रविवार को श्रीकृष्ण जन्मभूमि में रात के 12 बजते ही भगवान के जन्म की खुशियां मनाई जाने लगीं. जन्मोत्सव में मंदिर जयकारों से गूंज उठा. चारों तरफ पुष्पवर्षा होने लगी. इसके बाद 12.30 बजे मंदिर का कपाट बंद हो गया. सुबह 3.30 बजे श्रीकृष्ण की मंगला आरती के बाद मंदिर के गेट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया.
रात के 12 बजते ही के बाद उन्हें पंचामृत से स्नान करवाया गया. इसमें सभी तीर्थों के जल थे. इनमें गंगा, यमुना सहित देश की सभी नदियों और समुद्र का जल शामिल था. वस्त्र धारण करने के बाद भगवान कृष्ण के शरीर पर चंदन और तुलसी का लेप लगाया गया, ताकि उन्हें ठंडक प्राप्त हो. इसके बाद उनके बालस्वरूप का श्रृंगार हुआ. उन्हें खास तरह का मयुरांबर पोशाक पहनाया गया और आरती हुई. इस दौरान ढोल-नगाड़े, झांझ-मजीरा, घंटे, तालियां और मृदंग की गड़गड़ाहट गूंजती रही. बालगोपाल को पाग, पंजीरी का भोग लगाया गया. कीर्तन से पूरी जन्मभूमि गुंजायमान रही.
मथुरा के भागवत भवन स्थित जाने के लिए हर कोई आतुर था. यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा, जिससे पैर रखने तक की जगह नहीं रही। कृष्ण भक्ति में डूबे केसरिया वस्त्रधारी संकीर्तन करते रहे. बाहर से आने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ती रही. चारों तरफ कन्हैया के मॉडर्न गीतों की धूम रही और सभी कृष्ण भक्त गानों में सराबोर नजर आए. सुरक्षा-व्यवस्था काफी चुस्त-दुरुस्त थी. साथ ही, जन्मभूमि के रेड जोन में जाने वाले लोगों की सघन तलाशी जारी रही.
Janmashtami celebrations at Iskcon temple in Mumbai
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Janmashtami celebrations underway in Mathura
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Krishna Janmashtami Celebrations: Throngs of people offer prayers at Iskcon Temple of Delhi
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