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क्या DMK परिसीमन बिल पर सरकार का करेगी समर्थन? पार्टी ने दिए संकेत

सरकार मॉनसून सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण बिल ला सकती है. इसके लिए बीजेपी पूरी तैयारी में जुटी हुई है. अगर सरकार को डीएमके का समर्थन मिलता है, तो उसके लिए जरूरी संख्या जुटाना काफी आसान हो जाएगा.

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क्या परिसीमन बिल पर मोदी सरकार को स्टालिन करेंगे समर्थन (Photo-ITG)
क्या परिसीमन बिल पर मोदी सरकार को स्टालिन करेंगे समर्थन (Photo-ITG)

संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है. ऐसा कहा जा रहा है कि मोदी सरकार इस सत्र में महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल ला सकती है. इन दोनों बिलों को पारित कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी. सरकार ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं.

हालांकि, इसके लिए उसे डीएमके जैसे विपक्षी दलों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है. इसी बीच इस मुद्दे पर डीएमके की प्रतिक्रिया सामने आई है. पार्टी का कहना है कि वह परिसीमन के खिलाफ नहीं है, लेकिन दक्षिणी राज्यों को कमजोर करने वाले किसी भी कदम का विरोध करेगी.

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के प्रवक्ता टीके.एस एलंगोवन ने कहा कि हम कभी भी परिसीमन के खिलाफ नहीं थे क्योंकि कानूनी तौर पर यह होना ही है. हम कानून के खिलाफ नहीं हैं. हमारी चिंता इस बात को लेकर है कि लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 की जा सकती है. बीजेपी ने इसके लिए कैसी तैयारी की है, इसे देखिए. नया संसद भवन करीब 850 सदस्यों के बैठने की क्षमता के हिसाब से बनाया गया है, जबकि लोकसभा की मौजूदा सदस्य संख्या 545 है. उन्होंने 850 सीटों की संभावना को ध्यान में रखते हुए पहले से ही योजना बना ली है. दूसरी बात यह है कि पहले जिन आंकड़ों पर चर्चा हुई थी, उनके अनुसार प्रस्तावित 850 सीटों में से चारों दक्षिणी राज्यों को मिलाकर केवल करीब 170 सीटें मिलेंगी, जबकि उत्तरी राज्यों के हिस्से में लगभग 680 सीटें आएंगी.

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परिसीमन बिल के सबसे मुखर विरोधियों में डीएमके का नाम आता है. डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन का तर्क है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए बेहतर काम करने वाले दक्षिणी राज्यों को परिसीमन के बाद नुकसान उठाना पड़ सकता है. डीएमके के विरोध के चलते ही जब अप्रैल में इस बिल को पेश करने की चर्चा हुई थी, तब यह आगे नहीं बढ़ पाया था. ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि डीएमके इस बार मानसून सत्र में इस बिल का समर्थन कर सकती है.

डीएमके की जरूरत क्यों?

अगर सरकार लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करना चाहती है, तो उसे विपक्षी दलों के समर्थन की जरूरत होगी. संसद में संविधान संशोधन संबंधी किसी भी बिल को पारित कराने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है. एनडीए के पास 293 सांसद हैं. टीएमसी के 20 और शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों का समर्थन मिलने पर यह संख्या 319 तक पहुंचती है. जबकि 543 सदस्यीय लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों का समर्थन चाहिए होगा. डीएमके के 22 लोकसभा सांसद हैं. ऐसे में अगर सरकार को डीएमके का समर्थन मिल जाता है, तो आवश्यक संख्या जुटाना उसके लिए आसान हो सकता है.

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