आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने दावा किया है कि दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर उनके प्रस्तावित आरक्षण-समर्थक विरोध प्रदर्शन की अनुमति रद्द कर दी है, जबकि प्रदर्शन में केवल दो दिन ही बचे थे.
मंगलवार को आजाद ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने 24 सितंबर को होने वाले विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. आजाद समाज पार्टी ने पहले जंतर-मंतर पर एक दिन के आरक्षण-समर्थक प्रदर्शन की घोषणा की थी. पार्टी ने 17 सितंबर को इस विरोध प्रदर्शन की घोषणा की थी.
अनुमति रद्द होने की खबर के बाद, आजाद समाज पार्टी ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर वीडियो शेयर किया. इसमें चंद्रशेखर आजाद ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने 24 सितंबर के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया है.
अनुमति न मिलने के बावजूद, आजाद ने कहा कि विरोध आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने उसी तारीख को देश भर में जिला-स्तरीय प्रदर्शनों का आह्वान किया और कहा कि सरकार को जवाब दिया जाएगा.
उनकी पार्टी अपने सोशल मीडिया चैनलों पर 24 सितंबर के कार्यक्रम का प्रचार करती रही है, जिसमें '24 सितंबर चलो जंतर-मंतर' जैसे नारों का इस्तेमाल किया जा रहा है और इसे 'संपूर्ण भागीदारी महाआंदोलन' कहा जा रहा है.
इन विरोध प्रदर्शनों के लिए चुनी गई तारीख आम नहीं है और इसका ऐतिहासिक महत्व है. तारीख का चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 1932 के पूना पैक्ट की वर्षगांठ है.
इस समझौते ने 'दलित वर्गों' (Depressed Classes) के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र की डॉ. बी.आर. अंबेडकर की लंबे समय से चली आ रही मांग को संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र के तहत आरक्षित सीटों की प्रणाली से बदल दिया था.
इजाजत नहीं मिलने के बाद चंद्रशेखर आजाद ने कहा, 'देश में अघोषित आपातकाल लागू है. हमने 20 दिन पहले अनुमति के लिए आवेदन किया था और बार-बार आश्वासन दिया गया था कि अनुमति मिल जाएगी. हमारी तमाम कोशिशों के बाद, हम पर यह आदेश थोप दिया गया, जिससे हमारी अनुमति रद्द हो गई. असल में हमें चेतावनी दी गई कि अगर हम बिना मंज़ूरी के संवैधानिक तरीके से आगे बढ़े, तो हमारे खिलाफ कानूनी मामले दर्ज किए जाएंगे. मैं सरकार से यह कहना चाहता हूं: कुछ लड़ाइयां बड़े बलिदान की मांग करती हैं, और हम उन्हें देने के लिए तैयार हैं.'
चंद्रशेखर ने दावा किया कि उन्होंने मांग उठाई कि अगर जंतर-मंतर नहीं तो रामलीला मैदान में प्रदर्शन की इजाजत दी जाए. लेकिन ऐसा भी नहीं किया गया.