पंजाब के फिरोजपुर जिले में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है. इसके बावजूद जिले में अब तक खेतों में आग लगाने के 23 मामले सामने आ चुके हैं. इनमें से 10 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है. खास बात यह है कि इन 10 एफआईआर में से 7 मामले एक ही दिन दर्ज किए गए हैं.
प्रशासन ने खेतों में आग लगने की सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर आग बुझाने के निर्देश दिए हैं. अब अधिकारी सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खुद खेतों में पहुंचकर आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं. इसी क्रम में एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (डेवलपमेंट) कृष्णा पाल राजपूत भी खेतों में पहुंचकर आग बुझाने के अभियान में जुटे हैं.
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खेतों में पहुंचकर हालात का जायजा ले रहे अधिकारी
एडीसी (डी) कृष्णा पाल राजपूत ने बताया कि जिले में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है. वह खुद भी फील्ड में जाकर स्थिति का जायजा लेते हैं. इसके अलावा जिले के सभी एसडीएम को भी अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहने के निर्देश हैं.
उन्होंने बताया कि जहां भी खेतों में आग लगने की जानकारी मिलती है, वहां संबंधित अधिकारी तुरंत पहुंचकर आग बुझाने का प्रयास करते हैं. प्रशासन का जोर पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और खेतों में आग लगने की सूचना पर त्वरित कार्रवाई करने पर है.
किसान नेता बोले- FIR और रेड एंट्री से किसानों को किया जा रहा जलील
वहीं, किसान नेता अवतार सिंह ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि किसान अब पहले की तुलना में काफी जागरूक हो चुके हैं और अपने स्तर पर ही पराली के निपटारे के लिए काम कर रहे हैं.
अवतार सिंह के मुताबिक, किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना और जमीन के रिकॉर्ड में रेड एंट्री करना उन्हें जलील करने जैसा है. उन्होंने कहा कि किसान देश के लिए अनाज पैदा करते हैं, ऐसे में उनके साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए.