पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा का रविवार को उनके ही खेत में अंतिम संस्कार कर दिया गया. हत्या के 26 दिन बाद परिवार ने उन्हें आखिरी विदाई दी. चंडीगढ़ के PGI से झोटा का पार्थिव शरीर मानसा लाया गया, जहां बड़ी संख्या में लोग जुटे. इस दौरान लोगों ने उनके पार्थिव शरीर पर फूल बरसाए और 'परविंदर झोटा अमर रहे' के नारे लगाए. शव को पहले प्रदर्शन स्थल पर ले जाया गया और फिर उनके घर पहुंचाया गया. इसके बाद परिवार के खेत में अंतिम संस्कार किया गया.
झोटा के पिता भीम सिंह ने बेटे की हत्या के पीछे राजनीतिक नेताओं और पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया है. उन्होंने मामले की पूरी जांच कराने और स्थानीय SSP का तत्काल तबादला करने की मांग की. भीम सिंह ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार और स्थानीय पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से नशा तस्करों ने उनके बेटे की हत्या की साजिश रची. उन्होंने कहा कि हत्या के पीछे जिन राजनीतिक लोगों का हाथ है, वे अब भी खुलेआम घूम रहे हैं. उनके मुताबिक, जब तक मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती और साजिश में शामिल लोगों को जेल नहीं भेजा जाता, परिवार को शांति नहीं मिलेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के नेता स्थानीय पुलिस अधिकारी को बचा रहे हैं.
परिवार ने झोटा को बताया समाज का योद्धा
इससे पहले परिवार के सदस्यों ने झोटा को नशे के खिलाफ लड़ने वाला योद्धा बताया था. उनका कहना था कि उन्होंने समाज के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी. परिवार ने उम्मीद जताई कि झोटा की लड़ाई से पंजाब के युवा प्रेरणा लेंगे और नशे के खिलाफ अभियान में आगे आएंगे. परिवार के एक सदस्य ने कहा कि आमतौर पर किसी की मौत पर मातम मनाया जाता है, लेकिन वे अपने योद्धा के आने पर गर्व महसूस कर रहे हैं.
परविंदर झोटा के रिश्तेदार जसपाल ने बताया कि श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से उन्हें शहीद का दर्जा दिया गया है. इसी वजह से उनके पार्थिव शरीर पर फूल बरसाए जा रहे हैं. परिवार ने दिवाली के मौके पर भी युवाओं से नशे से दूर रहने और पंजाब से नशे को खत्म करने की मुहिम में शामिल होने की अपील की थी.
13 अक्टूबर को मेडिकल स्टोर में हुई थी हत्या
परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा के एक भीड़भाड़ वाले बाजार में मेडिकल स्टोर के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वह मेडिकल स्टोर के मालिक अश्वनी कुमार से एक बुजुर्ग को कथित तौर पर प्रतिबंधित दवाएं बेचने को लेकर भिड़ गए थे. इस दौरान वह फेसबुक पर पूरी घटना का लाइव प्रसारण भी कर रहे थे. तभी उन पर गोली चला दी गई. इस घटना में चार अन्य लोग भी घायल हुए थे. पुलिस ने वारदात के 24 घंटे के भीतर अश्वनी कुमार समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया था.
हत्या के बाद परिवार ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया था और झोटा का शव मानसा सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ था. परिवार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्य के DGP गौरव यादव के इस्तीफे की मांग भी की थी. अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने हत्या के मामले को दोबारा दर्ज कर इसकी विस्तृत जांच शुरू कर दी है.