कई सैलरीड एम्प्लाई अक्सर सोचते हैं कि अपने पैसे को निवेश करने के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में ही रहने दें या फिर शेयर बाजार में निवेश करें? दोनों ही मनी जनरेट करने में मदद करते हैं, लेकिन उनके वर्कसिस्टम और रास्ते अलग-अलग हैं.
EPF का उद्देश्य कर्मचारियों को रिटायरमेंट के लिए नियमित रूप से बचत करने और एक सुरक्षित फंड बनाने में मदद करना है. दूसरी ओर, शेयर बाजार का रिटर्न बाजार के प्रदर्शन से जुड़ा होता है. लंबी अवधि में, ये ईपीएफ की तुलना में अधिक रिटर्न दे सकते हैं, लेकिन इनमें रिस्क भी अधिक होता है.
EPFO ने अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो में EPF और शेयर बाजार के बीच के अंतर को उजागर करते हुए यह बताया है कि रिटायरमेंट के लिए ईपीएफ एक महत्वपूर्ण योजना क्यों है?
EPF vs शेयर बाजार
1. ईपीएफओ का कहना है कि जिन संस्थानों में ईपीएफ अधिनियम लागू होता है और जिनकी सैलरी 15000 रुपये की सैलरी लिमिट है, उन संस्थानों के कर्मचारियों के लिए EPF अकाउंट होना अनिवार्य है. ईपीएफ अकाउंट से पैसा सिर्फ तय उददेश्यों के लिए ही निकाला जा सकता है. दूसरी ओर, शेयर बाजार में निवेश पूरी तरह आपकी इच्छा पर निर्भर करता है और इसमें निवेशक किसी भी समय अमाउंट निकाल सकते हैं.
2. निवेश के तरीके
EPFO का कहना है कि ईपीएफ स्कीम के तहत कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का कंट्रीब्यूशन होता है. वहीं शेयर बाजार में निवेश पूरी तरह से निवेशक के पैसे से होता है. नियोक्ता का अनिवार्य ईपीएफ सदस्य को एक्स्ट्रा और तय लाभ देता है. दूसरी ओर, शेयर बाजार में निवेश करने वालों को किसी से भी ऐसा कोई एक्स्ट्रा योगदान नहीं मिलता है.
3. कौन ज्यादा स्टेबल?
EPFO का कहना है कि इसमें मंथली कंट्रीब्यूशन अनिवार्य है, इसलिए यह इसके सदस्यों के लिए अनिवार्य सेविंग है. वहीं शेयर बाजार में निवेश पूरी तरह से आपकी इच्छा र है. ईपीएओ अकाउंट होल्डर्स को सरकार द्वारा घोषित स्थिर दर पर ब्याज हासिल करने में मदद करता है. हालांकि, ईपीएफो का कहना है कि शेयर बाजार में ज्यादा रिटर्न रिस्क भरा होता है और मार्केट के परफॉर्मेंशन पर निर्भर करता है.
4. टैक्स बेनिफिट्स, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा
ईपीएफओ के अनुसार, ईपीएफ में योगदान, ब्याज और निकासी टैक्स फ्री है. हालांकि, शेयर बेचकर लाभ कमाने पर कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है. EPFO पेंशन और बीमा के लाभ भी देता है. पात्र कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत भी लाभ हासिल कर सकते हैं. इसके अलावा, कर्मचारी जमा से जुड़ी बीमा योजना (EDLI) भी लागू नियमों के तहत बीमा लाभ मिलता है. जबकि, शेयर बाजार में केवल निवेश ट्रांसफर होता है. ईपीएफओ के अनुसार, शेयर बाजार में सामाजिक सुरक्षा लाभ उपलब्ध नहीं हैं.
5. रिटायरमेंट के लिए स्थिरता
EPFO का संचालन और विनियमन केंद्र सरकार की ओर से किया जाता है, जबकि शेयर बाजार नियामकों के अधीन होने के बावजूद यह रिस्क से फ्री नहीं है. EPFO लॉन्गटर्म में एक स्थिर, सुरक्षित और विश्वसनीय फंड तैयार करता है. दूसरी ओर, शेयर बाजार में रिटर्न अनिश्चित बना रहता है.
6. अलग-अलग उद्देश्य
ईपीएफओ का दावा है कि ईपीएफ सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की निश्चितता प्रदान करता है, जबकि शेयर बाजार में निवेश जोखिम उठाने की क्षमता पर आधारित होता है.