मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है. इस संकट को देखते हुए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने आम लोगों और सरकारों के लिए कई अहम सुझाव दिए हैं, ताकि तेल की कमी और महंगाई के असर को कम किया जा सके. एजेंसी ने कारपूलिंग बढ़ाने, हवाई यात्रा कम करने और सड़कों पर गति सीमा घटाने जैसे कदम सुझाए हैं.
IEA की रिपोर्ट के मुताबिक हाईवे पर स्पीड लिमिट कम से कम 10 किलोमीटर प्रति घंटा घटाने से ईंधन की खपत में कमी लाई जा सकती है. इसके अलावा जहां संभव हो, वहां हवाई यात्रा से बचने और अन्य विकल्प अपनाने की सलाह दी गई है. एजेंसी ने इलेक्ट्रिक कुकिंग अपनाने और ज्यादा से ज्यादा कार शेयरिंग को बढ़ावा देने की भी बात कही है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि मिडिल ईस्ट के युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में अब तक का सबसे बड़ा व्यवधान उत्पन्न हुआ है. खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से तेल आपूर्ति लगभग ठप हो गई है. यह जलमार्ग दुनिया के कुल तेल उपभोग का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है.
मिडिल ईस्ट युद्ध से वैश्विक तेल संकट गहराया
आमतौर पर इस मार्ग से हर दिन लगभग 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल और तेल उत्पाद गुजरते हैं. लेकिन मौजूदा हालात में इस आपूर्ति में भारी कमी आई है. इसके चलते वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता कम हो गई है और कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है.
तेल के साथ-साथ डीजल, जेट फ्यूल और एलपीजी जैसे उत्पादों की कीमतों में भी तेज उछाल देखने को मिला है. इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है. परिवहन और घरेलू खर्च दोनों में बढ़ोतरी हो रही है.
IEA ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मूज में तेल आपूर्ति को बहाल करना वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए बेहद जरूरी है. जब तक यह संभव नहीं होता, तब तक देशों को आपूर्ति और मांग दोनों स्तर पर कदम उठाने होंगे.
स्ट्रेट ऑफ होर्मूज में तेल आपूर्ति लगभग ठप
इसी दिशा में 11 मार्च को IEA सदस्य देशों ने एक बड़ा फैसला लिया. एजेंसी ने आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने का निर्णय लिया है. यह IEA के इतिहास में सबसे बड़ा स्टॉक रिलीज है. इसका उद्देश्य बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित करना है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक पड़ सकता है. ऐसे में IEA के सुझावों को अपनाना जरूरी माना जा रहा है, ताकि तेल की खपत कम हो और संकट का असर सीमित रखा जा सके.
तेल 100 डॉलर के पार, महंगाई का असर बढ़ा
मिडिल ईस्ट के हालात और तेल संकट ने यह साफ कर दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा अब दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है. आने वाले समय में सरकारों और आम लोगों को मिलकर ऐसे कदम उठाने होंगे, जिससे इस तरह के संकट से निपटा जा सके.