कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में इस्तेमाल हो रही नकली दवाओं और जीवनरक्षक इंजेक्शन की बिक्री का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इस मुद्दे को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) में नकली दवाओं के बनने और बिक्री को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई की मांग की गई.
कानून में खामी का मुद्दा उठा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील अश्विनी उपाध्याय ने दावा किया कि बेंगलुरु के अस्पतालों में नकली कैंसर की दवाएं सप्लाई की गईं, जबकि राजस्थान में नकली इंजेक्शन पहुंचाए जाने के मामले सामने आए हैं. उन्होंने कहा कि नकली जीवनरक्षक दवाओं से लोगों की जान को गंभीर खतरा है. सुनवाई के दौरान कानून में कथित खामी का मुद्दा भी उठाया गया. इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि इस संबंध में कानून मौजूद है और इसमें उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है.
नकली दवा अपराध को संगठित अपराध की श्रेणी में शामिल करने की याचिका
वकील उपाध्याय ने सुनवाई के दौरान कहा, 'आतंकवादी एक साल में अधिकतम 1,000 लोगों की जान लेते हैं, जबकि नकली दवाओं के कारण लाखों लोगों की मौत होती है.' यह याचिकाकर्ता का दावा था. उन्होंने दलील दी कि इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए इसे संगठित अपराध की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए. इस पर CJI ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या उन्होंने अपने सुझाव और सिफारिशें संबंधित सरकारी अधिकारियों को दी हैं?
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मामले को सख्ती से निपटने की जरूरत
CJI ने सुनवाई के दौरान नकली कफ सिरप से जुड़े मामले का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जब नकली कफ सिरप का मामला सामने आया था, तब सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त आदेश पारित किए थे. याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि नकली दवा किसी व्यक्ति को देना अपराध है, लेकिन नकली दवाओं के निर्माण और उनकी बिक्री को 'संगठित अपराध' की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया है. याचिका में इस पहलू को उठाते हुए कहा गया कि नकली दवाओं के कारण लोगों की मौत तक हो सकती है और ऐसे मामलों से सख्ती से निपटने की जरूरत है.
CJI ने कहा कि अदालत अधिकारियों को तीन महीने के भीतर मुकदमा चलाने का निर्देश दे सकती है, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर गवाहों के सामने नहीं आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं और इससे मुकदमों में देरी होगी.अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह अपने सुझाव संबंधित अधिकारियों को भेजें और उन्हें उन पर कार्रवाई करने दें. कोर्ट ने टिप्पणी की कि मामले को अदालत में लंबित रखने की तुलना में यह तरीका ज्यादा प्रभावी हो सकता है.