धर्मनगरी हरिद्वार के ज्वालापुर स्थित श्रीजी वाटिका में रविवार को ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ (One Nation-One Election) के मुद्दे पर संत समाज का एक भव्य सम्मेलन आयोजित किया गया. ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव जनजागरण अभियान समिति, उत्तराखंड’ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देश भर के विभिन्न अखाड़ों, मठों और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े संत-महात्माओं ने शिरकत की.
इस सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और योग गुरु स्वामी रामदेव प्रमुख रूप से शामिल हुए. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश में लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने के प्रस्ताव पर संत समाज के सुझाव लेना और सुशासन, विकास तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था पर इसके प्रभावों पर जनजागरण फैलाना था.
सम्मेलन को संबोधित करते हुए योग गुरु स्वामी रामदेव ने 'वन नेशन-वन इलेक्शन' का पुरजोर समर्थन किया. जब उनसे आंदोलन के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा आंदोलन देश की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाना है.
बाबा रामदेव ने कहा, "देश में 25 से 30 प्रतिशत गुरुजनों का समय चुनाव कराने में ही चला जाता है और फिर लोग कहते हैं कि पढ़ाई नहीं हो रही. 'वन नेशन-वन इलेक्शन' से यह समस्या दूर होगी."
रामदेव ने 'वन नेशन-वन एजुकेशन' की वकालत करते हुए कहा कि शिक्षा प्रणाली में 'इंडियन नॉलेज सिस्टम' (भारतीय ज्ञान परंपरा) का समावेश होना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश में जो अंग्रेजी शिक्षा, भाषा और चिकित्सा की गुलामी चल रही है, उसे खत्म कर अपनी संस्कृति और स्वाभिमान को बढ़ाना ही सबसे बड़ा आंदोलन होगा.
सामाजिक सम्मान और राष्ट्रभक्ति का दिया संदेश
स्वामी रामदेव ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का वोटर बेहद जागरूक है और उसे पता है कि केंद्र और राज्य में किसे चुनना है. उन्होंने वंदे मातरम् को भारत माता के प्रति सम्मान और समर्पण की अभिव्यक्ति बताया.
इसके अलावा, जाति व वर्ग के आधार पर भेदभाव पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि एससी-एसटी (SC/ST) का अपमान अगर संविधान का अपमान है, तो किसी ब्राह्मण का अपमान भी बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए. समाज के हर वर्ग को एक-दूसरे का सम्मान करते हुए सामाजिक एकता बनाए रखनी होगी.