भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी टीम के महामंत्रियों को अलग-अलग राज्यों की कमान सौंपी है. बीजेपी ने दिग्गज और युवा चेहरों को अहम जिम्मेदारियां सौंपकर उनके कद को बढ़ाया है. चुनावी तैयारियों और पार्टी के विस्तार के लिहाज से बीजेपी ने अपने कई ऐसे नेताओं पर फिर से भरोसा जताया है, जिन्होंने सांगठनिक क्षमता और क्षेत्रीय समीकरणों में खुद को साबित किया है.
बीजेपी संगठन में जगह मिलने के बाद अब स्मृति ईरानी, हरीश द्विवेदी, राम माधव और अनिल एंटनी समेत छह ऐसे प्रमुख नाम शामिल हैं, जिन्हें पार्टी ने अलग-अलग सूबों का प्रभार सौंपा है. इतना ही नहीं, राम माधव और सतीश पूनिया को चुनावी राज्यों की कमान भी दी गई है.
बीजेपी ने राष्ट्रीय महामंत्री को सौंपी राज्य की प्रभार
बीजेपी की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ और हरियाणा का प्रभारी बनाया है, तो हरीश द्विवेदी को बिहार और कर्नाटक की कमान सौंपी है. सतीश पूनिया को पंजाब के साथ जम्मू-कश्मीर का प्रभारी बनाया गया है. राम माधव को तमिलनाडु के साथ उत्तराखंड की कमान सौंपी है.
वहीं, सुनील बंसल को बंगाल के साथ तेलंगाना का प्रभारी पहले की तरह बनाए रखा गया है. अनिल एंटनी को नागालैंड का प्रभारी और गोवा का सह-प्रभारी बनाया गया है. पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में अगले साल की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसे चुनावी रणनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है.
हरीश द्विवेदी का संगठन में लगातार बढ़ता कद
उत्तर प्रदेश के बस्ती से आने वाले पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी बीजेपी के सबसे भरोसेमंद सांगठनिक चेहरों में से एक बनकर उभरे हैं. द्विवेदी इससे पहले राष्ट्रीय सचिव के रूप में बिहार जैसे महत्वपूर्ण राज्य के प्रभारी रह चुके हैं. अब बीजेपी ने उन्हें बिहार के साथ-साथ कर्नाटक का प्रभारी बना दिया है.
वे यूपी में बीजेपी का बड़ा ब्राह्मण चेहरा माने जाते हैं और बस्ती से दो बार सांसद रहे हैं. चुनावी प्रबंधन, बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं में पकड़ और सांगठनिक अनुशासन के चलते केंद्रीय नेतृत्व ने उनके कद को बढ़ाते हुए बड़े राज्यों में चुनाव प्रबंधन की अहम जिम्मेदारी सौंपी है. बीजेपी ने नितिन नवीन की टीम में उन्हें महामंत्री बनाया, उसके बाद युवा मोर्चा का प्रभार सौंपा और अब उन्हें बिहार के साथ कर्नाटक की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
स्मृति ईरानी के बीजेपी में फिर पुराने दिन लौटे
लोकसभा चुनाव में हार के बाद स्मृति ईरानी को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे. हालांकि, भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिकाओं और वैचारिक मोर्चे पर पार्टी का रुख मजबूती से रखने की जिम्मेदारी दी है. स्मृति ईरानी को नितिन नवीन की टीम में पहले महामंत्री बनाया गया और अब उन्हें बीजेपी शासित राज्य हरियाणा और छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया है.
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बीजेपी कैडर और सार्वजनिक संवाद में स्मृति ईरानी की आक्रामक शैली को देखते हुए उन्हें कई राज्यों के संगठनात्मक प्रवास और विशेष रणनीतिक अभियानों में आगे रखा जा रहा है. हरियाणा और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सियासी जड़ों को मजबूत करने की जिम्मेदारी स्मृति ईरानी के कंधों पर होगी.
राम माधव की संगठन में वापसी और बढ़ता कद
बीजेपी के सांगठनिक ढांचे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ विचारक और रणनीतिकार राम माधव का सियासी कद एक बार फिर प्रमुखता से उभरा है. बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में पहले उनकी मुख्यधारा में वापसी हुई और अब उन्हें दो राज्यों का प्रभारी बनाया गया है. साल 2020 में राष्ट्रीय महासचिव के पद से हटने और पुनः संघ के कार्यक्षेत्र में लौटने के बाद राम माधव की भाजपा के केंद्रीय संगठन में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर वापसी हुई है.
राम माधव की यह नई पारी भाजपा और आरएसएस के बीच बेहतर समन्वय बनाने और 2029 की चुनावी मोर्चेबंदी के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है. राम माधव को दक्षिण भारत के तमिलनाडु के साथ चुनावी राज्य उत्तराखंड का प्रभारी बनाया गया है. तमिलनाडु बीजेपी के लिए अभी भी काफी मुश्किल जमीन मानी जा रही है, जबकि उत्तराखंड में बीजेपी के सामने सत्ता की हैट्रिक लगाने की चुनौती है.
असम, त्रिपुरा और नागालैंड में भाजपा की सरकारें बनवाने तथा पूर्वोत्तर राज्यों में पार्टी का आधार मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में पार्टी की सियासी जड़ों को मजबूत बनाने में उनका अहम रोल रहा. इसके चलते ही उन्हें अब 'मिशन साउथ' के तहत तमिलनाडु की कमान सौंपी गई है, जो बीजेपी के लिए सबसे मुश्किल जमीन बनी हुई है.
सुनील बंसल का सियासी कद बरकरार
उत्तर प्रदेश में पार्टी को मजबूत आधार देने के बाद सुनील बंसल को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी. मौजूदा समय में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तेलंगाना जैसे राज्यों में पार्टी के विस्तार का जिम्मा उन्हीं के कंधों पर है. ओडिशा में पार्टी की अभूतपूर्व सफलता और बंगाल में संगठन को मजबूत बनाने के बाद भाजपा ने उन्हें पश्चिम बंगाल के साथ तेलंगाना का प्रभारी बनाए रखा है.
भाजपा के सांगठनिक और चुनावी ढांचे में सुनील बंसल का नाम आज पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों और केंद्रीय नेतृत्व के सबसे भरोसेमंद चेहरों में गिना जाता है. पर्दे के पीछे रहकर काम करने की अपनी शैली, माइक्रो-मैनेजमेंट और जमीनी स्तर पर कैडर को एक सूत्र में पिरोने की क्षमता के कारण उन्हें भाजपा का 'इलेक्शन इंजीनियर' भी कहा जाता है. बंसल को अभी तक जितने राज्यों की कमान सौंपी गई है, उनमें से तेलंगाना को छोड़कर बाकी राज्यों में कमल खिलाने में वे कामयाब रहे हैं; अब उनके लिए तेलंगाना में बीजेपी की सरकार बनवाने का चैलेंज है.
हार के बाद कैसे बढ़ता गया पूनिया का कद
राजस्थान में 2023 के विधानसभा चुनाव में आमेर सीट से मिली हार और उससे पहले प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि डॉ. सतीश पूनिया का राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है. हालांकि, बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने उनके सांगठनिक अनुभव और जाट समाज में पैठ को देखते हुए उन पर बड़ा दांव खेला, जिससे उनके सियासी कद में अभूतपूर्व उछाल आया है.
विधानसभा चुनाव हारने के बाद पूनिया को हरियाणा की कमान सौंपी गई, जहां वे बीजेपी की हैट्रिक लगवाने में सफल रहे. बीजेपी ने लगातार तीसरी बार राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई. इस चुनावी सफलता ने केंद्रीय संगठन में उनके प्रति भरोसे को कई गुना बढ़ा दिया. इसके चलते बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा भेजा और उसके बाद नितिन नवीन की टीम में महामंत्री बनाया गया. अब उन्हें पंजाब के साथ जम्मू-कश्मीर का प्रभारी बनाया गया है. इसके पहले उन्हें बीजेपी अनुसूचित जनजाति मोर्चे के प्रभारी के तौर पर भी नियुक्त किया गया था.
अनिल एंटनी को बीजेपी में मिलता प्रमोशन
पूर्व रक्षा मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता ए.के. एंटनी के बेटे अनिल एंटनी का बीजेपी में शामिल होने के बाद से ही सियासी सफर बेहद तेजी से आगे बढ़ा है. दक्षिण भारत के केरल से आने वाले एंटनी को आगे कर बीजेपी अपने जनाधार और विस्तार की रणनीति में जुटी है.
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने अनिल एंटनी को पहले अपनी टीम में राष्ट्रीय सचिव बनाया और अब उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए नागालैंड का प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया है. इसके साथ ही गोवा का सह-प्रभारी बनाया गया है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा जारी राज्य प्रभारियों की सूची में अनिल एंटनी को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है.
पूर्वोत्तर के राज्यों में संगठन का विस्तार करने और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को साधने का जिम्मा अब उनके कंधों पर है. इसके अलावा गोवा में अगले साल की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां बीजेपी 10 साल से सत्ता में है. ऐसे में उनके सामने पूर्वोत्तर के साथ-साथ गोवा में बीजेपी की सियासी जड़ों को मजबूत बनाए रखने का जिम्मा सौंपा गया है.