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PNB घोटालाः नीरव मोदी ने की थी दूसरे देश की नागरिकता पाने की कोशिश

पीएनबी बैंक घोटाले के मुख्य आरोपी नीरव मोदी को शायद अपने घोटाला का अंदेशा हो गया था इसीलिए उसने पिछले साल नवंबर में ही दूसरे देश की नागरिकता की कोशिश में जुट गया था, लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली.

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नीरव मोदी (फाइल)
नीरव मोदी (फाइल)

पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में 13,600 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मुख्य आरोपी और हीरे-जवाहरत के कारोबारी नीरव मोदी भारत से भागने से पहले ही वह दूसरे देश की नागरिकता लेने की कोशिशों में जुट गया था.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के अनुसार यह जानकारी सामने आई कि नीरव भारत के अलावा किसी अन्य देश की नागरिकता लेने की कोशिश में लगा हुआ था. बैंक घोटाले का खुलासा होने से करीब 3-4 महीने पहले ही नीरव ने वनुआतु द्वीप की नागरिकता लेने की कोशिश की थी.

नागिरकता हासिल करने के लिए ने नवंबर 2017 में अपने आवेदन के साथ 1,95,000 डॉलर (करीब 1.40 करोड़ रुपये) की रकम भी वनुआतु के एक एजेंट के पास भेजी थी. इस राशि को भेजने के लिए नीरव ने निजी बैंक की इस्तेमाल किया था.

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जिस एजेंट के पास यह रकम भेजी गई वो वनुआतु के 18 अधिकृत एजेंटों में से एक था, जो दूसरे देशों के नागरिकों को अपने देश की नागरिकता दिलाने का इंतजाम करते हैं. एजेंट को कमीशन देने के बाद वहां की सरकार ने नीरव मोदी की खुफिया जांच की.

जांच में के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकलने पर वनुआतु सरकार ने उसे अपने यहां की नागरिकता प्रदान करने के आवदेन को अस्वीकार कर दिया था. उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में स्थित और दक्षिणी प्रशांत महासागर के कुछ द्वीपों को मिलाकर बना यह देश दुनिया के उन देशों में शुमार होता है, जहां एक निश्चित रकम का निवेश कर नागरिकता हासिल की जा सकती है.

इस तरह के निवेशकों को दोहरी नागरिकता की सुविधा भी दी जाती है. हीरा कारोबारी नीरव मोदी भी दोहरी नागरिकता के प्रवधान का फायदा उठाना चाहा इसलिए वनुआतु की नागरिकता हासिल करनी चाही थी. हालांकि उसे अपने मकसद में कामयाबी नहीं मिली थी.

इससे पहले नीरव मोदी के ने पीएनबी घोटाले के खुलासे से पहले ही पिछले साल नवंबर में कैरिबियाई द्वीप एंटीगुआ की नागरिकता हासिल कर ली थी. हालांकि इस बात का खुलासा जुलाई में एंटीगुआ की सरकार ने किया था.

भारतीय मीडिया में मेहुल चोकसी के अमेरिका से एंटीगुआ जाने की खबर आने के बाद एंटीगुआ एंड बारबुडा के सिटीजन बाइ इनवेस्टमेंट यूनिट (CIU) ने एक बयान में कहा, 'गहन जांच के बाद मेहुल चोकसी को रजिस्ट्रेशन के द्वारा नवंबर, 2017 में नागरिकता दे दी गई थी. जांच में चोकसी के खि‍लाफ कुछ भी गलत नहीं पाया गया था.'

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