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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कैशलेस की ओर बढ़ रहे लोगों के कदम

ई-वालेट में 22 लाख प्रतिदिन से बढ़कर 75 लाख प्रतिदिन ट्रांजेक्शन तक हो गई है. इस कार्ड के जरिए लेनदेन की रकम 88 करोड़ प्रतिदिन से बढ़कर 293 करोड़ प्रतिदिन का आंकड़ा पार कर गई है, पेटीएम को चुनौती देने वाली वैसी ही सरकारी सेवा यूपीआई ने भी लंबी छलांग लगाई है

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कैशलेस की ओर लोगों का झुकाव !
कैशलेस की ओर लोगों का झुकाव !

नोटबंदी से हो रही परेशानियों के बीच केंद्र सरकार अब कैशलेस व्यवस्था का ज्यादा प्रचार कर रही है. केंद्र 50 दिनों का आकड़ा लेकर डिजिटल इंडिया का गुणगान कर रही है, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के मुताबिक देश की जनता पहले नई तकनीक को देखती है फिर उसे अपनाती है, डिजिटल की ओर देश का रुझान काफी तेजी से बढ़ रहा है. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक यूएसएसडी के तहत 8 नवंबर से पहले रोजाना औसतन 97 ट्रांजेक्शन होते थे लेकिन 26 दिसंबर तक इसमें 4844 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और अब ये संख्या 4796 कर पहुंच गई है. लेनदेन की कुल राशि भी एक लाख प्रतिदिन से बढ़कर 57 लाख रुपये प्रतिदिन तक हो गई है.


वहीं रूपे कार्ड के जरिए ट्रांजेक्शन में भी 8 नवंबर से 26 दिसंबर के बीच 3 लाख 85 हजार ट्रांजेक्शन के मुकाबले 21 लाख ट्रांजेक्शन प्रतिदिन का इजाफा हुआ है. में 22 लाख प्रतिदिन से बढ़कर 75 लाख प्रतिदिन ट्रांजेक्शन तक हो गई है. इस कार्ड के जरिए लेनदेन की रकम 88 करोड़ प्रतिदिन से बढ़कर 293 करोड़ प्रतिदिन का आंकड़ा पार कर गई है, पेटीएम को चुनौती देने वाली वैसी ही सरकारी सेवा यूपीआई ने भी लंबी छलांग लगाई है. 8 नवंबर के पहले तक इसके जरिए रोजाना होते थे जो अब बढ़कर 76 हजार 681 ट्रांजेक्शन रोजाना हो गए हैं, रकम की बात करें तो 1.93 करोड़ रुपये से बढ़कर ये अब 35 करोड़ रुपये रोजाना हो गई है यानी 1692 फीसदी का इजाफा.

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कुल मिलाकर मजबूरी में ही सही जनता ज्यादा पारदर्शी और कैशलेस लेनदेन की ओर आगे तो बढ़ रही है, ये अलग बात है कि इंटरनेट की धीमी रफ्तार, अनुपलब्धता और डिजिटल सिस्टम का कम ज्ञान होने के बावजूद स्मार्ट फोन के इस्तेमाल की तरह ही टोह-टाह कर लोग इस राह पर आगे बढ़ रहे हैं.

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