तृणमूल कांग्रेस के अंदर चल रही खींचतान अब भावनात्मक मोड़ ले चुकी है. बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के बेटे डॉ. बैद्यनाथ घोष को बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर गेट पर ही रोक दिया गया. वो शादी में मिले गिफ्ट लौटाने आए थे, लेकिन पुलिस और स्टाफ ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया और न ही सामान स्वीकार किया.
डॉ. बैद्यनाथ घोष दस्तीदार पेशे से मनोचिकित्सक हैं और राजनीति से दूरी बनाए रखते हैं. ममता बनर्जी ने उन्हें शादी में सोने का नेकलेस गिफ्ट किया था. वो उसे ही लौटाने के लिए आए थे.
डॉ. बैद्यनाथ के मुताबिक, 'मैं कुछ देर बाहर इंतजार करता रहा, लेकिन न तो मुझे अंदर जाने दिया गया और न ही पुलिस और वहां मौजूद स्टाफ नेकलेस और चिट्ठी स्वीकार की. चूंकि मैं ये गिफ्ट व्यक्तिगत रूप से वापस नहीं कर पा रहा हूं, इसलिए मैंने इन्हें कालीघाट मंदिर में मां काली को अर्पित करने का फैसला किया है.'

उन्होंने कहा कि गिफ्ट लौटाने का फैसला उनकी अंतरात्मा की आवाज पर है. TMC नेताओं द्वारा उनके चरित्र हनन के बाद उन्होंने ये कदम उठाया.
उन्होंने कहा कि मुझे बचपन से ही ममता बनर्जी के लिए गहरा प्यार, सम्मान और स्नेह रहा है. मैं समझता हूं कि दुर्गा पूजा और मेरी शादी के समय उनसे मिले गिफ्ट आशीर्वाद थे. ऐसे आशीर्वाद अनमोल होते हैं और सच में लौटाए नहीं जा सकते. लेकिन पिछले कई दिनों से कई सांसदों और राजनीतिक नेताओं ने मेरे बारे में बहुत दुखद और अपमानजनक टिप्पणियां की हैं, जबकि मैं राजनीति में नहीं हूं.
उन्होंने दुख जताया कि एक निजी पारिवारिक मामले को सियासी लड़ाई में घसीटा गया है. उन्होंने कहा कि मेरे लिए आशीर्वाद का मतलब प्यार, सद्भावना और आपसी सम्मान से है. बिना प्यार के आशीर्वाद का भावनात्मक महत्व खत्म हो जाता है. उन्होंने साथ ही साफ किया कि ममता बनर्जी के लिए मेरा प्यार, सम्मान और आदर पहले जैसा ही है.
आखिर में उन्होंने TMC की IT सेल और समर्थकों से अपील करते हुए कहा कि मैं तृणमूल कांग्रेस IT सेल और सभी संबंधित लोगों से ईमानदारी से अनुरोध करता हूं कि वो उस चीज का मजाक न उड़ाएं या उसे तुच्छ न समझें जो मेरे और मेरे परिवार के लिए एक गहरी व्यक्तिगत त्रासदी है.