीदना और एयरलाइन की शर्तों को पहले देखना बेहतर है.

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बैग कब माना जाता है 'लॉस्ट'?
किसी बैग के लंबे समय तक नहीं मिलने पर लागू नियमों के अनुसार उसे खोया हुआ माना जा सकता है. इंटरनेशनल फ्लाइट में 21 दिन की अवधि एक महत्वपूर्ण सीमा है, जिसके बाद सामान को लेकर अलग तरह की क्लेम प्रक्रिया लागू हो सकती है. इसका मतलब यह नहीं है कि फ्लाइट के तुरंत बाद बैग नहीं मिला तो वह हमेशा के लिए खो गया. कई मामलों में एयरलाइन बाद में सामान खोजकर यात्री तक पहुंचाती है.

मुआवजे की भी होती है सीमा
सामान खोने या खराब होने की स्थिति में यात्री को मुआवजा मिल सकता है, लेकिन इसकी रकम हर मामले में एक जैसी नहीं होती. भारत में डोमेस्टिक फ्लाइट के लिए लागू नियमों के तहत बैगेज के नुकसान, देरी या खराब होने पर एयरलाइन की देनदारी और मुआवजे की सीमा तय होती है. वहीं इंटरनेशनल फ्लाइट में मॉन्ट्रियल कन्वेंशन 1999 यानी MC99 के तहत अलग सीमा लागू हो सकती है. इसलिए सोशल मीडिया पर बताई गई किसी एक तय रकम को हर यात्री के लिए पक्का मुआवजा समझना सही नहीं है.

यात्रा डोमेस्टिक है या इंटरनेशनल , बैगेज किस तरह का है और उस समय कौन-से नियम लागू हैं, इन बातों के आधार पर मामला तय हो सकता है. मॉन्ट्रियल कन्वेंशन एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जो हवाई यात्रा के दौरान यात्रियों की मृत्यु, शारीरिक चोट, सामान के खोने या क्षतिग्रस्त होने और उड़ानों में देरी जैसी स्थितियों में एयरलाइंस की जवाबदेही और मुआवजे से जुड़े नियम तय करती है.

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बैग चेक-इन करने से पहले कर लें ये छोटा काम
सामान चेक-इन करने से पहले अपने बैग की एक फोटो जरूर खींच लें. बैग का बाहर का हिस्सा, उसका रंग, कोई खास पहचान और बैगेज टैग की फोटो फोन में रख लें. इससे बैग की पहचान बताने में आसानी हो सकती है. अगर बैग देखने में दूसरे यात्रियों के बैग जैसा है, तो फोटो और भी ज्यादा काम आ सकती है. बैगेज टैग की फोटो भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें आपके सामान से जुड़ी जानकारी होती है.

एयरपोर्ट पर ये गलती न करें
फ्लाइट से उतरने के बाद अगर बैग नहीं मिलता है तो चुपचाप घर न जाएं. पहले एयरलाइन के बैगेज डेस्क पर शिकायत करें और पीआईआर नंबर जरूर लें. अगर बैग मिल गया लेकिन उसका पहिया निकल गया, हैंडल टूट गया, जिप खराब है या बैग फटा हुआ है, तो इसकी भी तुरंत शिकायत करें और नुकसान की फोटो-वीडियो बना लें. जरूरी सामान खरीदना पड़े तो उसकी मूल रसीद संभालकर रखें. यानी बैग गायब हो, देर से मिले या टूटा-फूटा मिले, तीनों ही स्थिति में एयरपोर्ट पर ही एयरलाइन को जानकारी देना और शिकायत का रिकॉर्ड रखना सबसे जरूरी है. इससे सामान वापस पाने या लागू नियमों के तहत क्लेम की प्रक्रिया में मदद मिल सकती है.

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